9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past: अरुणा आसफ अली

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

अरुणा आसफ अली

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प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम भारतीय क्रांतिकारी एवं समाज सुधारक अरुणा असफ अली  के बारे में चर्चा करेंगे तथा साथ उनके द्वारा किये गए महत्वपुर्ण कार्यों के बारे में चर्चा करेंगे।. अपने महत्वपूर्ण कार्यो के चलते इन्हें 1964 में अंतर्राष्ट्रीय लेनीन शांति पुरस्कार तथा 1992 सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार एवं मरणोपरांत 1997 भारत रत्न से सम्मानित किया गया।. 

महत्वपुर्ण पद एवं सम्मान

  1. 9 अगस्त 1942 में हुए मुम्बई अधिवेशन का कार्य भार सम्भालते हुए अधीवेशन में अपनी एक अहम भूमिका अदा कि ,आरुणा आसफ अली ने  मुम्बई के ग्वलिया टैंक मैदान तिरंगा झण्ड़ा फहराकर भारत छोड़ो अंदोलन की शुभ आरम्भ किया।. 
  2. इसके साथ ही राम मनोहर लोहिया के साथ मिलकर कांग्रेस पार्टी की मासिक पत्रिका इंकलाब का संपादन किया।.
  3. 1958 में इन्हें दिल्ली नगर निगम में इनका चयन मेयर के रुप में हुआ, जहां पर इन्होंने नगर निकाय के विकास में महत्वपूर्ण कार्य किये।.
  4. 1964 में इन्हें अंतर्राष्ट्रिय लेनिन शांति पुरस्कार के सम्मानित किया गया।.
  5. 29 जूलाई 1996 को इनके निधन के बाद 1997में इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।.

जीवन परिचय

इनका जन्म एक बंगाली परिवार में 16 जूलाई 1909 हरियाणा में हुआ।. शादी से पहले इनका नाम अरुणा गांगुली था जोकि एक ब्राह्मण परिवार में पैदा होने के कारण पड़ा था।. इनके पिता का नाम उपेन्द्रनाथ गांगुली था।. वे अपने पिता की चार संतानों में से एक थीं।.इनकी बहन का नाम पूर्णिमा बनर्जी  तथा भाई का नाम धीरेन्द्रनाथ गांगुली तथा दुसरे भाई का नाम नागेन्द्रनाथ गांगुली था।.1928 में 21 साल की उम्र में इनकी शादी आसफ अली खां से हुई।. वे पेशे से वकील एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।.अरुणा असफ अली  की कोई संतान नही हुई।.

शिक्षा

नैनिताल में इनके पिता का रोजगार के रुप में एक होटल था जिसके परिणामस्वरुप इनकी स्कूली  शिक्षा नैनीताल में हुई।. वे पढ़ाई लिखाई में सदैव अवल आती थीं।. नैनीताल और लहौर की शिक्षा ग्रहण करने के बाद अरुणा असफ अली खान ने कोलकत्ता के गोखले मेमोरियल कालेज आध्यापन का कार्य प्रारम्भ कर दिया।.

आज़ादी की लड़ाई में योगदान

अपने शिक्षण कार्यकाल के दौरान ही देश में चल रही अंतरिक गतिविधियों ने उन्हें बहुत प्रभावित किया।. अंग्रेज़ी प्रशासन के अत्याचारों तथा अच्यूत पटवर्धन एवं जय प्रकाश नारायण साथ ही राम मनोहर लोहिया जैसे समाज सेवीयों के विचारों ने उन पर गहरा प्रभाव ड़ाला।. अतः वे भी उनके साथ आज़ादी की लड़ाई में शामिल हुईं।.अपने क्रांतिकारी जीवन काल में 1930 से लेकर 1942 तक का समय जेल में बिताना पड़ा ।. 1942 में उन्हें रिहा किया गया परन्तु गांधी जी एवं अन्य नेताओं कि गिरफ्तारी के तत्काल बाद इन्होंने विरोधी सभा का आयोजन मुम्बई में  किया तथा अंग्रेज़ सरकार के कड़ी चुनौति दी।. 

जिसके परिणामस्वरुप अंग्रेज सरकार ने इनके नाम का वारेंट जारी कर दिया , इसके बाद से वे अपनी योजनाओं के गुप्त रुप से आन्जाम देने लगीं।. इन्होंने गुप्त रुप से कांग्रेस पार्टी का समर्धन किया, ताकि वे जेल से बाहर रहकर इनका कार्य कर सकें।. 1942 से 1946 तक के समय काल में देशभर में घूमकर जन समाज के उनके अधिकारों के प्रति जागरुक किया पुलिस हमेशा उन्हें पकड़ने में नाकाम रही।. 1946 में कांग्रेस पार्टी की मदत तथा अन्य सहयोगियों की सहायता से उनके नाम का वारेंट रद्द करवा दिया गया।. 

इसके बाद वे खुलकर जनता के समक्ष प्रस्तुत हुय़ी।.1947 में उन्हें कांग्रेस कमेटी की सदस्य के रुप ने चुना गया ।. 1948 में  वें कांग्रेस से अलग होकर सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गयीं , दो साल के कार्य काल के बाद उन्होंने 1950 में लेफ्ट सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना करी और मजदूर अंदोलन में अपनी जान लगा दी।. अतः 1955 में इस पार्टी का विलय भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी में विलय हो गया।. जोकि भाजपा से सम्बन्धित थी इसके बाद भाजपा की केन्द्रिय समिति का सदस्य चुना गया।. 1958 में उन्होंने कम्यनिष्ट पार्टी से इस्तिफा दे दिया।. 1958 में उन्होंने दिल्ली नगर निगम में मेयर का कार्य भार सम्भाला ।. 1964 पं0 जवाहर लाल कि मृत्यु के पश्चचात उनका कांग्रेस पार्टी में पुनः अगमन हुआ मगर वे इस समय काल में ज्यादा सक्रिय नहीं रहीं।.

इसके अलावा वें कयी महत्वपुर्ण संस्थानो से जुड़ीं

अरुणा असफ अली  दिल्ली के दैनिक समाचार पत्र पेट्रियट से अपने स्मपुर्ण जीवन काल तक जुड़ी रहीं।. इसके अलावा वे इंडोसोवियत कल्चरल सोसाइटी, आल इंड़िया पीस काउंसिल ,नेशनल फैड़रेशन आफ इंडियन वूमैन आदि से जूड़ी।. उनके द्वारा किये गये उपरोक्त महत्वपुर्ण कार्यों से आप अनूमान लगा सकते है कि लिए कितनी महत्वपुर्ण थीं।.

लेख से सम्बन्धित महत्वपुर्ण प्रशन

अरुणा असफ अली की जिन्दगी कैसी रही थी।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अरुणा असफ अली किस भूमिगत क्रिया कलाप की प्रमुख महिला संगठन की अध्यक्ष थीं।
अरुणा असफ अली को कहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ध्वज फहराने के लिए याद किया जाता है।

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