9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past: भोज शाला

मंगलवार, 19 मई 2026

भोज शाला

bhojshala
प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम मध्य प्रदेश धार ज़िले में विद्दमान भोजशाला के बारे में बात करेंगे। इसके साथ ही राजा भोज तथा मंदिर के निर्माण के पीछे के रहस्य तथा वर्तमान समय में यह चर्चा का विषय क्यों बना हुआ है इस विषय पर बात करेंगे। हाल ही में समय में इंदौर हाई कोर्ट ने इस भोज शाला पर एक ऐतिहासिक फैसला दिया है इस फैसले के वर्तमान परिणामों के बारे में चर्चा करेंगे। यह विषय इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ए एस आई यानी आरकोलोजिकल सर्वे आप इण्डिया द्वारा संरक्षित किया गया है इसके साथ ही यह ऐतिहासिक पुरातत्व स्थल भी है।

भोज शाला

हिंदू समुदाय के लोगों का मानना था कि इस भोज शाला को परमार वंश के राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में बनवाया था जिसे शारदा सदन के नाम से भी जाना जाता है। राजा भोज के समय काल में इस भोज शाला में संस्कृत भाषा का पठन पाठन किया जाता है इसे संस्कृत विश्वविद्यालय माना गया था। इसी भोज शाला में वाग्देवी का एक मंदिर भी था जिन्हें हम मां सरस्वती के नाम से भी जानते है। अतः इस मंदिर के कारण ही इस परिसर के शारदा सदन भी कहा जाता था। 

कालांतर में मुस्लिम शासक महमुद शाह खिलजी ने 1457 में शारदा सदन के तुड़वाकर वहां  मस्जिद का निर्माण करा दिया गया। समय अन्तराल के बाद इस मस्जिद में मौलाना कमालुद्दीन नामक मुस्लिम व्यक्ति आ कर रहने लग गये । जब कमालुद्दीन का निधन हो गया तब मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार इस परिसर को मौलाना कमालुद्दीन की मस्जिद एवं उसके परिसर के नाम से जाना जाने लगा था। जिसके कारण यह विवाद कई वर्षों से उच्च न्यायालय में विचाराधीन था। उपरोक्त कारणों से यह हिन्दू- मुस्लिम विवाद का मुख्य कारण बना हुआ था।

हाई कोर्ट का फैसला

15 मई 2026 को यह ऐतिहासिक फैसला मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय की इंदौर खण्ड पीठ द्वारा सुनाया गया जिसमें न्यायालय ने कहा की यह वास्तव में राजा भोज द्वारा निर्मित भोज शाला ही है न की कोई मस्जिद। इस फैसले को सुनाने से पहले हाई कोर्ट की बैंच ने ए एस आई द्वारा क्षेत्र विशेष पर किए गए अध्ययन कि रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें प्राचीन मंदिर के होने के साक्ष्य मिले थे। अतः कोर्ट का फैसला हिन्दू समाज के पक्ष में आया। अब वे इस परिसर में बिना रोक टोक के पुजा अर्चना कर सकते है। वर्तमान समय में देखा जाये तो ऐसे बहुत से स्थल विवाद पूर्ण हैं जिनमें से बहुत से स्थलों पर मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है।

सोर्स

15 मई 2026 को टाईम्स आफ इण्डिया ने इस फैसले का प्रकाशन अपनी रिपोर्ट में शीर्षक Bhojhsala complex is temple of goddess vag devi, Hindus have right to woship Madhya Pradesh high court के साथ प्रकाशित किया। इसके साथ ही इसका विडियों संस्करण जिसे 18 मई 2026 को प्रकाशित किया जिसमें परिसर में मां सरस्वती की नवीनतम मूर्ति स्थापना तथा पुजा अर्चना करते हुए दिखाया गया है।

17 मई 2026 को द हिन्दू पत्रिका ने भी शीर्षक Madhya Pradesh bhojshala case and the crack in the places of worship Act के नाम से प्रकाशित किया गया है। 
 

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