प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में हम भारत सबसे ज्यादा विद्वान राजाओं कि श्रेणी में आने वाले राजा भोज के बारे में चर्चा करेंगे। इसके साथ ही हम उनके द्वारा किए गये महत्वपूर्ण कार्यों तथा उनके द्वारा लड़े गये युद्ध तथा उनके प्रारम्भिक जीवन पर भी प्रकाश डालेंगे। तथा उनके द्वारा निर्माण किए महत्वपूर्ण स्थलों के बारे में विचार करेंगे।
जीवन परिचय
राजा भोज पवर वंश के राजा थे जिसे हम परमार वंश के नाम से भी जानते है राजा भोज के पिता का नाम सिंधु राज था। बचपन में ही इनके माता पिता का देहांत हो गया था जिसके कारण इनका पालन पोषण इनके चाचा भूंजराज ने किया था। बचपन से ही वे एक मेधावी छात्र थे जिसके कारण उन्होंने शस्त्र और शास्त्र में माहारथ हासिल कर रखी थी। अपने पिता सिंधुराज तथा चाचा भुजराज की मृत्यु के बाद राजा भोज गद्दी पर बैठे। इन्होंने 1005 ईस्वी से लेकर 1055 ईस्वी तक शासन किया। राजा भोज ने अपनी साम्राज्य की सुरक्षा के लिए कई युद्ध लड़े जिनमें से कुछ प्रमुख यु्द्धों के बारे में हम नीचे चर्चा करने जा रहे है।
चावुक्यों का आक्रमण
राजा भोज ने कल्याणी चालुक्य के राजा जय सिंह द्वितीय को पराजित किया तथा अपने चाचा भुंज राज का बदला दिया।
चंदेल और कलचूरी वंश का आक्रमण
राजा भोज ने अपनी शक्ति का लोहा मनवाते हुए चंदेल के और कलचुरी वंश के राजाओं को पराजित किया।
विदेशी आक्रमण
राजा भोज में विदेशी आक्रमण कारीयों को पराजित करने के लिए भारतीय राजाओं के एक संघ की स्थापना की थी। इस संघ ने विदेशी आक्रमण कारियों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। खासकर पश्चिमोत्तर सीमा से आने वाले महमूद गजनवी के तुर्क आक्रमण कारियों के खिलाफ। अतः राजा भोज का साम्राज्य पूर्व में विदीशा से लेकर पश्चिम में साबर मती नदी तक एवं उत्तर में चितौड़ से लेकर दक्षिण में कोंकण तक फैला हुआ था।
राजा भोज द्वारा रचित ग्रंथ
राजा भोज स्वयं एक प्रखर विद्वान और लेखक थे उन्होंने विभिन्न विषयों पर 84 से अधिक ग्रंथों कि रचना की थी उनके कुछ प्रसिद्ध ग्रंथों का उल्लेख नीचे किया गया है।
1.समरांगण सूत्र धारा
यह ग्रंथ वास्तुकला एवं नगर नियोजन तथा यंत्रों पर लिखा गया था।
2.सरस्वती कंठा भरण
यह व्याकरण और काव्य शास्त्र पर आधारित उनकी सुप्रसिद्ध रचना है।
3.श्रृंगार प्रकाश
यह साहित्य और रस सिद्धांत पर लिखा गया ग्रंथ है।
4.आयुर्वेद सर्वस्व
चिकित्सा और आयुर्वेद पर आधारित इस ग्रंथ की रचना राजा भोज द्वारा कि गई।
5.भोजशाला
धार में राजा भोज ने भोज शाला का निर्माण करवाया जिसे उस समय काल का संस्कृत विश्वविद्यालय कहा जाता था।
निर्माण कार्य
1.भोपाल शहर
इस शहर का निर्माण राजा भोज ने ही करवाया था जिसका प्राचीन नाम भोज पाल था।
2.भोज पुर मंदिर
भोपाल के पास स्थित इस मंदिर में विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग विराजमान है। जिसे एक ही पत्थर को काटकर बनाया गया है। हालांकि यह मंदिर अधुरा ही रह गया लेकिन आज भी इस मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ मंदिर की उपाधि दी जाती है।
3.भोज ताल
उन्होंने सिंचाई और जल प्रबंधन के लिए भोपाल में एक विशाल कृत्रिम झील का निर्माण करवाया था। जो की इस क्षेत्र में वर्तमान समय में भी विद्यमान है।
राजा भोज की मृत्यु
उनके मृत्यु काल के समय को विद्या और कला के एक युग का अंत माना जाता है। बताया जाता है कि गुजरात के चालुक्य राजा भीम प्रथम और त्रिपूरी के कलचूरी राजा लक्ष्मी कर्ण ने मिलकर मालवा पर आक्रमण किया। इस युद्ध के दौरान ही राजा भोज गम्भीर रुप से बीमार हो गए। अतः बीमारी ओर युद्ध के तनाव के बीच ही 1055 ईस्वी को राजा भोज की मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के बाद दोनों विरोधी राजाओं धार को जम कर लुटा। राजा भोज की जिक्र हमें सिंहासन बत्तीसी और बैताल पच्चीसी जैसी प्रसिद्ध कहानियों में मिलता है। दोस्तों बताते चले कि धार वही जगह है जहां हाल ही में वासुकी नाग के अवशेष मिले थे। जिसे विश्व का सबसे विशाल नाग के रुप में मान्यता दी गयी है।

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