प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में देश के महान वैज्ञानिक एवं क्रांतिकारी नेता मेंघनाथ साहा तथा उनके द्वारा की गई महत्वपूर्ण खोज के बारे में बताया गया है। ये वही वैज्ञानिक है जिनका नाम 6 नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था मगर नोबेल पुरस्कार नहीं मिल पाया। कुछ लोग इस के पीछे के कारण उनका छोटी जात का होना मानते है। मगर कुछ विचारकों का मानना है कि इसके पीछे का कारण उनकी खोज के प्रमाणीकरण को सही न मानना था। इसके साथ ही हम इस लेख में उनके नाम पर बनी महत्वपूर्ण स्मारक स्थल के बारे में चर्चा करेंगे।
प्रारम्भिक जीवन
उनका जन्म 6 अक्तूबर 1893 को शाओराटोली वर्तमान बंगला देश में हुआ था। अपने परिवार के निर्धन होने के बावजूद भी अपनी प्रतिभा के दम पर छात्र वृत्ति हासिल कर अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसके साथ ही उन्होंने कलकत्ता प्रेसडेंसी कालेज से शिक्षा हासिल की और पढ़ाई। इनके मित्रों कि सूची में सत्येन्द्र नाथ बोस का नाम आता है। इनके प्रिय शिक्षक की सूची में जगदीश चन्द्र बोस तथ प्रफुल्ल चन्द्र राय का नाम आता है।
इनके द्वारा किए गए कार्य
1.साहा समीकरण
1920 में इन्होंने साहा आयनीकरण समीकरण का प्रतिपाद किया। यह समीकरण खगोल भौतिकी के बुनियादी स्तंभों में से एक है। इसका महत्व समझें इस समीकरण की मदद से हमें पता चलता है कि किस तरह से किसी तारे जैसे सूर्य के अत्यधिक तापमान के कारण उसके तत्व किस तरह से आयनित यानि lonize होते हैं। इसके साथ ही इस समीकरण की मदद से वैज्ञानिक दूर स्थित तारों के तापमान, दबाव और वहां मौजूद तत्वों जैसे हाई़़ड्रोजन हीलियम की मात्रा का सटीक पता लगाने में सक्षम हुए। प्रसिद्ध खगोल शास्त्री नोरिस रसेल ने इसे गैलीलियो के बाद खगोल विज्ञान की सबसे बड़ी खोज बताया था।
2.साहा इंस्टीट्यूट आफ न्यूक्लियर फिजिक्स की स्थापना इनके द्वारा कलकत्ता में की गई जो कि परमाणु भौतिकी के रिसर्च का एक प्रमुख केंद्र बना। मेघनाद साहा केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहे ,उन्होंने भारत में विज्ञान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये।
3.इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अन्तर गत भौतिकी विभाग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4.विज्ञान के प्रचार एवं प्रसार तथा लोगों को विज्ञान के प्रति जागरूक करने के लिए इन्होंने साइंस एंड कल्चर पत्रिका की शुरुआत की।
5.वैज्ञानिक कार्य के साथ ही इन्होंने भारतीय सामाजिक कार्य तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण कार्य किया। भारत में बाढ़ की समस्या के निपटने के लिए दामोदर घाटी परियोजना तथा भाखड़ा नांगल बांध परियोजना की रुप रेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
6.राष्ट्रीय योजना सनिति की स्थापना
नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के आग्रह पर भारत के योजनाबद्ध विकास के लिए इस समिति का गठन में अहम भूमिका निभाई जिसके अध्यक्ष बाद में जवाहर लाल नेहरु जी बने।
7.कैलेंडर सुधार में अहम भूमिका निभाई इन्होंने शाक कैलंडर त्रुटि सुधार में महत्वपूर्ण कार्य किया।
8.वे एक ऐसे वैज्ञानिक थे जिनका मानना था कि वैज्ञानिकों की आवाज उठाने के लिए सांसद में एक सीट होने चाहिए जिसके चलते 1952 में उत्तर पश्चिम कलकत्ता सीट से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रुप में भारी बहुमत से लोकसभा सांसद चुने गए।
निधन
16 फरवरी 1956 तो नई दिल्ली में योजना आयोग के दफ्तर जाते समय दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका निधन हो गया। मेघनाथ साहा का जीवन इस बात का प्रतीक है कि कैसे एक व्यक्ति अभावों से उठकर न केवल वैश्विक विज्ञान को नई दिशा दे सकता है, बल्कि अपने देश के विकास में भी अद्वितीय योगदान दे सकता है।
नोबेल पुरस्कार न का कारण
यह विज्ञान के इतिहास का सबसे बड़ा विवाद और अन्यायों में से एक माना जाता है। नोबेल पुरस्कार पाने के लिए किसी वैज्ञानिक का नाम आधिकारिक रुप से नामांकित किया जाना जरूरी होता है। मेघनाद साहा का नाम 1930 1937 1939 1940 1951 1955 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। लेकिन कुछ प्रमुख कारणों के चलते हुन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं मिल पाया।
मूल्यांकन कर्ताओं की राय
नोबेल समिति के मुख्य मूल्यांकन कर्ता स्वीडिश भौतिक विज्ञानी कार्ल सीगबान थे। उनका मानना था कि साह कि खोज खगोलीय अनुप्रयोग है न कि शुद्ध भौतिकी मानने में थोड़ा संकीर्ण सोच रखती है। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि उनकी खोज सैद्धांतिक है। उन्होंने गणित और भौतिकी के नियमों का उपयोग करके समीकरण दिया था। नोबेल समिति अक्सर उन खोजों को प्राथमिकता देती थी जिनका प्रयोगशाला में व्यावहारिक प्रदर्शन तुरंत हो चुका हो।
राजनीति और वैश्विक समीकरण
1920 से 1950 के बीच का समय काल विज्ञान की दूनिया पर यूरोपीय और अमेरिकी वैज्ञानिकों का वर्चस्व था। औपनिवेशिक भारत से आने वाले वैज्ञानिकों को वैश्विक मंच पर वह समर्थन नहीं मिल पाता था।
अन्य वैज्ञानिकों की प्राथमिकता
1930 के समय काल में जब साहा का नाम चर्चा में था तब क्वांटम मैकेनिक्स और न्यूक्लियर फिजिक्स में कई अन्य बड़ी खोजें जैसे न्यूट्रान की खोज और पाजिट्रान की खोज पर काम करने वाले वैज्ञानिकों की तरफ ज्यादा चला गया।
प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की राय
नोबेल पुरस्कार न मिलने के बावजूद दुनिया के सर्वोत्तम वैज्ञानिकों ने उनके काम की सरहना की उनके काम को सर्वोच्च माना। ब्रिटीश खगोल शास्त्री सर आर्थर एडिंगटन और नोरेस रसेल जैसे दिग्गजों ने स्पष्ट कहा था कि खगोल भौतिकी में साहा का योगदान किसी भी नोबेल पुरस्कार से कही बढ़कर है। भारतीय विज्ञान जगत में उन्हें हमेशा एक ऐसे नायक के रुप में देखा जाता है जिसने सीमित संसाधनों में ब्राम्हांड के सबसे बड़े रहस्यों को सुलझाया।

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