9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past

यह ब्लॉग खोजें

लेबल

in

गुरुवार, 18 जून 2026

शकों का आक्रमण

shak or shaka dynasty

प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम भारत पर हुए तीसरे विदेशी आक्रमण तथा इसके प्रभाव के साथ भारत में शकों को किन राजाओं ने कड़ी टक्कर दी इसके बारे में चर्चा करेंगे।

मूल निवास

शकों का मूल निवास स्थान सिर दरिया घाटी और चीनी तुर्किस्तान में था। हूणों और यूचू कबीले के दबाव के कारण उन्हें अपना स्थान छोड़कर भारत की ओर आना पड़ा था।खास बात यह है कि भारत आने के बाद शक साम्राज्य मु्ख्य रुप से 5 भागों में विभाजीत हो गया। मुख्य रुप से इनकी राजधानी अफगानिस्तान पंजाब मधूरा गुजरात मालवा और दक्कन में थी।

शकों का प्रथम आक्रमण 2वीं सदी ईसा पूर्व में माउज़ के सहयोग से उत्तर-पश्चिम के हिस्से यानि गांधार और तक्षशिला के क्षेत्र को इंडे-ग्रिक शासकों के साथ किया था। इनका सबसे प्रतापी राजा रुद्रदामन था।

प्रमुख शासक

मोगा moues
यह भारत का पहला शक राजा माना जाता है इसने गंधार और पंजाब में अपना शासन स्थापित किया था।

रुद्रदामन प्रथम
यह पश्चिमी भारत की शाखा का सबसे प्रसिद्ध शक राजा था जिसने काठियावाड़ की सुदर्शन झील की मरम्मत करवाई थी।

भारत के राजाओं से सामना

इतिहास को कुरदने पर हमें यह पता चलता है कि इनका सामना किसी एक भारतीय राजा से नही बल्कि अलग- अलग कालखंड़ों के तीन महान भारतीय राजवंशों और उनके प्रतापी राजाओं से हुआ था। इन राजाओं ने शकों के केवस कड़ी टक्कर ही नही दी बल्कि उन्हें कई बार बुरी तरह पराजित भी किया।

राजा विक्रमादित्य
57 ईसा पूर्व में जब शकों ने पश्चिमोत्तर से आगे बढ़कर मालवा और उज्जैन पर कब्जा कर लिया, तब उज्जैन के एक स्थानीय हिंदू राजा जिन्हें इतिहास में विक्रमादित्य के नाम से जाना जाता है ने शकों के खिलाफ मोर्चा खोला। यु्द्ध में राजा विक्रमादित्य की जीत हुई। इस समय काल के दौरान भारत में शक सवंत का चलन हो गया था। मगर राजा विक्रमादित्य ने इस विजय के उपरान्त शक सवंत कैलेंडर की जगह विक्रम सवंत का निर्माण करवाया जो कि आज भी चलन में है।

इस विजय के बाद राजा विक्रमादित्य ने शकाारि की उपाधि धारण की थी जिसका अर्थ है शकों का नाश करने वाला।

2.सातवाहन वंश दक्कन 

शकों की क्षहरात शाखा का सबसे शक्तिशाली राजा नहपान था जिसने गुजरात मालवा और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। उनका मुकाबला दक्षिण के शक्तिशाली सातवाहन राजाओं से हुआ।
1.गोतमीपुत्र शातकर्णाी 
यह सातवाहन वंश के सबसे महान राजा थे जिन्होंने 106 से 130 ईस्वी तक शासन किया था। इन्होंने शक राजा नहपान पर हमला किया और उसे युद्ध में हराकर मार डाला। इस जीत का प्रमाण नासिक के गुफा अभिलेखों और जोगलम्बी से मिले सिक्कों से मिलता है, जिन पर शातकर्णी ने नहपान के सिक्कों को दोबारा अपने नाम से ढलवाया था।

2.वशिष्ठीपुत्र पुलुमावी 
नहपान की हार के बाद शकों की दूसरी शाखा कार्दमक वंश के राजा रुद्रदामन प्रथम ने खोए हुए क्षेत्रों को वापस पाने के लिए सातबाहनों पर हमला किया। रुद्रदामन ने गौतमीपुत्र के पुत्र वशिष्ठी पुलुमावी के युद्ध में दो बार पराजित किया। हलांकि वैवाहिक संबंधों को कारण सातवाहन वंश के शासकों के नष्ट नही किया दरअसल रुद्रदामन ने अपनी बेटी का विवाह सातवाहन के राजा से किया था जिसके कारण यह युद्ध रिश्तेदारी में बदल गया।

4.गुप्त राजवंश 
इनका शासन काल 4वां शताब्दी से 5वीं शताब्दी तक का था। इधर शकों का शासन काल भारत में लगभग 400 वर्षों तक खिचता रहा। इनका अंत गुप्त साम्राज्य के राजाओं द्वारा किया गया।
1.समुद्र गुप्त 
इनका शासन काल 335 से 375 ईस्वी. तक का था गुप्त वंश के इस महान विजेता ने अपनी दिग्विजय नीति के तहत पश्चिमी भारत के शक शासकों को अपनी अधीनता स्वीकार करने और टैक्स देने प मजबूर कर दिया।

5.चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य

इनाक शासम काल 375 से 415 ईस्वी तक का था। चंद्रगुप्त द्वितीय का तथा शकों का यह युद्ध इतिहास का सबसो निर्णाय युद्ध था। पश्चिमी भारत यानि गुजरात तथा काठियावाड़ में अभी भी शकों के शासन बचा हुआ था जहां का अंतिम राजा रुद्रसिंह तृतीय था। चंद्रगुप्त द्वितीय ने एक विशाल सैन्य अभियान चलाकर रुद्रसिंह तृतीय को जुद्ध में मार गिराया और शकों के अंतिम साम्राज्य को हमेशा के लिए गुप्त साम्राज्य में मिला लिया। इस महाविजय के बाद ही चंद्रगुप्त द्वितीय ने भी विक्रमादित्य और शकारि की उपाधि धारण की।

इस प्राकर मालवा के स्थानीय राजाओं से शुरु हुआ यह संघर्ष सातवाहनों के शौर्य से गुजरते हुए अंततः गुप्त राजवंश के हाथों शकों के पूर्ण विनाश के साथ समाप्त हुआ।