9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past: प्रथम विदेशी आक्रमण

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बुधवार, 10 मई 2023

प्रथम विदेशी आक्रमण

videshi akraman
प्रस्तावना

प्रस्तुल लेख में भारत पर हुए सभी विदेशी आक्रमण पर विस्तार पुर्ण चर्चा की गयी है ताकि एक सरल तरीके से समझा जा सके कि भारत की गुलामी के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदर कौन था वे जिन्होंने भारत पर हमला किया की वे भारतीय जो समय से स्वयं को विकसित में पिछे रह गयें।

रुपरेखा

भारत पर 12बार विदेशी आक्रमण हुआ। जिनके नाम निम्नवत है। ईरानी आक्रमण 518 ईसा पूर्व किया गया। दूसरा यूनान यानि सिकंदर का आक्रमण,तीसरा आक्रमण मौर्योत्तर काल 180 ईसा पूर्व में यवन य इंंडों ग्रिक आक्रमण के नाम से भी जाना जाता है। 4 आक्रमण शकों द्वारा किया गया प्रथम शताब्दी में। 5 आक्रमण कुषाण आक्रमण यूची कबीले द्वारा किया गया।

6वां हूण आक्रमण 5वीं शताब्दी में हुआ। 7 अरब आक्रमण 712 ई.में हुआ तथा 8वां आक्रमण महमूद गजनवी द्वारा किया गया 1175 से 1192 ई.के समय में। 9वां आक्रमण मुहम्मद गोरी द्वारा किया गया 1175 से 1992 के समय काल में। 10वां आक्रमण मंगोल आक्रमण 1221 से 1327 ई.के समय काल में हुआ। 11वां आक्रमण मुगल तथा तैमुर वंश के शासकों द्वारा किया गया। समय काल 1398 से 1526 का था। 12वां आक्रमण नादिर शाह तथा अहमद शाह अब्दाली द्वारा 1739 से 1767 के समय काल में हुआ।

इस लेख में हम पारसी ईरानी आक्रमण के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे क्योंकि लेख बड़ा होने के कारण पेज खोलने में आपकों समस्या हो रही थी।

1.पारसी ईरानी पहला विदेशी आक्रमण 486 के बाद 522 के समय काल में हुआ।

हखानमी वंश के राजाओं ने पहला विदेशी आक्रमण किया। इनकी सेना भारत के समीप तो आई मगर आक्रमण में असफल रहे। साइरस द्वितीय इस वंश का संस्थापक था। अतः इसके उत्तराधिकारी दारयव्हू यानी डेरियस द्वितीय ने 518 ईसा पूर्व में पश्चिमोत्तर भारत पर आक्रमण किया। इसे प्रथम सफलता मिली और उसने पंजाब सिंध नदी के पश्चिमी क्षेत्र पर विजय प्राप्त करके अपने साम्राज्य में मिला लिया। 

यह साइरस का उत्तराधिकारी था। साइरसद्वितीय का उतराधिकारी कंबूजिय मिस्र विजय अभियान में व्यस्त रहने के कारण भारत विजय कि ओर ध्यान न दे सका। डोरियस अथवा दारा ने भारत पर आक्रमण किया और सफलता हासिल की।

इस से पहले कंबूजीय और साइरस द्वितीय ने भी भारत पर आक्रमण करना चाहा मगर असफल रहे। इसने 519 से 13 ईसा पूर्व के बीच सिंधु प्रदेश पर विजय प्राप्त की। इसकी पुष्टि बहिस्तान अभिलेख द्वारा होती है। डोरियस ने सिंध प्रदेश पश्चिमी गांधार कंबोज पर अपना परचम लहराया।

खास बातें

1.भारत और ईरान के बीच व्यापारिक सम्बन्धों में तेज़ी आयी इसके साथ ही इनके भारत आने से भारत में खरोष्ठी लिपि का प्रचलन प्रारम्भ हुआ जो अरबी की तरह ही दाईं ओर से बाईं की ओर लिखी जाती है।

इसके आक्रमण के चलते ही मौर्य काल की वास्तुकला जैसी की अशोक स्तंभ में उल्टे कमल के आकार की घंटी जैसे चित्रों में ईरानी प्रभाव स्पष्ट रुप से नज़र आता है। इसके साथ ही भारत में चांदी के सिक्कों का चलन प्रारम्भ हुआ जिन्हें ईरानी भाषा में सिग्लोई कहा जाता था। सोने के सिक्कों को डेरिक कहते थे इन सिक्कों का चलन ईरानी शासकों द्वारा ही चलाया गया था।

डेरियस प्रथम ने भारत में व्यापार के लिए समुद्री मार्ग की खोज अपने नौसेना प्रमुख स्काइलैक्स के माध्य से करायी जो की सिंधु नदी को अरब सागर से जोड़ता था। भारत में जन्म दिवस पर बाल धोने की प्रथा तथा महिलाओं को अंगरक्षक रुप में रखने की प्रथा ईरानीयों द्वारा ही चलाई गयी थी।

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