परिचय
रज़िया सुल्तान की प्रेम कहानी 13वीं शताब्दी की एक ऐतिहासिक कहानी है। यह दिल्ली सल्तनत के गुलाम वंश की पांचवी महिला शासिका थी। यह शम्सद्दीन इल्तुमिश की बेटी थी। रजिया सुल्तान भारत में दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला शासक थीं।
वह 1236 में सिंहासन पर बैठीं और 1240 तक शासन किया। उनकी प्रेम कहानी उनके राजनीतिक संघर्षों और पितृ सत्तात्मक समाज में एक महिला शासक के रूप में उनके सामने आने वाली चुनौतियों से जुड़ी हुई है।उनकी प्रेम कहानी को एक-दूसरे के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। हालाँकि उनका प्यार और खुशी अल्पकालिक थी।
रजिया सुल्तान को अपने शासनकाल के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जिसमें शक्तिशाली अमीरों का विद्रोह और विरोध भी शामिल था। जो एक महिला के रूप में उनके शासन के खिलाफ थे।
जम्मालउद्ददीन यकूत
रज़िया सुल्तान के प्रेमी जम्माल उद्द दीन यकूत अफ्रीकी सिंधी गुलाम एक कुलीन व्यक्ति था। जो भारत में दिल्ली सल्तनत की पहली और एक मात्र महिला सम्राट रजिया सुल्तान का करीबी और विश्वास पात्र था।यकूत रजिया सुल्तान की सौतेली मां का अफ्रीकी गुलाम था।
लेकिन कुछ समय बाद वह दिल्ली सल्तनत का एक भरोसे मंद सैनिक बन गया। रजिया सुल्तान के संरक्षण ने उसे दरबार का एक प्रभावशाली सदस्य बना दिया, यकत अपनी वफादारी और बहादुरी के लिए जाना जाता था।यकूत ने एक युद्ध के दौरान रजिया की जान बचाई और उनकी आपसी प्रशंसा अंततः प्यार में बदल गई।
सामाजिक मानदंडों और दरबार के कुछ सदस्यों के विरोध के बावजूद रज़िया ने एक गुप्त समारोह में यकूत से शादी कर ली। जिससे राईसो और पादरियों के बीच नस्लीय दुश्मनी भड़क गईं। यकूत को भी अपने हिस्से के राजनीतिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। ऐसा माना जाता है कि यकूत की मृत्यु अपनी प्रिय रज़िया को बचाने के लिए लड़ते समय हुई थीं। भटिंडा के गवर्नर अल्तुनिया ने विद्रोह करके यकूत की हत्या कर दि थी।
रज़िया और रूढ़िवादी रईसों के बीच मतभेद
रज़िया को रूढ़िवादी रईसों और धार्मिक नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ा जो एक महिला को अपने शासक के रूप में स्वीकार करने के अनिच्छुक थे। इस विरोध के कारण विद्रोह हुआ और यकूत रजिया के सौतेले भाई अल्तुनिया से युद्ध में हार गया।
यकूत को पकड़ लिया गया और कैद कर लिया गया।यकूत को बचाने और उसके साथ फिर से जुड़ने की कोशिश में रजिया ने एक साहसी कदम उठाया। उसने सिंहासन त्याग दिया और खुद को एक पुरुष का भेष बनाकर दिल्ली से भाग गई।
वह यकूत से जुड़ने के लिए बठिंडा चली गई। उसके साथ एक नया जीवन शुरू करने की उम्मीद में।दुर्भाग्य से, उनका पुनर्मिलन अल्पकालिक था। यकूत के शत्रु जो रज़िया के साथ उसके संबंधों से ईर्ष्या करते थे। ने उसे धोखा दिया।रज़िया और यकूत को एक साथ पकड़ लिया गया और कैद कर लिया गया। दुखद बात यह है कि अंततः यकूत को फाँसी दे दी गई। चुनौतियों का सामना करने के बावजूद वे अंत तक एक-दूसरे के प्रति समर्पित रहे और इतिहास में एक स्थायी विरासत छोड़ गए।
अल्तुनिया कि कुटनीति
कुट्नीतिक तरीके से अल्तुनिया ने रजिया सुल्तान से शादी कर ली। ताकि दिल्ली सल्तनत पे अपना अधिकार कर सके। मगर बठिंडा से दिल्ली आते वक्त रजिया सुल्तान के भाई तथा इल्तुमिश के बेटे बह राम शाह ने सत्ता पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के दृष्टिकोण से रजिया सुल्तान और अल्तूनिया को मरवा दिया।
रजिया सुल्तान और जमाल उद दीन यकूत की प्रेम कहानी को अक्सर जुनून, बलिदान और सामाजिक मानदंडों को चुनौती देने का साहस करने वालों के सामने आने वाली चुनौतियों की कहानी के रूप में चित्रित किया जाता है। एक-दूसरे के प्रति उनका प्यार और उनकी अटूट प्रतिबद्धता को इतिहास के एक प्रेरक हिस्से के रूप में जाना जाता है।
रजिया सुल्तान के बारे में मुख्य तथ्य
इनका शाही नाम जलालात उद-दीन रजिया था।
रजिया की मौत कैथल हरियाणा में 35 वर्ष की उम्र में 12 अक्टूबर 1250 में हुई थी।
इनकी कब्र दिल्ली में मोहल्ला बुलबली खान तुर्क गेट के पास है।
इनका जन्म 1205 ई में बंदयू उत्तर प्रदेश में हुआ था।
इनकी माता शाह तुर्क खातून और पिता शम्स उद दिन इल्तुमिश थे।
इनकी कब्र दिल्ली में मोहल्ला बुलबली खान तुर्क गेट के पास है।
इनका जन्म 1205 ई में बंदयू उत्तर प्रदेश में हुआ था।
इनकी माता शाह तुर्क खातून और पिता शम्स उद दिन इल्तुमिश थे।

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