Indian History reveal the Past

हमारे इस ब्लॉग में भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक इतिहास, राजवंशों आंदोलन स्टार्टअप टेक्नोलॉजी कला और वास्तुकला तथा आर्थिक इतिहास से संबंधित विषयों पर जानकारी दी जाती है। हम कम से कम शब्दों में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं।

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शनिवार, 22 अगस्त 2026

यवन अथवा यूनान का आक्रमण

 
indo greek war

प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम यवन यानी यूनान द्वारा भारत पर किए आक्रमण के बारे में चर्चा करेंगे। इसके साथ ही हम यूनान को राजा डेमोट्रियस सिकंदर महान एवं मिनांडर तथा पुरातात्विक साक्ष्य तथा पंतजलि के महाकाव्य के बारे में चर्चा करेंगे। इसके साथ ही हम इस आक्रमण के प्रभाव एवं भारत में कला खगोल शास्त्र एवं भारतीय रंगमंच के बारे में भी चर्चा करेंगे। अंत में हम यूनान शासकों द्वारा भारतीय धर्मों के अंगीकरण पर भी चर्चा करेंगे।

प्रथम यूनान आक्रमण

यह आक्रमण सिकंदर द्वारा 326 ईसा पूर्व के समय काल में किया गया था। यह युद्ध सिकंदर और भारत के पंजाब क्षेत्र के राजा पोरस के बीच लड़ा गया था। पोरस उस समय काल में पंजाब के राजा था। सिकंदर को पोरस पर आक्रमण करने के लिए हिंदू कूश पर्वत श्रृंखला को पार कर पंजाब पर आक्रमण करना पड़ा था। इस युद्ध में पोरस की हार हुईं। इसके बाद मौर्य साम्राज्य के राजा चंद्रगुप्त मौर्य ने यूनानी राजा को हरा कर यूनानी साम्राज्य को सीमित कर दिया था।

द्वितीय युद्ध

इसे हम इंडो- ग्रिक युद्ध के नाम से भी जानते है। मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद यूनानियों का आक्रमण एक बार फिर से हुआ। वे मध्य एशिया यानी बैक्ट्रिया से आये थे। इस युद्ध का समय काल लगभग 200 ईसा पूर्व का था।

तीसरा युद्ध

यह युद्ध लगभग 183-180 ईसा पूर्व में किया गया। जिसे डेमोट्रियस प्रथम द्वारा अंजाम दिया गया। इसने पंजाब सिंध एवं अफगानिस्तान के बड़े हिस्से को जीत कर साकल यानी वर्तमान सियालकोट को अपनी राजधानी बनाया। इसके साथ ही मिनांडर की सेना ने भारत के भीतर साकेत यानी अयोध्या पांचाल और मौर्यों की राजधानी पाटलिपुत्र वर्तमान पटना पर अपना अधिकार स्थापित किया। मिनांडर ने बौद्ध भिक्षु नागसेन से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म को अपना लिया। इस बात का उल्लेख हमें मिलिंदपन्हो ग्रंथ में मिलती है। 

यूनानियों से कड़ा मुकाबला शुंग वंश राजाओं द्वारा किया गया। जिसमें शुंग वंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग और उनके पोते वसुमित्र शुंग का नाम आता है। इस युद्ध का उल्लेख कालिदास के नाटक मालविकाग्निमित्रम् में मिलता है। नाटक के अनुसार वसुमित्र ने यूनानियों से युद्ध सिंधु नदी के तट पर किया था।

युद्ध के पुरातात्विक साक्ष्य

1.पतंजलि का महाभाष्य
इसमें लिखा हुआ है कि अरुणद् यवनः साकेतम्। अरुणद् यवनो मध्यमिकाम् जिसका अर्थ है कि यवनों ने साकेत यानी अयोध्या और माध्यमिका यानी चित्तौड़ को घेर लिया था।

2.गार्गी संहिता
यह युग पुराण से लिया गया है जिसमें बताया गया है कि यवन सेना द्वारा साकेत पांचाल और पाटिपुत्र पर किए गए भयंकर आक्रमण के कारण वहां के नगर नष्ट हो गये थे।

यूनान आक्रमण का प्रभाव

1 सिक्के का चलन
भारत में सबसे पहले सोने के सिक्कों का चलन तथा राजाओं के नाम वाले सिक्के यूनान शासकों द्वारा चलाये गए थे। इसके साथ ही सांचे के ढले सिक्के तथा निश्चित वजन वाले सिक्कों का चलन प्रारम्भ किया। इसके साथ ही यूनानियों ने द्विभाषी सिक्के भी चलाये जिनमें एक तरफ राजा का नाम एवं चित्र होता था तथा दूसरी तरफ भारतीय देवी देवताओं का चित्र एवं खरोष्ठी या ब्राह्मी लिपि में लेख लिखा होता था।

2 कला
यूनानी कला और भारतीय कला शैली के मिश्रण से भारतीय उत्तर पश्चिम गंधार कला शैली का विकास हुआ। बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण इसी कला शैली के प्रभाव से यूनानी देवता अपोलो की तर्ज पर घुंघराले बाल यधार्थवादी शारीरिक बनावट और सिलवटों के साथ कपड़ों का तराशा गया।

3 ज्योतिश व विज्ञान
भारतीयों ने यूनानियों से हेलियोडोरस स्तंभ जैसी वास्तुकला और उन्नत खगोल विज्ञान को सिखा। ज्योतिष में नए आयाम जूड़े जैसे सप्ताह में सातों दिनों का विभाजन और राशियों पर आधारित ज्योतिषीय गणना में यूनानी प्रभाव को देखा जा सकता है। प्राचीन गार्गी संहिता में यह स्वीकार किया गया है कि यद्यपि यूनानी विदेशी थे लेकिन खगोल विज्ञान में उनके ज्ञान के कारण वे सम्मान के पात्र है।

4 भारतीय रंगमंच
भारतीय नाटकों में मंच के पर्दे के लिए यवनिका शब्द का प्रयोग प्रारम्भ किया जाना प्रारम्भ किया गया जिसे यवन संस्कृति का प्रभाव माना जाता है। इस प्रकार यूनान शासकों के आगमन से भारतीयों ने संस्कृति कला सिक्के निर्माण और विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कला सीखी। 

धर्मों का अंगीकरण

यूनान शासकों ने भारत आकर यहां की संस्कृति को अपना लिया। यूनान शासक मिनांडर ने बौद्ध  विद्वान नागसेन से प्रभावित होकर बौद्ध धर्म को अपनाया था जिसका उल्लेख हमें मिलिंदपन्हो ग्रंथ में मिलता है।  गरुड़ स्तंभ  का निर्माण यूनान राजदूत हेलियोजोरस में भगवान विष्णु के  धर्म वैष्णव को स्वीकार करके ही बनवाया था। इसके अलावा मध्य प्रदेश के विदिशा यानी बेसनगर के  प्रसिद्ध गरुड़ ध्वज स्तंभ को स्थापित करवाना भी यूनानियों के भारतीय धर्म को स्वीकार करने का प्रमाण है।