9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past: Bharos

यह ब्लॉग खोजें

लेबल

in

मंगलवार, 30 सितंबर 2025

Bharos

 
bharos

परिचय

प्रस्तुत लेख हमारी historyindia वेब पेज टेक सेक्शन का महात्वपुर्ण भाग है। इस लेख के अंतर्गत भारतीय तथा अन्य देशों के महत्वपूर्ण ओपरेटिंग सिस्टम के बारे में बात करेंगे। इसके साथ वर्तमान समय तथा भविष्य में आने वाले नये बदलावों एवं प्रगति के बारे में भी बात करेंगे।

लेख का महत्वपूर्ण बिंदू

जैसा की हम जानते है कि पुरी दूनिया में एन्ड्रौड़ और आई.ओ.एस का बोलबाला है । जोकि अमेरिका की दो महत्वपु्र्ण कम्पनीयां है , दोनों ही कम्पनीयां स्मार्टफोन जगत में अपना एक उच्च स्थान ग्रहण किये हुए है इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन आपके य किसी प्रतिव्यक्ति के डाटा सुरक्षा की बात आती है तो दोनों कम्पनीयां खरी नही उतरतीं। हालाँकि डाटा सुरक्षा को भंग य खतम करने को लेकर विदेशी एप्प य एप्लीकेशन की भी अहम भूमिका निभातीं है । मगर किसी एप्लीकेशन को हम अपने फोन या लेपटोप से आसानी से हटा सकते है मगर ओपरेटिंग सिस्टम को हटाने का अप्शन अभी भी हमारे पास नहीं है।.

अतः जिस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध के समय परमाणु बम बनाने की होड़ सभी देशों में लगी हुई थी । ठीक उसी प्रकार वर्तमान समय में स्वदेशी operating system बनाने की होड़ सभी देशों में लगी पड़ी है। जो कि समय ,सुरक्षा  और गोपनीयता के लिए ज़रुरी भी है। जिसकी सबसे पहले पहल चीन ने अपना Harmony OS बना कर की।. जिसके चलते उसे अमेरिका की तरफ से कई जोखिम भी उठाने पड़े। इसके बारे में  हम आगे बात करेंगे ,इससे पहले हम इस ओपरेटिंग सिस्टम की खुबीयों के बारे में बात करेंगे।

यह पुरी तरह से एन्ड्रोयड के ओप सोर्स प्रोजक्ट का हिस्सा है लेकिन गुगल कि किसी भी सेवा से सम्बन्धित नही है । इसमें से गुगल के प्लेस्टोर एवं प्ले सर्विस को पुरी तरह से हटाने के साथ एन्ड्रोयड की सभी प्री इस्टाल एप्प को भी हटा दिया गया है । जिसके कारण यह ओपरेंटिग सिस्टम गोपनियता और सुरक्षा के मामले में एपल ओर गुगल कम्पनी को  मात देता नजर आ रहा है। इस ओरेटिंग सिस्टम के चलते चीन की अमेरिका पर निर्भर रहने संभावनाओं में गिरावट आयी है जो कि चीन के लिए एक अच्छी बात है।. लेकिन अमेरिका  के लिए बुरी खबर थी जिसके चलते अमेरिका गुस्से में है क्योंकि चीन ने उसकी मोनोपलि तो़ड़ने का काम किया है । अतः अमेरिका ने अपनी तनाशाही कायम रखने के लिए चीन पर ढेर सारे प्रतिबन्ध एवं कर में बढ़ोतरी की है वर्तमान के कुछ वर्षों में , जोकि उसके तानाशाही रवैये को दर्शाता है हालांकि भारत पर भी इसी वर्ष विदेशी निर्यात कर में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गयी है क्योंकि चीन का लगभग 38 प्रतिशत  मार्केट भारत में ही है। इस तरह से भारत चीन कि अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है। इसके आलावा और अन्य भी कारण हो सकते है।

हांलकि भारत ने भी ए.ओ.एस.पी आधारित स्वदेशी भार ओ.एस बनाया है । लेकिन वर्तमान समय में इस ओ.एस सम्बन्धित किसी समार्टफोन के लान्च होने कि पुष्टि नहीं हो पायी है। इसके पिछे भी एक महत्वपुर्ण वजह है , जिस कारण से भारतीय इंजीनियर में डर का माहौल है, जिसके बारे में आगे के लेख में आपको  पता चलेगा।.

हारमोनी ओ.एस

यह चीन का स्वदेशी ओ.एस है जिसे चीन की हुआवे कम्पनी ने बनाया है ।. जिसको बनाने के बाद से ही चीन और अमेरिका में तनाव का माहौल है। इस ओ.एस को बनने के बाद अमेरिकी सरकार तथा गुगल ने मिलकर हुआवे कम्पनी पर ढेर सारे प्रतिबन्ध लगा दिये। जिसके चलते हुआवे अपनी डिवाइस को चीन को छोड़कर किसी अन्य देश में नहीं बेच सकती । इसके साथ ही हुआवे की सब ब्रांड कम्पनी हानर का एन्ड्रायड लाइसेन्स रद्द कर दिया गया। जिसके कारण हानर कम्पनी रातोंरात मार्केट से गायब हो गई। अतः परिणामस्वरूप हुआवे को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अगर सही समय पर चीन की सरकार हुआवे का समर्थन न करती तो वह पूर्णतः बर्बाद हो गयी होती। हालंकि इस घटना के कुछ समय बाद हानर कम्पनी को पुनः लाईसेन्स जारी किया गया। लेकिन हुआवे ने हानर पर विशेष ध्यान न देकर अपने हारमोनी ओ.एस पर ज्यादा ध्यान देना जारी रखा। 

म्युरेना ओ.एस

यह एक यूरोपियन कम्पनी द्वारा गुगल की साझेदारी के साथ लांच किया गया है । जहां तक हमारी जानकारी के अनुसार यह भी ए.ओ.एस.पी प्रोजक्ट का ही हिस्सा है , इसमें से भी प्ले स्टोर ओर प्ले सर्विस को हटा दिया गया।.लेकिन इन सब के बावजूद भी इसे पुरा सपोर्ट प्रदान किया जा रहा है । म्युरेना ओ.एस मार्केट में सेमसंग की एस सिरीज़ तथा पिक्सल सिरीज़ की यूरोपियन डिवाइस में मार्केट में देखने को मिल रहा है। इसके आलावा कन्पनी ने फेयरफोन नाम की स्मार्टफोन कम्पनी से साझेदारी की है ।.

फेयरफोन

यह भी एक यूरोप की ही कम्पनी है जो कि दूनिया का पहला समार्ट फोन मार्केट में लेकर आये है, जो अपने ग्राहकों को एक साल की अपेक्षा 5 साल की वारन्टी  देता है । इसके साथ ही यह दूनिया का पहला फोन होगा जो अपने ग्राहकों के अपनी इच्छा अनुसार ओपरेटिंग सिस्टम की चूनने की आजादी देता है।.फोन के साथ अगर आप एन्ड्रोयड को चुनते है तो आपको 8 साल का ओ. एस. अपडेट मिलता है, वहीं अगर आप म्युरेना ओ,एस को चुनते है तो कम्पनी आप को 5 साल का ओ. एस. अपडेट प्रदान करती है । यह खास इस लिए भी है क्योंकि गुगल के पिक्सल फोन के साथ जाने पर आपको 7 साल के ही ओ. एस. अपडेट मिलते है। एक खास बात ओर बता दें अपको यह कोल्कोम के प्रोक्सेसर 7 जेन 2 के साथ मार्केट में उतारा गया है। जिससे आप ओवर हिटिंग कि समस्या से सुरक्षित रह सकते है।.

भारत देश के लिए आगे कि राह

भारतीय इंजीनियर को भी अपने भार ओ.एस को मार्केट में लाना चाहिए । माना कि कम्पनी को कुछ हद तक जोखिम उठाना पड़ सकता है । लेकिन मार्केट में मौजूद डिवाइस पर ओपशन के तौर इसे इस्तेमाल करने का मौका देना चाहिए। ताकि युज़र इक्सपीरिंस को धिरे धिरे बढ़िया किया जा सके। शुरुआत में इ्से वही लोग इस्तेमाल करेंगे जो अपने डाटा को लेकर ज्यादा सेंसटिव है । इस पहल के चलते भारत स्वयं पर अमेरिका की निर्भरता को कम कर सकता है ।

वैसे वर्तमान समय में बहोत सी कम्पनीयां मेड इन इंडिया के नाम पर भारतीयों को मुर्ख बना ही रही है । भले ही उनके पार्ट किसी भी देश से आये मगर असेम्बलींग को मेड इन इंडिया का नाम देना तो गलत ही है। हम यह भी मानकर चलते है कि भार ओ.एस को मार्केट में लाने से उत्पादकों को ज्यादा लाभ नहीं होगा,मगर देश की सूरक्षा के लिए यह एक अहम कदम हो सकता है । धीरे-धीरे लोग इस पर स्विच करना प्रारम्भ कर ही देंगे।.

अन्य महत्वुपुर्ण लिंक

कोई टिप्पणी नहीं: