In this blog of ours, information is provided on the subject related to Indian History, Cultural History, Dynasties, Movements, Startup, Tech, Art and Architecture, Economic History. We are trying to give maximum information in minimum words.
यह ब्लॉग खोजें
लेबल
- Cultural History (31)
- Dynasties (42)
- History (80)
- Movements (55)
- Startup (7)
- Tech (20)
in
रविवार, 24 मई 2026
मेघनाथ साहा
रविवार, 4 जनवरी 2026
पानी की याददाश्त
प्रस्तावना
Schizophrenia
एक मानसिक बीमारी है। जो किसी व्यक्ति के सुनने महसूस करने और व्यवहार करने के तरीकों को प्रभावित करती है। इस बीमारी के चलते मनुष्य वास्तविकता से दूर हो जाता है या उससे मतिभ्रम हल्लुसीनेशन जैसी समस्याएं होती है।.खास बात यह है कि इसका कोई इलाज नहीं है। बस कुछ उपचार के तरीके जिससे इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मतिभ्रम के अलावा इसके अन्य लक्षणों में डीस ऑर्गेनाइज्ड थिंकिंग अव्यवस्थित सोच एवं भाषण और डिसआर्गेनाइज्ड बिहेवियर यानी अव्यवस्थित व्यवहार या नकारात्मक लक्षण या भावनाओं को न व्यक्त कर पाना है। इसके अंतर्गत ना बात कर पता है रुचि न ले पाना य प्रेरणा मोटिवेशन की कमियां भी आता है।कारण
इसके होने के मुख्य कारण है जिनमें ब्रेन केमिस्ट्री में असंतुलन और तनाव पूर्ण जीवन की घटनाएं इसके अलावा कुछ विज्ञानको ने इसे जेनेटिक डिसऑर्डर तथा पर्यावरणीय कारकों को भी शामिल किया है अब यहां पर्यावरणीय कारकों में मुख्य रूप से पानी की ओर इशारा किया गया है। समझिए धूप बरसात या सर्दी या आपदा संकट का हम एक निश्चित समय तक सामना करते हैं।उसी प्रकार हमारा दिमाग भी पानी से भरा होता है और हमारी बातों एवं विचारों विचार जो हम सोचते हैं उसे सुनता है अगर आप रोज नेगेटिव बातें बहुत सोचते हैं तो यह निश्चित रूप से आप वह काम नहीं कर पाएंगे लेकिन अगर आप पॉजिटिव बातें करते हैं किसी काम को लेकर तो आपकी बॉडी कार्य करने की क्षमता और पॉजिटिव एनर्जी का विकास करती है।
निम्नलिखित वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण शोध
जैक्स बेनवेनिस्ट का शोध
यह फ्रांसिस इम्यूनो लोजिस्ट immunologist है ।1988 में नेचर पत्रिका में इनका एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें उन्होंने बताया कि पानी एंटीबॉडीज की याददाश्त बनाए रखता है हालांकि इस लेख पर काफी विवाद हुआ बाद में इस प्रकार के प्रयोग को लैब या प्रयोगशाला में दोहराया नहीं गया शोध के मुख्य बिंदु कहते कि अपनी अपने संपर्क में आए पदार्थ की जानकारी या उसके गुणों को याद रखता है।मसरू इमोटो Masaru Emoto
यह एक जापानी शोध करता थे जिन्होंने अपनी शोध में क्रिस्टल पर विचार और भावना के प्रभाव का प्रयोग किया लेकिन उनके प्रयोग में वैज्ञानिकी कार्य प्रणाली की कमी थी जिस कारण उनकी भी खोज को वैज्ञानिक प्रमाणित नहीं माना गया इस रिसर्च पर छपी उनकी किताब the hidden message in water 2004 my best seller thi अमेरिका में।उन्होंने पानी पर दो प्रकार की शोध है किये पहले शोध में उन्होंने क्रिस्टल वाटर को यानी पानी को जमा कर उनके अगल-बगल कुछ संगीत या शब्दों का प्रयोग करके उन में बनने वाली आकृतियों पर रिसर्च की।
खराब आकृति वाले रिसर्च में पता लगा कि अगर उनके सामने गलत शब्द का प्रयोग या फिर गलत चीज बोली जा रही है तो हमें गलत आकृतियां बन रही है वहीं अगर सुरीले संगीत मधुर बातों या अच्छी बातों का उजागर किया जा रहा है तो अच्छे क्रिस्टल बने।
दूसरे शोध में तीन जार को लिया गया जिनमें कुछ चावल रखे गए और उन्हें पानी से भर दिया गया इसके बाद तीनों जार को एक महीने तक एक कमरे में रखा गया। मसारू इमिटो रोजाना तीनों जार के पास रोजाना जाते पहले जाकर पास जाकर अच्छी बातें कहते हैं । दूसरे जार के पास जाकर उसे नजर अंदाज करते और तीसरे जार के पास जाकर उसे भला बुरा कह कर चले आते यह प्रक्रिया क्या लगातार 30 दिनों तक की गई उसके बाद परिणाम कुछ इस प्रकार है कि पहले जार के चावल अच्छे फूल गए और उन्हें फफूंद भी नहीं लगी थी दूसरे जार के चावल जो कि ना तो सड़े ना ही प्रॉपर तरीके से फूल मतलब प्रक्रिया धीरे हो गई। तीसरी जार के चावल सड़ गए।.
उनके रिसर्च का मुख्य मकसद
मसरी मोटा के पानी के प्रयोग का परिचय देते हुए बताया कि पानी पर सकारात्मक और नकारात्मक शब्द विचार और भावनाओं का असर पड़ता है यह मोटो का मानना था कि पानी एक मौलिक और सार्वजनिक पदार्थ है जो मानवीय भावनाओं और इरादों से गहराई से प्रभावित होता है मसारु एमिटो का मानना था कि पानी को पराबैंगनी प्रकाश या कुछ विद्युत चुंबकीय तरंगों के संपर्क में ला कर बदलावों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।भारतीय समाज से इसका संबंध
प्राचीन काल में तमाम मौलाना बाबा साधु या जब किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होती थी या कोई जादू करना होता था तो उसे पानी को फूंक कर देते थे उसे समय हमें लगता था कि यह अंधविश्वास है मगर असल में यह एक वैज्ञानिक तरीका था इलाज की खास बात यह थी कि यह पानी असर भी करता था।भारतीय समाज में पानी को रखने से लेकर पीने तक के त कुछ नियम बनाए गए थे पुराने जमाने में पीने के पानी को पहले तांबे के बर्तन में 10 से 12 घंटे तक छोड़ दिया जाता था उसके बाद उस पानी को पिया जाता था ऐसा करने से तांबा पानी के साथ अभिक्रिया करके उसे आयुर्वेदिक औषधि बना देता था और उसमें मौजूद विषैला कण सतह पर बैठ जाते थे।
भारतीय समाज में पुराने जमाने में हर प्रातः काल पानी वाले बर्तन को इमली से मजा जाता था उसके बाद थोड़ी विभूति और थोड़ा कुमकुम लगाकर पानी वाली बर्तन की पूजा की जाती थी।
भारतीय समाज ने शुद्ध पानी के लिए बहुत सी लड़ाइयां भी लड़ी जैसे 20 मार्च 1927 में बी आर अंबेडकर ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जमादार तालाब पर पानी पीने का अधिकार अछूत को दिलाया हालांकि अधिकतर अछूतों की मिला मगर थे वे भारतीय ही।.सोर्स मीडिया लैंड नेटवर्क और दैनिक जागरण
शनिवार, 8 नवंबर 2025
मोहम्मद रईस मारकानी
प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में हम भारत के एक कार मकैनिक एवं वैज्ञानिक मोहम्मद रईस के बारे में बात करने जा रहे है वे चर्चा में इसलिए है क्योंकि हाल ही में उन्होंने एक नये प्रकार के कार इंजन का अविष्कार किया जोकि पानी से चलता है। यानि अब कार पानी से भी चल सकती है।. हांलकि इस विषय पर पहले भी रिसर्च हो चुकी थी जैसे कि स्टीम इंजन के द्वारा कार आदि को चलना मगर इस प्रकार के इंजन में समस्या यह थी कि यह अत्याधिक गर्म होते थे ,जिसके कारण लम्बे समय तक चलना या लम्बी यात्रा करना इससे सम्भव नही था।. अतः मोहम्मद रईस की यह खोज एक महत्वरुर्ण कदम साबित हो सकती है।.मोहम्मद रईस कौन हैं
मोहम्मद रईस मकरानी मध्य प्रदेश के एक कार वैज्ञानिक है जिन्होंने लगभग पांच साल मेहनत करके के इस प्रकार के इंजन का अविष्कार किया। यह एक ऐसी खोज है जिसने पुरी दुनिया को चौंका दिया है। इस प्रकार की खोज से देशी ही नही विदेशी उद्योगपतियों कि होश उड़ा दियें है। मोहम्मद रईस के बारे में बात करे तो 2016 के उनके वायरल विडीयो के बाद से उनके बारे में कोई खबर ,समाचार पत्र य किसी न्युज़ चैनल य किसी सोशल मिडीया प्लेटफार्म पर कोई खबर नही है।.मो.रईस मकरानी ने अपनी इस तकनीक का पेटेंट भी करा रखा है जि एक अच्छी बात है। आपको बताते चले कि उनकी यह तकनीक चीन भी अपनाना चाहता था मगर मो.रईस मकरानी ने शर्त रखी की कार बनाने कि फैक्ट्री उनके होम टाउन यानि मध्य प्रदेश में सर्वप्रथम लगायी जायेगी।मगर चाईना ने यह शर्त रखी की वे उनके प्रोजक्ट मे तभी निवेश करेंगे जब कम्पनी चीन में लगाई जायेगी। दुसरी तरफ हमारी भारत सरकार ने भी स्वयं उनके इस प्रोजक्ट पर कोई ध्यान नही दिया। जिसके कुछ प्रमुख कारण है जिसके बारे में हम आगे के भाग में बात करेंगे।.
पानी ईधन के रुप में प्रयोग
दरअसल पानी ईधन नही है ,बल्कि पानी की जगह ,पानी और कैल्शियम कार्बाइट के रियेक्शन निकलने वाली एसटीलिन गैस ईधन है। हांलकि इसे ईधन के रुप में प्रयोग करने के लिए कार इंजन में कुछ बदलाव करने पड़ते है जिसके बाद आप इस गैस को आसानी से इस्तेमाल कर सकते है। जो कि एक मैकेनिक व्यक्ति आसानी से कर सकता है। इसके लाभ के बारे में बात करे तो 1.एसिटिलीन गैस का प्रयोग करने से ईधन खर्च लगभग दो रुपये प्रति किलोमीटर पड़ता है ,जोकि अपने आप में एक कमाल की बात है। 2.इसके साथ ही यह पर्यावरण के अनुकूल है यानि इससे पर्यावरण प्रदूषण न के बराबर होता है।.रासायनिक अभिक्रिया देखें तो-
पानी (H2o)जब कैल्शियम कर्बाइट(cac2) के साथ अभिक्रिया करता है तो एसटिलीन गैस (c2H2)बनती है जो कि ज्वलनशील होती है। जिसका प्रयोग ईधन के रुप में किया जा सकता है।.
सरकार की लापरवाही का कारण
1.सरकारी तथा गैर सरकारी कम्पनी का ढ़ेर सारा निवेशकम्पनीयां अपनी रोजगार को ज्यादा समयावधि के लिए जारी रखने को लिए दस साल से लेकर बीस साल तक का समझौता करते है ताकि एक ही दाम पर वे कच्चामाल सालों साल खरीद सके और महंगे दामों में बेच सके। अतः इसके लिए समझौते के अनुसार एक बार में ही बड़ी रकम जमा करनी होती है जो कि करोड़ों में हो सकती है। यहां हम कुछ सरकारी एवं गैर कम्पनीयों एवं उनके मार्केट कैप के बारे में बात करने जा रहे ताकि आप अन्दाज़ा लगा सके। 1.OIL 77करोड़ 2. MRPL 27करोड़ 3.HPCL 83करोड़ 4.LNG 51करोड़ 5.GAIL 1 लाख 27करोड़ यह सब तो सरकारी कंपनी है इसके अलावा नायरा,जीयो बीपी,के पर्न आयल एण्ड गैस आदि है जो पेट्रोलियम में निवेश करती है।.
2.अचानक या तत्कालीन प्रभाव
किसी भी तकनीक तत्कालीन प्रभाव से अपनाना का कठिन कार्य है क्योंकि कम्पनीयाों को अपनी मैन्युफैक्चरींग तकनीक में बदलाव लाना होता है जो की धीरे धीरे सालो के प्रयास से ही सम्भव हो पाता है।.
3.विदेशी राजनीतिक दबाव
जैसा की हम जानते है कि भारत में पेट्रोल विदेश से निर्यात किया जाता है ,जिनमें दो पर्टियों के बीच समझौता किया जाता है जो कि पांच साल ,दस साल य उससे ज्यादा का हो सकता है। अब समझीये की हर देशी -विदेशी कम्पनी अपनी सरकार एवं अर्थव्यवस्था में अपनी अहम भूमिका निभाती हैं। अतः पहला कारण तो यह होता है कि अचनाक से किसी कम्पनी से समझौता तोड़ना य किसी नयी तकनीक में तत्तकालीन प्रभाव से निवेश करना सम्भव नहीं है, इससे कम्पनी के व्यापार कि छवि पर गलत असर पड़ सकता है। दुसरा कारण विदेशी देश अपने से छोटे देशों को इन्हीं कम्पनीयो के समझौतों की मदत से शौषण करते है, जिसके कारण से प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता है।
वैज्ञानिकों को हमारा सुझाव
1.देखीये कोई भी खोज एक खजाने की तरह होती है। इसे कब, कहां ,कौन , कैसे कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता है। मगर इस खजाने को सहेज पाना सबके बस कि बात नहीं है । भारत में अभी भी ऐसी कम्पनीयां एवं सरकारे नहीं बन पायी हैं जो कि तत्काल में किसी तकनीक में निवेश कर सकें।2.दोस्तों आप माने या न माने लेकिन हर खोज कि शुरुआत एक गलती से य एक घटना से होती है। जिसे देख कर वैज्ञानिक के दिमाग में ढेर सारी सम्भावनाये उठती है। जो आगे चलकर एक खोज का रुप ले लेती है।.अब ऐसे में 5 साल कि विदेशी शिक्षा का टैग लेकर घुमने वाले लोग यह मानने को तैयार ही हो पाते है कि , कोई हाईस्कूल पास व्यक्ति किसी इनोवेशन य तकनीक की खोज कर सकता है। इसे वो अपनी बेईज्जती के रुप में लेते है। हांलकि सब एक जैसे नहीं होते।.
3. अपनी खोज को कई भागों में विभाजित करके रखे, ताकि ज़रुरत पड़ने पर आप ही उसका इस्तेमाल कर सकें।.
4.अपनी क्षमता को परखे, निवेश करने से पहले अपनी चल-अचल सम्पत्ति का विवरण ले य विचार करें तथा उसका तीस प्रतीशत हिस्सा ही निवेश करें।.
5. बाहरी लोंगो पर अपनी निर्भरता कम रखें तथा अगर सम्पत्ति का अभाव है तो सम्पत्ति को जोड़ें ।. अगर निवेश में अधिक समय लग रहा है तो अपनी आने वाली पिढ़ी को वे सौंपे मगर परखने के बाद क्योंकि हर कोई अपकी खोज की कद्र नहीं कर सकता ।
6.अच्छे ओर भरोसे मंद लोगों की टीम बनाये।
7.अतः उपरोक्त सभी कार्यों को करने बाद अपनी खोज का खुलासा करें।
हम भी चाहते है्ं कि आपको आपकी मेहनत का पुरा क्रेडीट मिले ,ये आपका हक है।
रविवार, 19 अक्टूबर 2025
डाक्टर वासुदेवन
प्रस्तावना
प्रारम्भिक जीवन एवं शिक्षा
बिटूमेन
प्लास्टोन
यह प्लास्टिक का डामर होता है जिसका प्रयोग बाहरी जगहों अथवा सिमेंट ब्लाकों के स्थान पर किया जाता है।.
प्लास्टिक मैन आफ इण़्डिया
- विभाग आवधि कार्य
- चेन्नई निगम 14/07/2002 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
- चेपम्मा द्वारा आयोजित संगोष्ठी नेपाल 15/11/2002 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
- एनावायरो भारतीय उद्योग परिसंघ 15/12/2002 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
- तूतीकोरिन पोर्ट ट्रस्ट 05/12/2002 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
- राजमार्ग अनुसंधान केन्द्र 11/12/2002 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
- फिक्की मुंबई द्वारा अपशिष्ठ प्रबंधन पर
- राष्ट्रीय संगोष्ठी 26/02/2003 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
- आई पी एफ कोलकत्ता 20/08/2004 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
- सी पी आई मुंबई कोर्प 08/10/2004 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
- सी आई आई और आई आई टी चेन्नई 26/07/2004 सड़क निर्माण के लिए अपशिष्ठ प्लास्टिक
आगे की राह
दोस्तो देखा जाये तो प्लास्टिक का इस्तेमाल वर्तमान समय पर काफी जोरो से हो रहा है सरकार चाह कर भी इस पर रोक नहीं लगा सकती क्योंकि ज्यादातर पेट्रोल रिफाइनरी सरकार द्वारा ही की जाता है जैसे कि भारत पेट्रोलियम,आयल इण्डिया लिमिटेड,गेल,एस.आर.पी.एल,एल.एन.जी इसके आलावा कुछ निजी कम्पनीयां भी है तो कचरे के तौर पर पाया जाने वाला ये प्लास्टिक प्योरिफाई करके मार्केट में बिकने के लिए भेज दिया जाता है जिससे इनका प्रयोग मोबाइल डिवाइस,पोलीथीन बनाने,सस्ते किस्म के घरेलु समान बनाने तथा रोजमर्रा के समानो की पेकेजिंग के लिए किया जाता है। इस प्रकार हम किसी न किसी बहाने 10 प्रतिशत प्लास्टिक रोज खाते हैं चाहे वो नमकीन चिप्स का पैकेट हो य किसी सोफ्ट या कोल्ड ड्रिंग का बोतल।.अभी भी अपको यकीन नहीं हो रहा होगा तो बताते चले कि एक निश्चत तापमान से अधिक तापमान होने पर प्लास्टिक पिघलने लगता है और हमारे खाने पिने की वस्तुओं में मिल जाता है । दोस्तों प्लास्टिक के प्रयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बिमारियां होती है ।. तो कृप्या करके अपने और अपनों चाहने वालों कि सुरक्षा के लिए प्लास्टिक का प्रयोग कम से कम करें।.
मंगलवार, 30 सितंबर 2025
Bharos
परिचय
लेख का महत्वपूर्ण बिंदू
हारमोनी ओ.एस
म्युरेना ओ.एस
फेयरफोन
भारत देश के लिए आगे कि राह
शनिवार, 15 फ़रवरी 2025
Quantum Ai
प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में हम क्वांटम कम्प्युटिंग में कृत्रिम बुद्दिमत्ता के प्रयोग तथा इससे होने वाले लाभ तथा भविष्य में इसकी मदत से हमारे जीवन मे होने वाले लाभ और परिवर्तन के बारे में जानेंगे। (QAI) क्वांटम कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मिलन से बना है, जो लगभग हर उद्योग को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। QAI मौजूदा AI प्रणालियों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग का उपयोग कर रहा है।
QAI कैसे काम करता है
क्वांटम कंप्यूटर क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों पर आधारित हैं, जिससे वे पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में कुछ प्रकार की समस्याओं को तेज़ी से हल कर सकते हैं।
मशीन लर्निंग मॉडल, कॉम्बिनेटरिक्स चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास करते हैं, जिसमें कई चर और जटिल गणनाएँ शामिल होती हैं।
पारंपरिक कंप्यूटरों पर AI का उपयोग करके इन समस्याओं को हल करने में बहुत समय लगता है, लेकिन क्वांटम कंप्यूटरों के साथ AI मॉडल का उपयोग करके ऐसी समस्याओं को सेकंडों में हल किया जा सकता है।
क्वांटम कंप्यूटर बड़े डेटासेट में पैटर्न भी ढूंढ सकते हैं, जो पारंपरिक कंप्यूटर नहीं कर सकते, और वे अधूरे या करप्ट डेटा से निपटने के लिए बेहतर ढंग से लैस हैं।
QAI के फायदे
- मार्गदर्शन और स्वायत्त प्रणाली - QAI मार्ग निर्धारण या नेविगेशन के बेहतरीन रास्ते सुझा सकता है और स्वायत्त प्रणालियों में सुधार ला सकता है।
- दवा और चिकित्सा - यह दवाओं की खोज को आगे बढ़ा सकता है, चिकित्सा और उपचार में सुधार कर सकता है।
- आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन - QAI आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जटिल निर्णयों को अनुकूलित कर सकता है।
- वित्तीय अनुप्रयोग - QAI जोखिम मूल्यांकन, धोखाधड़ी का पता लगाने, पोर्टफोलियो प्रबंधन और ऑप्शन प्राइसिंग जैसे कार्यों को अधिकतम रूप से अनुकूलित कर सकता है। शेयर बाज़ार के बर्ताव की सटीक भविष्यवाणी के लिए क्वांटम न्यूरल नेटवर्क मॉडल विकसित किए जा चुके हैं।
- सुरक्षित संचार - क्वांटम नेटवर्किंग व्यक्तिगत कणों के भौतिक हस्तांतरण के बिना क्वांटम अवस्थाओं को स्थानांतरित करने के लिये क्वांटम टेलीपोर्टेशन का लाभ उठा सकती है, सुरक्षित संचार को पुनर्परिभाषित कर सकती है और संभावित रूप से ‘क्वांटम इंटरनेट’ का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
हालाँकि, QAI अभी भी विकास के अधीन है, इसलिए इसे व्यवहारिक रूप से अपनाने में तकनीकी प्रगति, विनियमों और उद्योग की निवेश करने की इच्छा पर निर्भर करता है।
क्वांटम कंप्यूटर के अन्य फायदे हैं, जिनमें शामिल हैं -
गति और कार्य क्षमता - क्वांटम कंप्यूटर क्लासिकल कंप्यूटर की तुलना में बहुत तेजी से गणना करते हैं, जिससे जटिल एल्गोरिदम का तेजी से निष्पादन संभव होता है।. यह कंप्यूटर एक ही समय में अधिक डेटा को समझ और गणना कर सकता है।. क्वांटम कंप्यूटरों में क्यूबिट्स का उपयोग किया जाता है, जो एक ही समय में 0 और 1 दोनों स्थितियों में हो सकते हैं, जिससे उन्हें सामान्य कंप्यूटरों की तुलना में अधिक गणनात्मक शक्ति मिलती है।.
महत्वपुर्ण जानकारी को सुरक्षीत सहायक - क्वांटम एआई इंजिनियरिंग क्रिप्टोग्राफी डेटा को अविश्वसनीय रूप से सुरक्षित बना सकती है।. क्वांटम कंप्यूटर उन्नत एन्क्रिप्शन और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी से उच्च गोपनीयता और डेटा सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे संवेदनशील जानकारी को अनधिकृत पहुंच से बचाया जा सकता है।.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास - क्वांटम कंप्यूटर का उपयोग भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धि) के विकास के लिए किया जाएगा।. क्वांटम कंप्यूटरों की तेजी से गणना करने की क्षमता AI और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में तथा समय यात्रा य भविष्य में नयी तकनीक के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है।.
- समस्या को सुलझाना - क्वांटम कंप्यूटर जटिल गणितीय गणनाओं, अनुकूलन और सिमुलेशन को हल करने में उत्कृष्ट है और वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के लिए नए रास्ते खोलता है।.
- सर्च इंजन में सुधार - क्वांटम कंप्यूटिंग सर्च इंजन एल्गोरिदम में क्रांति लाने, अधिक सटीक और प्रासंगिक खोज परिणाम (Search Result) प्रदान करने और उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने में सक्षम है।.
- जलवायु मॉडलिंग - क्वांटम कंप्यूटिंग जलवायु मॉडलिंग सिमुलेशन की परिशुद्धता और गति को बढ़ा सकती है, जिससे जलवायु परिवर्तन से संबंधित चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा और संबोधित किया जा सकता है।.
- वैज्ञानिक खोज - क्वांटम-AI अभिसरण में बड़े डेटासेट को अधिक कुशलता से संभालने और विश्लेषण कर वैज्ञानिक खोज में तेजी लाने की क्षमता है।.
- अन्य - क्वांटम कंप्यूटर का उपयोग दवा उद्योगों में कठिन रासायनिक गणनाओं को करने, यातायात अनुकूलन प्रणालियों को विकसित करने और साइबर हमलों से बचने के लिए किया जा सकता है।. क्वांटम कंप्यूटिंग से सामग्री विज्ञान, दवा खोज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम संचार में खोज को सक्षम किया जा सकता है।. क्वांटम कंप्यूटर त्वरित कम्प्यूटेशनल गति प्रदान करते हैं, जिससे जल्द निर्णय लेने, बाज़ार में कम समय में पहुँचने और विभिन्न उद्योगों में उत्पादकता में वृद्धि होती है।.
- वर्तमान में क्वांटम एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में हो रहा है -
वित्तीय बाजार - क्वांटम एआई का उपयोग जोखिम मूल्यांकन और धोखाधड़ी का पता लगाने, पोर्टफोलियो प्रबंधन और ऑप्शन प्राइसिंग में किया जा रहा है।. यह शेयर बाजार के बर्ताव की सटीक भविष्यवाणी के लिए क्वांटम न्यूरल नेटवर्क मॉडल विकसित करने में भी मदद करता है।.
स्वास्थ्य सेवा - क्वांटम कंप्यूटिंग अणुओं की पारस्परिक क्रियाओं की नकल करके दवा की खोज में तेजी ला सकती है और मेडिकल इमेजिंग में क्रांति ला सकती है।. यह बीमारियों की भविष्यवाणी और व्यक्तिगत ज़रूरतों के हिसाब से इलाज की विधि तैयार करने के लिए मशीन लर्निंग एल्गोरिदम को बढ़ा सकता है।.
रसद और आपूर्ति श्रृंखला - क्वांटम एआई माल ढुलाई के लिए रास्ते की योजना बनाने, गोदाम प्रबंधन और भंडार अनुकूलन को बेहतर बना सकता है, जिससे तेज और किफायती डिलीवरी हो सकेगी।. यह रुकावटों की भविष्यवाणी कर सकता है और संचालन को सुव्यवस्थित कर सकता है।.
नेविगेशन - क्वांटम कंप्यूटिंग जीपीएस (GPS) सटीकता को बढ़ा सकती है, जिससे चुनौतीपूर्ण वातावरणों में सटीक स्थिति बनाने की क़वायद को सक्षम किया जा सकता है।. क्वांटम एआई एल्गोरिदम वास्तविक समय में रास्तों से जुड़ी गणनाओं को अनुकूलित कर सकता है, जिससे यातायात प्रवाह में सुधार होगा और भीड़भाड़ कम होगी।.
पर्यावरण - क्वांटम एआई जटिल जलवायु परिदृश्यों के मॉडल तैयार कर सकता है और इकोलॉजी पर उनके प्रभावों की अधिक सटीक भविष्यवाणी कर सकता है]।. यह कुशल ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के लिए अनोखी सामग्रियों की खोज का कारण बन सकता है।.
सुरक्षा - क्वांटम एआई उपकरण स्वायत्त हथियार और ड्रोन जैसे मोबाइल प्लेटफॉर्म प्रदान कर सकते हैं।. इनमें जीपीएस की सहायता से वंचित क्षेत्रों में उन्नत सेंसिंग, नेविगेशन और पोजिशनिंग विकल्प आदि शामिल हैं।.
जलवायु मॉडलिंग - क्वांटम कंप्यूटिंग जलवायु मॉडलिंग सिमुलेशन की परिशुद्धता और गति को बढ़ा सकती है, जिससे जलवायु परिवर्तन से संबंधित चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा और संबोधित किया जा सकता है।.
वैज्ञानिक खोज - क्वांटम-एआई अभिसरण बड़े डेटासेट को अधिक कुशलता से संभालने और विश्लेषण कर वैज्ञानिक खोज में तेजी लाने की क्षमता रखता है।.
क्वांटम एआई का उपयोग करने वाली कंपनियाँ
क्वांटम एआई का उपयोग करने वाली कई कंपनियाँ हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में इस तकनीक का लाभ उठा रही हैं-
- गूगल- गूगल ने क्वांटम कंप्यूटिंग में महत्वपूर्ण प्रगति की है और इसका उपयोग मशीन लर्निंग के लिए किया जा रहा है। यह कंपनी क्वांटम एआई के माध्यम से जटिल डेटा सेट्स का विश्लेषण और समस्याओं को हल करने में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।.
- आईबीएम- आईबीएम क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जो विभिन्न उद्योगों में डेटा विश्लेषण और अनुकूलन समस्याओं को हल करने में मदद करता है। आईबीएम का "क्वांटम एआई" प्रोजेक्ट स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सेवाओं में सुधार के लिए काम कर रहा है।.
- रिगेटी- रिगेटी एक क्वांटम कंप्यूटिंग कंपनी है जो अपने प्लेटफॉर्म पर क्वांटम एआई समाधान विकसित कर रही है। यह कंपनी विशेष रूप से वित्तीय सेवाओं और दवा खोज में क्वांटम एआई का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।.
- आयनक्यू- आयनक्यू भी क्वांटम कंप्यूटिंग में सक्रिय है और अपने उत्पादों के माध्यम से मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स में सुधार करने का प्रयास कर रहा है। यह कंपनी स्वास्थ्य सेवा और लॉजिस्टिक्स में क्वांटम एआई का उपयोग कर रही है।.
- भारतीय सेना- भारतीय सेना ने हाल ही में एक क्वांटम कंप्यूटिंग प्रयोगशाला स्थापित की है, जो सुरक्षा और सैन्य अनुप्रयोगों के लिए क्वांटम एआई तकनीकों का विकास कर रही है।.
- ये कंपनियाँ विभिन्न उद्योगों में क्वांटम एआई के उपयोग से जटिल समस्याओं को तेजी से हल करने, बेहतर निर्णय लेने और नए उत्पादों एवं सेवाओं के विकास की दिशा में अग्रसर हैं।
शुक्रवार, 2 अगस्त 2024
भारतीय वातानुकूलीन सिस्टम
प्रस्तावना
Ice Battery Air conditioner
Outlet Part
Inlet part
लाभ
- इस तकनिक का इस्तेमाल करके बिजली बिल में कटौती की जा सकती है,क्योंकि एक सामान्य एयर कंडिश्नर कमरे को ठण्डा करने के लिए लगातार कम्प्रेसर को काम करना पड़ता है।.आईस बैटरी प्रोजेक्ट में सिर्फ बर्फ को जमाने तक ही कम्प्रेसर का इस्तेमाल किया जाता है और बाकि के 12 घण्टे इसे बंद कर दिया जाता है जिससे बिजली कि बचत होती है।
- सामान्य एयर कंडिश्नर में कमरे को जल्दी ठण्डा करने के लिए कम्प्रेसर को और तेज़ी से काम करना पड़ता है जबकि आईस बैटरी एयर कंडिश्नर मात्र पंखे कि स्पीड को बढ़ाकर के कमरा ठंडा किया जा सकता है।
- एक सामान्य एयर कंडिश्नर एक कमरे य एक हाल को ठंडा करने कि क्षमता रखता है, एक आईस बैटरी एयर कंडिश्नर पुरे घर को ठंडा करने कि क्षमता रखता है,इसके साथ ही इसकी क्षमता बढ़ाने पर यह पुरे सिटी को ठंडा करने की क्षमता रखता है।
- वर्तमान समय में इस तकनिकी का इस्तेमाल शिकागो जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
हानी
- यह आकार में बड़ा होने के कारण सामान्य एयर कन्डिश्नर की तुलना में तीन से चार गुणा अधिक मंहगा होता है।
- इसे इंस्टाल करवाने के लिए दो से तीन अनुभवी टेक्नीशियन की आवश्यकता होती है। जबकि एक सामान्य एयर कन्डिश्नर लगवाने के लिए मात्र एक टेक्नीशियन से ही काम चल जाता है।
- सामान्य एयर कन्डिश्नर की अपेक्षा आईस बैटरी एयर कन्डिश्नर का मेटनेंस खर्च अधिक आता है।
- हालाकि यह कम बिजली की खपत करता है मगर इसमें प्रयोग होने वाली गैस हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। इसमें R 32 गैस का इस्तेमाल किया जाता है। जो हमारे पर्यावरण के लिए घातक है।
Geothermal Air Conditioner
वातावरण से सम्बन्ध
लाभ
- इस प्रकार का एयर कन्डिश्नर को लगाने पर यह लगभग 15 से 20 साल तक आसानी चल सकता है।
- बिजली की बचत करता है, भारत में 5 स्टार रेटींग वाले एयर कन्डिश्नर से भी 60 प्रतिशत कम बिजली खपत करता है।
- यह दो प्रकार के संस्करण में आते है पहला Open loop system दुसरा Closed loop system।
- पहला सस्कंरण यालि औपेन लूप सिस्टम ज्यादा उपयोग में नही लिया जाता क्योंकि यह पानी को दूषित करता है, दूसरा क्लोस्ड लुप सिस्टम अधिक पैमाने पर इस्तेमाल में लिया जाता है।
- क्लोस्ड लुप सिस्टम को तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है। जैसे होरिजेंटल क्लोस्ड सिस्टम, वर्टीकल क्लोस्ड सिस्टम, कोइल क्लोस्ड सिस्टम। मुख्य तौर पर इनका वर्गीकरण पाइप बिछाने कि प्रक्रिया के आधार पर किया गया है।
GIBSS
Asian Tech Air Conditioner
लाभ
- यह ओज़ोन लेयर को किसी भी प्रकार का नुकसान नही पहुँचाता है।
- अन्य तकनिकी उपकरण जैसे कम्प्रेसर आदि के न होने के कारण यह सबसे अधिक बिजली की बचत करता है।
- किसी भी प्रकार कि गैस का इस्तेमाल न होने के कारण यह इकोफ्रेंडली है।
- इसके मेंटनेंस का खर्चा ना के बराबर आता है।
- यह किसी भी प्रकार का ध्वनि प्रदुषण नही करता।
- कम लागत तथा इकोफ्रेडंली होने के साथ-साथ कम बिजली की खपत करने के कारण यह एयर कंडीश्नर की श्रेणी में सबसे सर्वोच्चत्तम स्थान पर अपनी जगह बनाता है।
Monish Siripurapu
AMBIATOR
कार्य प्रणाली
लाभ
हानी
अन्य बाहरी सोर्स
शुक्रवार, 7 जून 2024
समय यात्रा
प्रस्तावना
चर्चा का विषय
रहस्य और मान्यताएं
- कुछ लोगो का मानना है कि प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनि भविष्यवाणी करने में सक्षम थे उन्होंने भविष्य में होने वाली तकनिकी उन्नति की कल्पना पहले हि कर ली थी।.इस नकाशी को उसी भविष्यवाणी का प्रमाण माना जा सकता है।.
- वर्तमान इतिहासकारों का अनुमान है कि हो सकता है अतीत में कोई बाहरी अंतरीक्ष यात्री धरती पर आया हो जिसे देखकर उसकी परिकल्पना करके इस चित्र को कुुरेदा गया हो।.
- यहि कुछ विद्वानों का मानना है कि यह एक मान्यता है कि यह चित्रण सिर्फ काल्पनिक था कालाकारों ने अपनी कल्पना शक्ति का प्रयोग करके इस आकृति का निर्माण किया हो।.
- कुछ लोगो का यह भी मानना है कि हो सकता है कि इस नकाशी को आधुनिक कलाकारों द्वार वर्तमान काल के किसी समय में कुरेदा गया हो।.
समय यात्रा
1988 में स्ट्रेंज मैगज़ीन द्वारा एक आर्टिकल पब्लिश किया गया था जिसमें पुराने जमाने कि एक नयी चमचमाती कार का जिक्र था।.कहानी 1969 में एलसी बैक और उसके साथी पर अधारित थी जिसमें सड़क पर अपनी कार में डार्विंग करते समय अचानक पुराने ज़माने कि नयी कार को देखा गया था जिसे एक महिला चला रही थी जिसके साथ उसकी बच्ची भी थी उन्होने 1940 के दशक के कपडे पहन रखे थे।. कार को पत्रिका के किरदारों द्वारा रुकवाने का प्रयास किया गया तो वो नही रुकी अंत में उन्होने कार के आगे ले जाकर अपनी कार को रोककर दुबारा कार का मुआयना करना चाहा मगर अपनी कार से उतरने के बाद उन्होंने देखा कि वह पुरानी कार गायब हो चुकी थी।.
1954 मे जापान के एयरपोर्ट पर एक शख्स आया जिसने अपने आप को Taured नाम के देश से आया हुआ बताया उसका पासपोर्ट भी सही था मगर उस समय काल के दौरान टाओरेड नाम का कोई देश ही नही था।. नक्शे को दिखाने पर उसने स्पेंन और फ्रांस के बिच की एक जगह बताई जिसे उस समयकाल के लोग प्रिंसीपिल्टी आफॅ एंडोरा कहते थे जिसे सुनकर उस नागरिक का दिमाग खराब हो गया कि आखिर उसके देश को सुरक्षा कर्मी किसी अन्य नाम से कैसे बुला रहे है।.अतः उसे नज़दीकी होटल के कमरे में कैदी बना कर रखा गया मगर बाहर खड़े पैहरेदारों को पता ही नही चला कि वो कमरे से गायब कैसे हो गया।.
नरसिंह वर्मन द्वितीय
विदेशी सम्बंध
साहित्यीक योगदान
वास्तुकला संरक्षण
मंगलवार, 28 मई 2024
anti gravity jar
प्रस्तावना
गुरुत्वाकर्षण विरोधी जार
जार का मैक्निस्ज़म काम कैसे करता है
गुरुत्व मोहिनी
खोज का मुख्य आधार
17 सितम्बर 2022 में खोज को आधार तब मिला जब मंदिर के बाहर खड़े स्तम्भ से एक गोल पत्थर जमीन पर गिरा।.इसी बिच इस क्षेत्र विशेष में 2.3 रीयेक्टर पैमाने की आधार गति से भुकंप का आना था काफी पुराना होने का कारण लोगों का लगा लगी कि स्तम्भ गिरने वाला है मगर गोल पत्थर के गिरने से सबके मन से उत्सुकता जागृत कि आखीर यह पत्थर ऊपर कैसे पहुंचा और भुकंप के समय हि क्यों गिरा।.अतः जांच प्रारम्भ हुई जिसमें पता लगा कि स्तम्भ बिना किसी ने के समर्थन के खड़ा है इसके साथ हि इसके स्तम्भ मात्र तीन स्लैव पर हि खड़ा है यानि स्तम्भ का एक स्लैव सदा हवा में रहता है इसके प्रमाणन के लिए कपड़े कि एक पतली शीट को आर-पार करके देखा गया।. उपरोक्त कारणों ने शोधकर्ताओं को सोच में ड़ाल दिया कि आखीर स्तम्भ किस आधार पर खड़ा है इसके साथ हि स्तम्भ के ऊपर की तरफ लम्बाई 42 फिट कि है और यह तीन फीट चौड़ा है जिसका वज़न लगभग 45 टन अनुमानित किया गया है स्तम्भ के उपर कि ओर एक नट के आकार कि आकृति का पत्थर है और उसके उपर एकआयता कार पत्थर रखा गया है जिस के चारो तरफ जंग लगी घंटीयां थी देखने से ऐसा लगता है कि एक समय में काल के दौनान ये तेज गति से आये भुक्पं के कारण बजती रही होंगी ओर ये नट के आकार की पत्थर की आकृति गति करती होगी।.









.webp)
