प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में हम भारत के एक कार मकैनिक एवं वैज्ञानिक मोहम्मद रईस के बारे में बात करने जा रहे है वे चर्चा में इसलिए है क्योंकि हाल ही में उन्होंने एक नये प्रकार के कार इंजन का अविष्कार किया जोकि पानी से चलता है। यानि अब कार पानी से भी चल सकती है।. हांलकि इस विषय पर पहले भी रिसर्च हो चुकी थी जैसे कि स्टीम इंजन के द्वारा कार आदि को चलना मगर इस प्रकार के इंजन में समस्या यह थी कि यह अत्याधिक गर्म होते थे ,जिसके कारण लम्बे समय तक चलना या लम्बी यात्रा करना इससे सम्भव नही था।. अतः मोहम्मद रईस की यह खोज एक महत्वरुर्ण कदम साबित हो सकती है।.मोहम्मद रईस कौन हैं
मोहम्मद रईस मकरानी मध्य प्रदेश के एक कार वैज्ञानिक है जिन्होंने लगभग पांच साल मेहनत करके के इस प्रकार के इंजन का अविष्कार किया। यह एक ऐसी खोज है जिसने पुरी दुनिया को चौंका दिया है। इस प्रकार की खोज से देशी ही नही विदेशी उद्योगपतियों कि होश उड़ा दियें है। मोहम्मद रईस के बारे में बात करे तो 2016 के उनके वायरल विडीयो के बाद से उनके बारे में कोई खबर ,समाचार पत्र य किसी न्युज़ चैनल य किसी सोशल मिडीया प्लेटफार्म पर कोई खबर नही है।.मो.रईस मकरानी ने अपनी इस तकनीक का पेटेंट भी करा रखा है जि एक अच्छी बात है। आपको बताते चले कि उनकी यह तकनीक चीन भी अपनाना चाहता था मगर मो.रईस मकरानी ने शर्त रखी की कार बनाने कि फैक्ट्री उनके होम टाउन यानि मध्य प्रदेश में सर्वप्रथम लगायी जायेगी।मगर चाईना ने यह शर्त रखी की वे उनके प्रोजक्ट मे तभी निवेश करेंगे जब कम्पनी चीन में लगाई जायेगी। दुसरी तरफ हमारी भारत सरकार ने भी स्वयं उनके इस प्रोजक्ट पर कोई ध्यान नही दिया। जिसके कुछ प्रमुख कारण है जिसके बारे में हम आगे के भाग में बात करेंगे।.
पानी ईधन के रुप में प्रयोग
दरअसल पानी ईधन नही है ,बल्कि पानी की जगह ,पानी और कैल्शियम कार्बाइट के रियेक्शन निकलने वाली एसटीलिन गैस ईधन है। हांलकि इसे ईधन के रुप में प्रयोग करने के लिए कार इंजन में कुछ बदलाव करने पड़ते है जिसके बाद आप इस गैस को आसानी से इस्तेमाल कर सकते है। जो कि एक मैकेनिक व्यक्ति आसानी से कर सकता है। इसके लाभ के बारे में बात करे तो 1.एसिटिलीन गैस का प्रयोग करने से ईधन खर्च लगभग दो रुपये प्रति किलोमीटर पड़ता है ,जोकि अपने आप में एक कमाल की बात है। 2.इसके साथ ही यह पर्यावरण के अनुकूल है यानि इससे पर्यावरण प्रदूषण न के बराबर होता है।.रासायनिक अभिक्रिया देखें तो-
पानी (H2o)जब कैल्शियम कर्बाइट(cac2) के साथ अभिक्रिया करता है तो एसटिलीन गैस (c2H2)बनती है जो कि ज्वलनशील होती है। जिसका प्रयोग ईधन के रुप में किया जा सकता है।.
सरकार की लापरवाही का कारण
1.सरकारी तथा गैर सरकारी कम्पनी का ढ़ेर सारा निवेशकम्पनीयां अपनी रोजगार को ज्यादा समयावधि के लिए जारी रखने को लिए दस साल से लेकर बीस साल तक का समझौता करते है ताकि एक ही दाम पर वे कच्चामाल सालों साल खरीद सके और महंगे दामों में बेच सके। अतः इसके लिए समझौते के अनुसार एक बार में ही बड़ी रकम जमा करनी होती है जो कि करोड़ों में हो सकती है। यहां हम कुछ सरकारी एवं गैर कम्पनीयों एवं उनके मार्केट कैप के बारे में बात करने जा रहे ताकि आप अन्दाज़ा लगा सके। 1.OIL 77करोड़ 2. MRPL 27करोड़ 3.HPCL 83करोड़ 4.LNG 51करोड़ 5.GAIL 1 लाख 27करोड़ यह सब तो सरकारी कंपनी है इसके अलावा नायरा,जीयो बीपी,के पर्न आयल एण्ड गैस आदि है जो पेट्रोलियम में निवेश करती है।.
2.अचानक या तत्कालीन प्रभाव
किसी भी तकनीक तत्कालीन प्रभाव से अपनाना का कठिन कार्य है क्योंकि कम्पनीयाों को अपनी मैन्युफैक्चरींग तकनीक में बदलाव लाना होता है जो की धीरे धीरे सालो के प्रयास से ही सम्भव हो पाता है।.
3.विदेशी राजनीतिक दबाव
जैसा की हम जानते है कि भारत में पेट्रोल विदेश से निर्यात किया जाता है ,जिनमें दो पर्टियों के बीच समझौता किया जाता है जो कि पांच साल ,दस साल य उससे ज्यादा का हो सकता है। अब समझीये की हर देशी -विदेशी कम्पनी अपनी सरकार एवं अर्थव्यवस्था में अपनी अहम भूमिका निभाती हैं। अतः पहला कारण तो यह होता है कि अचनाक से किसी कम्पनी से समझौता तोड़ना य किसी नयी तकनीक में तत्तकालीन प्रभाव से निवेश करना सम्भव नहीं है, इससे कम्पनी के व्यापार कि छवि पर गलत असर पड़ सकता है। दुसरा कारण विदेशी देश अपने से छोटे देशों को इन्हीं कम्पनीयो के समझौतों की मदत से शौषण करते है, जिसके कारण से प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता है।
वैज्ञानिकों को हमारा सुझाव
1.देखीये कोई भी खोज एक खजाने की तरह होती है। इसे कब, कहां ,कौन , कैसे कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता है। मगर इस खजाने को सहेज पाना सबके बस कि बात नहीं है । भारत में अभी भी ऐसी कम्पनीयां एवं सरकारे नहीं बन पायी हैं जो कि तत्काल में किसी तकनीक में निवेश कर सकें।2.दोस्तों आप माने या न माने लेकिन हर खोज कि शुरुआत एक गलती से य एक घटना से होती है। जिसे देख कर वैज्ञानिक के दिमाग में ढेर सारी सम्भावनाये उठती है। जो आगे चलकर एक खोज का रुप ले लेती है।.अब ऐसे में 5 साल कि विदेशी शिक्षा का टैग लेकर घुमने वाले लोग यह मानने को तैयार ही हो पाते है कि , कोई हाईस्कूल पास व्यक्ति किसी इनोवेशन य तकनीक की खोज कर सकता है। इसे वो अपनी बेईज्जती के रुप में लेते है। हांलकि सब एक जैसे नहीं होते।.
3. अपनी खोज को कई भागों में विभाजित करके रखे, ताकि ज़रुरत पड़ने पर आप ही उसका इस्तेमाल कर सकें।.
4.अपनी क्षमता को परखे, निवेश करने से पहले अपनी चल-अचल सम्पत्ति का विवरण ले य विचार करें तथा उसका तीस प्रतीशत हिस्सा ही निवेश करें।.
5. बाहरी लोंगो पर अपनी निर्भरता कम रखें तथा अगर सम्पत्ति का अभाव है तो सम्पत्ति को जोड़ें ।. अगर निवेश में अधिक समय लग रहा है तो अपनी आने वाली पिढ़ी को वे सौंपे मगर परखने के बाद क्योंकि हर कोई अपकी खोज की कद्र नहीं कर सकता ।
6.अच्छे ओर भरोसे मंद लोगों की टीम बनाये।
7.अतः उपरोक्त सभी कार्यों को करने बाद अपनी खोज का खुलासा करें।
हम भी चाहते है्ं कि आपको आपकी मेहनत का पुरा क्रेडीट मिले ,ये आपका हक है।
सोर्स-युट्यूब,विकीपिडीया,Indiatv.in

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