प्रस्तावना
हेलो दोस्तों प्रस्तुत लेख में हम बात करेंगे पानी की जैसे हमारी याददाश्त होती है ठीक उसी प्रकार पानी की भी याददाश्त होती है यह अपने आप में एक चौकाने वाला रहस्य है इसे जानना हमारे लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित करता है क्योंकि मानव शरीर भी लगभग 75% पानी से ही बना है अतः जिस प्रकार का पानी हम पीते हैं वह हमारे शरीर और विचारधारा को प्रभावित करता है इस लेख के माध्यम से हम इस बात के तथ्यों के प्रमाणीकरण पर बात करेंगे।
Schizophrenia
एक मानसिक बीमारी है। जो किसी व्यक्ति के सुनने महसूस करने और व्यवहार करने के तरीकों को प्रभावित करती है। इस बीमारी के चलते मनुष्य वास्तविकता से दूर हो जाता है या उससे मतिभ्रम हल्लुसीनेशन जैसी समस्याएं होती है।.खास बात यह है कि इसका कोई इलाज नहीं है। बस कुछ उपचार के तरीके जिससे इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मतिभ्रम के अलावा इसके अन्य लक्षणों में डीस ऑर्गेनाइज्ड थिंकिंग अव्यवस्थित सोच एवं भाषण और डिसआर्गेनाइज्ड बिहेवियर यानी अव्यवस्थित व्यवहार या नकारात्मक लक्षण या भावनाओं को न व्यक्त कर पाना है। इसके अंतर्गत ना बात कर पता है रुचि न ले पाना य प्रेरणा मोटिवेशन की कमियां भी आता है।कारण
इसके होने के मुख्य कारण है जिनमें ब्रेन केमिस्ट्री में असंतुलन और तनाव पूर्ण जीवन की घटनाएं इसके अलावा कुछ विज्ञानको ने इसे जेनेटिक डिसऑर्डर तथा पर्यावरणीय कारकों को भी शामिल किया है अब यहां पर्यावरणीय कारकों में मुख्य रूप से पानी की ओर इशारा किया गया है। समझिए धूप बरसात या सर्दी या आपदा संकट का हम एक निश्चित समय तक सामना करते हैं।ऐसी घटना में हमें आसपास में रहने वाले सहयोगियों का सहयोग मिलता है मगर पानी हमारे रोजाना के जीवन की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है और यह हमें इस प्रकार की बीमारियों से ग्रसित भी बन सकता है अगर हम शुद्ध पानी नहीं पीते यहां शुद्धता का मतलब साफ पानी से नहीं है बल्कि जिस बर्तन में उस पानी को पीते हैं जिस स्थान य जिस वस्तु या सामान के बगल में उस पानी को रखते से हैं।
उसी प्रकार हमारा दिमाग भी पानी से भरा होता है और हमारी बातों एवं विचारों विचार जो हम सोचते हैं उसे सुनता है अगर आप रोज नेगेटिव बातें बहुत सोचते हैं तो यह निश्चित रूप से आप वह काम नहीं कर पाएंगे लेकिन अगर आप पॉजिटिव बातें करते हैं किसी काम को लेकर तो आपकी बॉडी कार्य करने की क्षमता और पॉजिटिव एनर्जी का विकास करती है।
निम्नलिखित वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण शोध
जैक्स बेनवेनिस्ट का शोध
यह फ्रांसिस इम्यूनो लोजिस्ट immunologist है ।1988 में नेचर पत्रिका में इनका एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें उन्होंने बताया कि पानी एंटीबॉडीज की याददाश्त बनाए रखता है हालांकि इस लेख पर काफी विवाद हुआ बाद में इस प्रकार के प्रयोग को लैब या प्रयोगशाला में दोहराया नहीं गया शोध के मुख्य बिंदु कहते कि अपनी अपने संपर्क में आए पदार्थ की जानकारी या उसके गुणों को याद रखता है।मसरू इमोटो Masaru Emoto
यह एक जापानी शोध करता थे जिन्होंने अपनी शोध में क्रिस्टल पर विचार और भावना के प्रभाव का प्रयोग किया लेकिन उनके प्रयोग में वैज्ञानिकी कार्य प्रणाली की कमी थी जिस कारण उनकी भी खोज को वैज्ञानिक प्रमाणित नहीं माना गया इस रिसर्च पर छपी उनकी किताब the hidden message in water 2004 my best seller thi अमेरिका में।उन्होंने पानी पर दो प्रकार की शोध है किये पहले शोध में उन्होंने क्रिस्टल वाटर को यानी पानी को जमा कर उनके अगल-बगल कुछ संगीत या शब्दों का प्रयोग करके उन में बनने वाली आकृतियों पर रिसर्च की।
खराब आकृति वाले रिसर्च में पता लगा कि अगर उनके सामने गलत शब्द का प्रयोग या फिर गलत चीज बोली जा रही है तो हमें गलत आकृतियां बन रही है वहीं अगर सुरीले संगीत मधुर बातों या अच्छी बातों का उजागर किया जा रहा है तो अच्छे क्रिस्टल बने।
दूसरे शोध में तीन जार को लिया गया जिनमें कुछ चावल रखे गए और उन्हें पानी से भर दिया गया इसके बाद तीनों जार को एक महीने तक एक कमरे में रखा गया। मसारू इमिटो रोजाना तीनों जार के पास रोजाना जाते पहले जाकर पास जाकर अच्छी बातें कहते हैं । दूसरे जार के पास जाकर उसे नजर अंदाज करते और तीसरे जार के पास जाकर उसे भला बुरा कह कर चले आते यह प्रक्रिया क्या लगातार 30 दिनों तक की गई उसके बाद परिणाम कुछ इस प्रकार है कि पहले जार के चावल अच्छे फूल गए और उन्हें फफूंद भी नहीं लगी थी दूसरे जार के चावल जो कि ना तो सड़े ना ही प्रॉपर तरीके से फूल मतलब प्रक्रिया धीरे हो गई। तीसरी जार के चावल सड़ गए।.
उनके रिसर्च का मुख्य मकसद
मसरी मोटा के पानी के प्रयोग का परिचय देते हुए बताया कि पानी पर सकारात्मक और नकारात्मक शब्द विचार और भावनाओं का असर पड़ता है यह मोटो का मानना था कि पानी एक मौलिक और सार्वजनिक पदार्थ है जो मानवीय भावनाओं और इरादों से गहराई से प्रभावित होता है मसारु एमिटो का मानना था कि पानी को पराबैंगनी प्रकाश या कुछ विद्युत चुंबकीय तरंगों के संपर्क में ला कर बदलावों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।भारतीय समाज से इसका संबंध
प्राचीन काल में तमाम मौलाना बाबा साधु या जब किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होती थी या कोई जादू करना होता था तो उसे पानी को फूंक कर देते थे उसे समय हमें लगता था कि यह अंधविश्वास है मगर असल में यह एक वैज्ञानिक तरीका था इलाज की खास बात यह थी कि यह पानी असर भी करता था।भारतीय समाज में पानी को रखने से लेकर पीने तक के त कुछ नियम बनाए गए थे पुराने जमाने में पीने के पानी को पहले तांबे के बर्तन में 10 से 12 घंटे तक छोड़ दिया जाता था उसके बाद उस पानी को पिया जाता था ऐसा करने से तांबा पानी के साथ अभिक्रिया करके उसे आयुर्वेदिक औषधि बना देता था और उसमें मौजूद विषैला कण सतह पर बैठ जाते थे।
भारतीय समाज में पुराने जमाने में हर प्रातः काल पानी वाले बर्तन को इमली से मजा जाता था उसके बाद थोड़ी विभूति और थोड़ा कुमकुम लगाकर पानी वाली बर्तन की पूजा की जाती थी।
भारतीय समाज ने शुद्ध पानी के लिए बहुत सी लड़ाइयां भी लड़ी जैसे 20 मार्च 1927 में बी आर अंबेडकर ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जमादार तालाब पर पानी पीने का अधिकार अछूत को दिलाया हालांकि अधिकतर अछूतों की मिला मगर थे वे भारतीय ही।.सोर्स मीडिया लैंड नेटवर्क और दैनिक जागरण

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