Indian History reveal the Past

हमारे इस ब्लॉग में भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक इतिहास, राजवंशों आंदोलन स्टार्टअप टेक्नोलॉजी कला और वास्तुकला तथा आर्थिक इतिहास से संबंधित विषयों पर जानकारी दी जाती है। हम कम से कम शब्दों में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं।

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शुक्रवार, 19 जून 2026

indo-greek kingdom इंडो-ग्रीक आक्रमण

indo-greek kingdom
प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम भारत पर हुए तीसरे विदेशी आक्रमण के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं जिसे हम इंडों-ग्रिक आक्रमण के नाम से भी जानते है। इसके साथ ही हम देखेंगे की इनके द्वारा कौन कौन से परिवर्तन भारत में किये गए।

मूल निवास

यह मूल रुप से बैक्टीरिया प्रांत के रहने वाले थे। इन का प्रमुख शासक डेमोट्रियस था जिसकी मदद से इन्होंने उत्तर पश्चिम यानी पंजाब हरियाणा मथुरा तथा पाकिस्तान अफगानिस्तान के क्षेत्रों पर अपना शासन स्थापित किया। यह आक्रमण भारत पर 180 ईसा पूर्व में हुआ था।

प्रमुख शासक

डेमोट्रियस के आलवा इनके प्रमुख शासकों की सूची में मिनांडर menandar का नाम आता है। इसने साकल sakal को अपनी राजधानी बनाकर साकेत यानी अयोध्या और पाटिलपुत्र यानी मगध के क्षेत्रों तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया।

बौद्ध धर्म से प्रभावित 

मिनांडर बौद्ध धर्म से अत्यधिक आकर्षित हुआ इसका साक्ष्य हमें बौद्ध भिक्षु नागसेन और मिनांडर के दार्शनिक संवाद से मिलता है जो कि प्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ मिलिदंपन्ह वर्णित है।

भारतीय संस्कृति पर प्रभाव

1.सिक्के
भारत में सर्वप्रथम सोने के सिक्कों का चलन यवन शासकों द्वारा ही चलाया गया। जिस पर उस समय काल के राजा की तस्वीर एवं नाम अंकित रहता था और दूसरी तरफ बौद्ध की आकृति य उनका उपदेश कुरेदा जाता था। डाई से सिक्के बनाने का चलन यवन शासकों द्वारा ही चलाया गया था। इंडो-ग्रीक से पहले भारत में बने सिक्कों का कोई निश्चित आकार य राजा की पहचान नहीं होती थी। डाई द्वारा सिक्के बनाने के कारण सिक्कों का वजन आकार और शुद्धता निश्चित की गई जिससे व्यापार करना बेहद आसान हो गया। उपरोक्त कारणों के चलते भारत की आर्थिक समृद्धि का विकास हुआ। 

2.गांधार कला Gandhara Art
यूनानी मूर्ति कला और भारतीय मूर्ति कला के संगम से गांधार मूर्ति कला का विकास हुआ। इसी कला के माध्यम से भारत में पहली बार महात्मा बुद्ध क मूर्ति यूनानी देवता अपोलो की तरह बनाई गयी थी। इनके युद्ध से पहले भारत में बौद्ध को प्रतीकों चरण और स्तूपों द्वारा दर्शाया जाता था। उनकी मानव रुप में मूर्ति नहीं बनती थी।इनके द्वारा निर्मित गांधार कला शैली के चलते ही बुद्ध के घुंघराले बाल मूंछे और शारीरिक गठन जैसी मूर्तियां बनाई जाने लगीं।

3.खगोल विज्ञान और ज्योतिष कला
सप्ताह के सात दिनों का नामकरण तथा 12 राशियों की खोज यूनानी प्रभाव से ही विकसित हुई। जिसका प्रमाण भारतीय ग्रंथ गार्गी संहिता से मिलता है। जिसमें लिखा है कि यद्यपि यवन एक बर्बर देश है  फिर भी वे ज्योतिष के विद्वान है इसलिए वे पूजनीय है। इनकी ही वैज्ञानिक कला शैली से ग्रहों की गति ग्रहण की भविष्यवाणी और वर्ष की सटीक गणना करने की यूनानी तकनीकों को भारतीय विद्वानों ने अपनाया और अपने ग्रंथों में शामिल किया।

4.रंगमंच और पर्दा
भारतीय नाटक और रंगमंच में परदे का उपयोग शुरु हुआ जिसे आज भी यवनिका कहा जाता है  जो कि यवन शब्द से बना है।

सांस्कृतिक समन्वय

कई यूनानी शासकों और राजदूतों ने भारतीय धर्म को अपनाया ये ही नहीं तक्षशिला के यवन राजदूत हेलियोडोरस ने मध्य प्रदेश के विदिशा में भगवान विष्णु को समर्पित गरुड़ ध्वज स्तंभ की  स्थापना करवाई।इस प्रकार से देखा जाये तो यवन आक्रमण और उनके शासन का भारतीय संस्कृति शासन और व्यापार पर गहरा और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा।

वैश्विक व्यापार

उत्तर-पश्चिम सीमा सुरक्षित होने और ग्रीक संपर्क से भारत का व्यापार मध्य एशिया भू मध्य सागर और रोमन साम्राज्य तक तेजी से फैला।

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