प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में हम दुनिया में पाये जाने वाले उन सभी आयामों के बारे में जानेंगे जो कि खोजें गए है य जिनकी कल्पना कर पाना सम्भव है। यह जानना इस लिए भी जरूरी है क्योंकि दुनिया की सभी रिसर्च और इनोवेशन खोज इन्हीं आयामों की मदद से हुई है। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि क्वांटम कम्पयूटर की खोज भी दुनिया के इन्हीं आयामों को जानकर हो पायी है। इसके साथ ही जिन्हें हम भूत प्रेत य पैरानोरमल गतिविधि का नाम देते है वे भी इन्हीं आयामों में से किसी एक आयाम का जीव है। हमारे हिन्दू धर्म में भी इन आयामों का जिक्र हुआ है जैसे की मरने के बाद मनुष्य की आत्मा एक आयाम से दूसरे आयाम में चली जाती है। वेद पुराण में इन्हीं आयामों को लोक के रुप में दर्शाया गया है जैसे पृथ्वी लोग आकाश लोक एवं पाताल लोक आदि। लेकिन अगर शास्त्रों का गहनता से अध्ययन किया जाये तो हमें पता चलता है कि इन लोकों की संख्या तीन न होकर के चौदह है।
वास्तविक आयाम
वास्तविक आयामों की बात करें तो यह सिर्फ चार है जिन्हें हम देख सकते है य महसूस कर सकते है और आसानी से समझ सकते है। वैज्ञानिकों का दावा है कि मनुष्य तीसरे आयाम में रहता है। वहीं सिट्रिंग थ्योरि के अनुसार आयामों की संख्या 11 है । इसी प्रकार बोसोनिक स्ट्रिंग थ्योरि के मुताबिक आयामों की संख्या 26 बताई गई है। हलांकि इसे सही तरीके अभी तक परिभाषित नहीं किया जा सका इस लिए इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है मगर विशेषज्ञों ने इसके माध्यम से गणित की समस्याओं को हल करने में सफलता हासिल की है जिसके के कारण बोसोमनिक थ्योरि को महत्व दिया जाता है। कुछ थ्योरि तो यहां तक कहती है कि हम 64 आयामी दुनिया में रहते है मगर सवाल वही है इसे परिभाषित कौन करेगा।
स्ट्रींग थ्योरि
यहां स्ट्रींग थ्योरि के हिसाब से जो 11 आयामों को परिभाषित किया गया है हम इन्हीं के बारे में चर्चा करेंगे क्योंकि अगर किसी आयामों को परिभाषित करने की सही परिभाषा नहीं निकल पाती तो उन पर बात करना मायने नहीं रखता। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि वे वजूद में नहीं है। लगातार वैज्ञानिक इस पर अपनी रिसर्च कर रहें है।
आयामों की संरचना
1.पहला आयाम
इसे हम एक साधारण रेखा के समझ सकते जिस पर रहने वाला व्यक्ति एक छोर से दूसरे छोर पर ही जा सकता है। इसे ऐसे समझें की कोई व्यक्ति विशेष रुप से पूर्व से पश्चिम की यात्रा तो कर सकता है मगर उत्तर से दक्षिण की यात्रा नहीं कर सकता। उदाहरण के लिए कुछ ऐसे जीव है जो पृथ्वी की सतह पर रेंगते है जो कि सिर्फ आगे पीछे ही जा सकते हैं यहां चींटी को ही लेते है ये जीव सिर्फ गंध की दिशा में चलता है य एक लाईन बना कर।
2.दूसरा आयाम
इस आयाम का जीव पहले आयाम की तुलना में अधिक कुशल होता है वे पूर्व से पश्चिम एवं उत्तर से दक्षिण दिशा में भी चल सकता है। कागज पर बना मानचित्र एवं घर की बनावट का नक्शा इसी का उदाहरण हो सकता है। दूसरे उदाहरण में हम एक पक्षी को लेते है जो की आकाश में उड़ता है और चारों दिशाओं में यात्रा कर सकता है।
3.तीसरा आयाम
इस आयाम में हम मनुष्य आते है। हलांकि हमारे तरह अन्य जीव भी इस आयाम में आते है मगर मनुष्य को बौद्धिक क्षमता मिलने के कारण ही हम तीसरे आयाम में आते हैं। जैसे हम एक चींटी के पूरे जीवन चक्र को देख सकते है उसे समझ सकते है। इसी प्रकार हम एक पक्षी के जीवन चक्र को भी देख और समझ सकते है। मगर ये दोनों जीव जो कि हमें देखते है मगर हमारे जीवन चक्र को नहीं समझ सकते। शायद मनुष्य ने इन्हीं जैसे जीवों के जीवन के समझ कर रेलगाड़ी, हवाई जहाज़ एवं पानी में चलने वाली पण्डुब्बी का निर्माण किया होगा। जिसके चलते मनुष्य तीसरे आयाम में भी यात्रा कर सकता है।
हलांकि की किसी वस्तु को तीन तरफ या 3D डाइमेंशन से देख पाना इसका सबसे सरल उदाहरण है। मगर आगे के आयामों को समझने के लिए हमें सभी आयामों में रहने वाले जीवों के दुनिया को देखने का नजरिया भी समझना जरूरी है।
4.चौथा आयाम
इस आयाम को समय से परिभाषित किया गया है। यह वह आयाम है जिसे हम देख नहीं सकते और न ही काबू कर सकते मगर इसे महसूस करते है जैसे दिन य रात का होना। हमारा जीवन समय के साथ आगे बढ़ रहा है हम इसे पीछे नहीं कर सकते य अपनी उम्र को बढ़ने से नहीं रोक सकते। दूसरे उदाहरण से मान लीजिए आप को किसी से मिलने जाना है उस व्यक्ति ने किसी विशेष जगह का पता बताया और आप वहां पहुंच गए लेकिन वह व्यक्ति वहां नहीं है। अब गलती यहां यह हुई है कि उस व्यक्ति ने मिलने का समय नहीं बताया। अतः समय न बताने के कारण य पुछने के कारण आप उस व्यक्ति से नहीं मिल पाये। इस प्रकार समय हमें तो कंट्रोल कर सकता है मगर हम समय को नहीं।
5.पांचवां आयाम
इस आयाम में रहने वाला व्यक्ति समय को कंट्रोल कर सकता है यानी वे समय में आगे पीछे जा सकता है। या फिर भूत भविष्य वर्तमान में यात्रा कर सकता है। उदाहरण के लिए वे अपने बचपन को फिर से जी सकता है य अपनी मौत के कारण को य उसे देख सकता है। यहां सबसे खास बात यह है कि वह इसे बदल नहीं सकता।
वार्महोल
वर्तमान समय में हम समय यात्रा जैसे कथित घटनाओं के बारे में सुनते है लेकिन इसके उचित प्रमाण हमें नहीं मिलते। जैसे वार्महोल से आर पार जाने पर हम समय से आगे पीछे जाते तो है मगर कितना इसे हम कंट्रोल नहीं कर सकते य फिर वार्महोल कहां पाये जाते है इसका कोई उचित प्रमाण अब तक नहीं मिला है। पांचवें आयाम की परिकल्पना से हमें सिर्फ इतना पता लगा पायें है कि वार्महोल की मदद से समय यात्रा कि जा सकती है यानी सिर्फ इसके अस्तित्व का ही पता चल पाया है।
6.छठवां आयाम
इस आयाम में रहने वाला व्यक्ति अपने साथ होने वाली सभी संभावनाओं को एक साथ देख सकता है। जैसे 1.अगर उसने पढ़ाई की तो आगे चल कर वे डाक्टर बना य इंजीनियर 2.य फिर उसने पढ़ाई नहीं की तो वे मजदूरी करेगा य खुद का कोई रोजगार करेगा। 3.य फिर उसने अपने जीवन में कुछ नहीं किया अंत में किसी कारण वश मारा गया।
इसी तरह की वे 6 से 7 संभावना होते हुए देख सकता है और उसी के हिसाब से अपने वास्तविक जीवन में बदलाव कर सकता है। ज्योतिष शास्त्र की संरचना इसी आयाम से सम्बन्धित है। इस आयाम में रहने वाले व्यक्ति की खास बात यह है कि इन होने वाली सभी जीवन धारा में से किसी एक जीवन धारा का जीवन ही जी सकता है। बताते चलें की क्वांटम कम्प्यूटर की परिकल्पना भी इसी आयाम की मदद से की गयी है।
7.सातवाा आयाम
इस आयाम का व्यक्ति किसी भी समय धारा के जीवन में जा सकता है और उस दुनिया में अपने ही वर्जन य अपने जैसे दिखने वाले व्यक्ति से मिल सकता है और उसके कार्यों में अपनी इच्छा के मुताबिक परिवर्तन कर सकता है। यहां एक जैसी कई दुनिया की परिकल्पना की गई है जिसे हम पैरलल युनिवर्स भी कहते है।
8.आठवां आयाम
इस आयाम का व्यक्ति उन सभी समय धारा को देख सकता है जो संभावित तो है लेकिन उनका समय अलग तरीके से चलता है जैसे किसी समय धारा य दुनिया में व्यक्ति 80 वर्षों तक जीता है तो किसी में 150 वर्षों तक तो किसी में 800 से 900 वर्षों तक का जीवन संभव है। यानी उम्र के साथ वहां के वातावरण गुरुत्वाकर्षण बल, गति एवं प्रकाश में विशेष अंतर पाया जाता है।. यहां पर एक ऐसे भी ब्राह्माण भी परिकल्पना की गई है जिसका समय उलटा चलता है।
कुल मिलाकर आठवें आयाम में हमें उन सभी दुनिया को देखने का अधिकार मिल जाता है जिन्हें हम सोच भी नहीं सकते। ये सभी ब्राह्माण एक पेड़ के समान दिखते है जिनकी जड़ें एक ही जगह पर जा कर जुड़ी हुई है। मगर यह दुनिया अपने करीब दुनिया से बिल्कुल अलग है। जैसे पृथ्वी ग्रह की तरह एक दुसरा ग्रह है जहां आक्सीजन, पानी और सूर्य का प्रकाश नहीं है मगर वहां जीवन सम्भव है। इस ग्रह पर जीवन का स्रोत कुछ और ही है यहां का मनुष्य धरती पर रहने वाले मनुष्य से बिल्कुल अलग है।
इस प्रकार आठवें आयाम में रहने वाले व्यक्ति इन सभी दुनिया या समय धारा की यात्रा तो नहीं कर सकता मगर इन्हें देख सकता है कारण जैसा की हमने बताया वहां जीवन का मुख्य स्रोत अलग- अलग हैं।
9.नौवें आयाम
इस आयाम में भी छठे आयाम की तरह दुसरी दुनिया में जाने के लिए वार्महोल की संकल्पना की गई है अंतर बस इतना है की छठे आयाम में रहने वाला व्यक्ति अपने समान दिखने वाली दुनिया या समय धारा में जा सकता है वहीं नौवें आयाम में रहने वाला व्यक्ति अपनी दुनिया य समय धारा से अलग दिखने वाली दुनिया य समय धारा में जा सकता है। जैसा की हमने बताया की एक ऐसी दुनिया भी है जहां समय उलटा चलता है।
वार्महोल
यह वही रास्ता है जिसके माध्यम से समय यात्रा य एक दुनिया से दूसरी दुनिया में यात्रा की जा सकती है जिसके बारे में हमने छठे एवं नौवें आयाम में अभी बताया। वार्महोल को साधारण भाषा में समझें तो मान लीजिए यह दुनिया एक A4 साइज़ का पेपर है अब इस दुनिया य समय धारा से दुसरी समय धारा में जाने के लिए पेपर के एक छोर से दूसरे छोर पर जाना है। इस यात्रा के दौरान कई प्रकाश वर्ष का समय लगता है। अब इसी पेपर को अगर हम बीचोबीच से मोड़ देते है तो कुछ घण्टों में ही हम एक दुनिया से दूसरी की दुनिया में आसानी से जा सकते है। इसी को वार्म होल कहा गया है।
10. दसवां आयाम
ये वही आयाम है जहां बिगबैंग होते हुए देखा जा सकता है य फिर इसी आयाम के चलते बिगबैंग थ्योरि का निर्माण हुआ। इस आयाम में रहने वाला व्यक्ति ढेर सारी दुनिया का अंत होते और उन्हें बनते हुए देख सकता है। हर एक नई दुनिया का निर्माण दो पुरानी दुनिया के आपस में टकराने से य उनके खतम होने से होता है । शायद इसी आयाम में रहने वाले व्यक्ति को ईश्वर य भगवान कहा जाता है। यानी यह वही आयाम है जिसमें वह सभी संभव संभावना हो चुकी है जो हम सोच भी नहीं सकते य उससे भी ऊपर और अधिक संभावित घटनाएं हो चुकी है जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते।
11. ग्यारहवां आयाम
1990 के दशक में वैज्ञानिकों ने देखा की स्ट्रिंग थ्योरि को अलग- अलग तरह के ब्राह्माण आपस में टकरा रहे हैं। जिसके परिणामस्वरूप एस थ्योरि के मुताबिक ग्यारहवें आयाम की खोज की गई। इस आयाम में परिकल्पना की गई। इस आयाम में हमारे सभी दसों आयाम एक पतले पर्दे की तरह हवा में तैर रहे हैं। यहां हवा ही वह विशेष पावर य शक्ति है जो इन आयामी दुनियाओं को निश्चत समय पर टकराने की संभावनाएं पैदा करती है।
यानी इस आयाम में प्रत्येक दुनिया का जीवन चक्र तय किया जाता है। इस आयाम में पाया जाने वाला व्यक्ति ही शायद गाड आफ सुप्रीम यानी भगवानों के भगवान कहलाता है।
दोस्तों इस तरह से हमने इस लेख में वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए सभी ग्यारह आयामों को एक सरल भाषा में समझाया है हो सकता है कि वास्तविकता इससे थोड़ी अलग हो। क्योंकि अभी भी इन आयामों पर रिसर्च चल ही रही है।
बोसोनिक स्ट्रींग थ्योरि
इस थ्योरि के मुताबिक कुल 26 आयाम है। लेकिन अभी इन पर ठीक से रिसर्च नहीं हुई हैं। हलांकि इस थ्योरि का निर्माण गणित समीकरणों को सही से बैठाने के लिए किया गया था। जिस कारण इसे भी महत्व दिया जाता है।
हिन्दू धर्म के मुताबिक
हिन्दू धर्म के मुताबिक आयामों की संरचना 14 बताई गयी है जिनमें नीचे दिए गए है। खास बात यह है कि हिन्दू धर्म के मुताबिक हम सातवें आयाम में रहते है जिसे हिन्दू धर्म मुताबिक भू-लोक कहा गया है।
इन चौदह आयामों की बात करें तो वे इस प्रकार है 1.सत्यलोक 2 तपलोक 3 जना लोक 4 महार लोक 5 स्वर्ग लोक 6 भवर लोक 7 भू लोक 8 अटला 9 विटला 10 सुहला 11 तलातला 12 गहातला 13 रसा तला 14 पाताला आदि।
वैसे कुछ वैज्ञानिकों ने तो 64 आयामों तक की परिकल्पना कर दी है। मगर जब तर पूर्ण साक्ष्य हमें नहीं मिलते तब तक हम कोई निश्चित निर्णय तर नहीं पहुंच सकते है।.

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