9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past: unbreakable glass

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मंगलवार, 7 जुलाई 2026

unbreakable glass

unbreakable glass

प्रस्तावना

इस लेख में हम हाल ही में खोज किए गये एक विशेष प्रकार के ग्लास य शीशे के बारे में बात करने जा रहे है। इस ग्लास की खास बात यह है कि यह टूटने के बाद अपने आप से जुड़ जाता है। हलांकि कई देश जैसे जापान और इज़ारायल ने इसकी खोज पहले ही कर ली थी मगर अब इन देशों की श्रेणी में भारत का नाम भी जुड़ गया है। वैसे देखा जाए तो भारत इस प्रकार की रिसर्च में हमेशा पीछे रहता है और जब तक हम इस प्रकार की खोज में सफल हो पाते है तब तक विदेशी हमसे आगे निकल जाते है और हमें उस खोज का सही लाभ नहीं मिल पाता है।

लेकिन इस बार मामला थोड़ा सा पलट गया है हमने शायद समय से इस खोज को अंजाम दिया है जिससे हम अन्तर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफल हुए हैं। बताते चलें कि इस प्रकार के ग्लास का प्रयोग वर्तमान समय में मोबाइल फोन तथा एल ई डी पैनल में किए जाने का प्लान है ताकि उन्हें और मजबूत बनाया जा सकें तथा नुकसान को कम किया जा सके। इसके अलावा इस प्रकार के ग्लास का इस्तेमाल अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में भी किया जा सकता है।

बाइ पाइराज़ोल कार्बिनक क्रिस्टल

भारत मूल के वैज्ञानिकों ने इसे बाइ पाइराज़ोल कार्बिनक क्रिस्टल का नाम दिया है। इसकी खोज कलकत्ता के IISER यानी इण्डियन इंस्टीटूयुट आफ साइंस इडोकेशन एण्ड रिसर्च सेंटर के द्वारा की गयी है। खास बात यह भी है कि इस रिसर्च का सबसे पहले प्रकाशन दूनिया की सबसे प्रसिद्ध जानी मानी प्रशिक्षित साइंस जनरल की पत्रिका ने 2021 में किया था। इसके बाद नेचर पत्रिका जिसे हम नेचर कम्युनिकेशन के नाम से भी जानते हैं  ने भी इस रिसर्च का प्रकाशन अपने पत्रिका में किया था। लेकिन दुःख की बात यह है की अभी तक इस रिसर्च का कोई पेटेंट और  सैंपल हम भारतीयों अभी तक देखने को नहीं मिला है।

रिसर्च के मुख्य कार्यकर्ता

इस रिसर्च को IISER KOLLKATA कैमिकल साइंस की प्रोफेसर माला रेड़्डी एवं भौतिकी विज्ञान की प्रोफेसर निर्मला घोष ने  तथा आई आई टी खरगपुर की टीम ने एक साथ मिलकर पूरा किया था।

फडींग

इस रिसर्च को भारत सरकार की संस्था DST तथा SERB यानी साइंस एण्ड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड के सर्वणाज्यंति फालोशीप प्रोग्राम के तहत फडींग दी गयी थी।

सांइटीफिक नाम

इस ग्लास का सांइटीफिक नाम बाइपाइराज़ोल कार्बनिक क्रिस्टल या पिजोइलेक्ट्रिक आणविक क्रिस्टल के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप खुद से इस रिसर्च के बारे में पता करना चाहते है तो अपको dst,gov.in के पेज पर जाकर सर्च करना है self healing property spoted in organic crystals आपको सारे नतीजे मिल जायेंगे। इसके अलावा आप दूसरे लिंक यानी गुगल पर cmalla raddy self healing research आपको रिसर्च पेपर मिल जायेंगा।

इज़ारायल

इज़ारायल ने इस ग्लास का नाम पेप्टाइड आधारित ग्लास रखा है जिसकी खोज telaviv university ने बायोलोजिकल मोलिक्योल में अमीनो एसिड और peptides का इस्तेमाल करके बनाया है। इस ग्लास की खास बात यह कि यह पर्यावरण के अनुकूलित है। अगर यह ग्लास टुट जाता है तो रुम टेम्परेचर या सामान्य वातावरण में ही नमी मिलते ही अपने आप को जोड़ लेता है।

जापान

जापान की टोकीयो युनिवर्सीटी के एक छात्र ने गलती से इस प्रकार के मटेरियल की खोज कर दी। इस पर पहले से किसी टीम को नहीं लगाया गया था। 
 खास बात यह है कि  यह ग्लास भी टूटने पर सामान्य वातावरण में कुछ सेकंड य मिनटों तक आपस में जोड़े रहने पर आपस में अपने आप जुड़ जाता है। यहां हम इस बात का ख्याल रखना है कि टूटा हुआ हिस्सा खोना नहीं चाहिए।

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