Indian History reveal the Past

हमारे इस ब्लॉग में भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक इतिहास, राजवंशों आंदोलन स्टार्टअप टेक्नोलॉजी कला और वास्तुकला तथा आर्थिक इतिहास से संबंधित विषयों पर जानकारी दी जाती है। हम कम से कम शब्दों में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं।

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रविवार, 9 अगस्त 2026

भूत क्या है

भूत क्या है
प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्या सच में भूत प्रेत होते हैं या नहीं और क्या इनका वास्तविक दुनिया से कोई सम्बन्ध है। यह संसार इतना बड़ा और रहस्यमय है की अभी तक बहुत सी ऐसी दुनिया है जिनकी अभी खोज नहीं हो पायी है जैसे पैरानोर्मल गतिविधि क्यों होती है मानव शरीर का सबसे शक्ति शाली अंग यानी दिमाग को भ्रम क्यों होता है। इतिहास के कुछ तथ्यों की मदद से इसी रहस्य से हम पर्दा उठाने की कोशिश करेंगे।

दुनिया के किसी भी धर्म के ले के चले तो हमें पता चलता है कि उनमें  लोककथाओं का अपना एक अलग स्थान है और हर एक लोक कथा में हमें कुछ चीजें ऐसी मिल ही जाती है जिनका वास्तविक दुनिया से सम्बन्ध स्थापित कर पाना असंभव लगता है। लेकिन हर एक लोक कथा में हर बार एक समानता होना कोई सामान्य बात नहीं हो सकती।  तो इसी बात को आधार बनाते हुए हमने इस लेख की रचना की है जो कि एक कोशिश है वास्तविकता को समझने कि।

अलग दुनिया की समीकरण

शुरुआत हम मानव शरीर से ही करते हैं जब तक हमें पता नहीं था कि हमारे शरीर में कुछ अच्छे और बुरे जीवाणु पनपते है तब तक हम इनके अस्तित्व से अंजान थे मगर जब हमें इनके बारे में पता चला तो हमने इन पर खोज की। इस प्रकार दवाओं का निर्माण हुआ जिनकी मदद से अच्छे जीवाणु को हम पन अपने देते और बुरे को मार देते है।

अब समझने वाली बात यह है कि इन जीवाणुओं की भी अपनी एक अलग दुनिया होती है जिनमें वे प्रजनन करते है और कालोनी बनाते है। उनके नजरिये से संसार कुछ अलग तरह से दिखता है और हमारी नजर से अलग तरह से। वे हमारे अस्तित्व के बारे में परिकल्पना ही नहीं कर सकते क्योंकि जैसे ही वे हमारे शरीर से  बाहर निकलते है मर जाते है।

अब यहां कुछ लोगों का मानना यह है कि मनुष्य कितना समझदार जीव इस दुनिया में और कोई नहीं है।  मगर विज्ञान ने इस बात को भी झुठला दिया है क्योंकि दुनिया में और भी कई ग्रह है जहां के मानव य अन्य जीव समूह हमसे कहीं ज्यादा विकसित है। इस बात का प्रमाणीकरण अमेरिका की अंतरिक्ष विभाग ने हाल ही में एरिया 51 की फाइल को प्रकाशित करके कर ही दिया है।

तो अब हम यहां हम यह मान कर चलते है कि हमारी धरती पर ही बहुत से जीवों की अलग- अलग दुनिया है कुछ की खोज हो चुकी है कुछ की नहीं हो पायी है। उसी प्रकार पूरे ब्राह्मण में भी होगा। अब यहां जीवों के देखने के नज़रिये के आधार पर आयामों की खोज की गई। यहां खास बात यह है ठीक हमारे पेट में रहने वाले जीवों के समान ही हम कुछ जीवों की परिकल्पना ही नहीं कर सकते यानी हम उनके संसार को देखने के नजरिये को नहीं समझ सकते।

ठीक इसी प्रकार 11 आयामों के अलावा  इससे अधिक आयाम हो सकते है ये हम मानकर चलते है। हर एक आयाम में कोई न कोई जीव तो रहता ही होगा। इसी प्रकार हम हिन्दू धर्म में पाये जाने वाले कुछ जीवों के बारे में बात करने जा रहे हैं जो की वास्तविक दुनिया में हम नहीं देख सकते।

इनके प्रकार

मूंजा
महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र की लोक कथाओं के अनुसार जब किसी लड़के की मृत्यु उसके उप- नयन संस्कार होने को बाद लेकिन विवाह से पहले हो जाती हो तो उसे मूंजा कहते है। यह पीपल के पेड़ पर रहता है।

ब्रह्म राक्षस
जब किसी अत्यधिक ज्ञानी ब्राह्मण य विद्वान व्यक्ति की मृत्यु अहंकार लालच य अपने ज्ञान का दुरुपयोग करने के कारण होती है तो वह ब्रह्म राक्षस  बनता है।

चकवा
यह एक शरारती भूत होता है जो कि रात में अकेले यात्रा करने वाले यात्रियों को  रास्ता भटकाता है। इससे प्रभावित व्यक्ति एक ही जगह पर गोल-गोल घूमता रहता है। सुबह होने पर रास्ता दिखता है।

देवा चर
इन्हें कोंकण में शांत आत्मा य रक्षक आत्मा माना जाता है। यह अमूमन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते लेकिन परेशान करने पर इंसानों को डराते हैं य उनका काम बिगाड़ देते हैं।

हड़ल
यह उन महिलाओं की आत्मा मानी जाती है जिनकी मृत्यु प्रसव य गर्भावस्था के दौरान हो जाती है। लोककथाओं के अनुसार ये पीले रंग की साड़ी पहनती हैं और पेड़ों पर रहती हैं।

खबीस
  यह बेहद आक्रामक और क्रूर आत्मा मानी जाती है । जो अन्याय और क्रूरता से मरे हुए लोगों की होती है और बदला लेने के लिए भटकती है।

चुड़ैल
लोक मान्यताओं के अनुसार यह उन महिलाओं की आत्मा होती है जिनकी मृत्यु परिवार की अपेक्षा य प्रसव के दौरान कष्ट से होती है। कहानीयों में इनके पैर पीछे की तरफ उलटे होते है।

पिशाच
यह मांस खानी वाली और बहुत ही नकारात्मक ऊर्जा से भरी तामसिक आत्मा होती है जो श्मशान और अंधेरी जगहों पर रहती है।

प्रेत
वे आत्मा जो अकाल मृत्यु य आत्महत्या का शिकार होती है तथा जिनका अंतिम संस्कार ठीक से नहीं हो पाता वे शांति मिलने तक प्रेत योनि में भटकती रहती है।

इसी प्रकार मुस्लिम धर्म में जिन्न  इफ्रीत शैतान मारिद तथा गूल का जीकर किया गया है । इसी प्रकार ईसाई धर्म में इन्हें देवदूत डेमन ल्युसिफर शैतान और पाल्टरगीस्ट का जीक्र किया गया है जो कि घर की जीजों को फेंकती है और अजीव अवाज़े निकालती है।

इसी प्रकार बौद्ध धर्म में भूखे भूत का जिक्र है जिनका गला सूई की तरह पतला होता है मगर पेट बहुत बड़ा होता है। इनकी कहानी तिब्बती क्षेत्रों में बहुत प्रचलित होती है। ऐसे ही यहूदी धर्म में डिबुक और शेडिम का बारे में हमें जानने को मिलता है। वैसे विज्ञान में इसी प्रकार की बातों की कोई प्रमाणिकता नहीं है। 

लेकिन हो सकता है कि विज्ञान अभी तक वहां तक पहुंच ही नहीं पाया हो कि ऐसा क्यों होता है क्योंकि अगर इन्हें किसी ने देखा नहीं तो इनकी जानकारी कैसे लोगों को हुईं। उदाहरण के लिए एक समय था कि जब कृत्रीम बुद्दिमत्ता की खोज नहीं हुई थी तब इसके बारे में परिकल्पना कर पाना असंभव लगता था मगर अब ये  संभव है।
ऐसे ही एक लेख में हमने आप  को बताया था कि पानी की याददाश्त होती है इसका प्रमाण भी हमने दिया था तो संभव है इनके बारे में भी भविष्य में हमें कोई प्रमाण मिले। 

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