प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में हम सिल्क रोड के इतिहास इसके साथ ही नामकरण के पीछे के कारण तथा एक व्यापारिक मार्ग के रुप में इसके आर्थिक महत्व को समझेंगे। साथ ही हम इस रोड के य मार्ग के विच्छेदित होने के पीछे के प्रमुख कारणों को समझेंगे। इसके साथ ही हम इस रोड के चीन द्वारा पुनरुत्थान के कारण पर प्रकाश डालेंगे।
परिचय
सिल्क रोड वास्तविकता में यूरोप के अटलांटिक समुद्र तट से एशिया के प्रशांत तट को जोड़ने वाले व्यापारिक मार्गों का एक विशाल जाल था। यह मार्ग बेबी लोन कु्स तुंतुनिया समर कंद सहित अन्य महत्वपूर्ण शहरों से होकर गुजरता था। इस रोड ने यूरेशिया के अलावा अन्य छोरों के साथ चीनी वस्तुओं लोगों के विचारों धर्मों और यहां तक की यूरोप और एशिया तक की सभ्यताओं के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थानांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस रोड ने चीनी राजवंश जो की मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के खानाबदोश साम्राज्यों की श्रेणी में आते थे के साथ संचार और व्यापार को सरल बनाया। इन खानाबदोश जनजाति साम्राज्य में खज़र साम्राज्य का नाम मुख्य रुप से लिया जाता है। इसके अलावा हान साम्राज्य एवं तिब्बत का टुबो साम्राज्य का नाम भी आता है।
नामकरण
सिल्क रोड का नामकरण रेशमी वस्त्रों उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लाभ कमाने के कारण पड़ा है। इस सिल्क यानी रेशमी कपड़ों का अत्यधिक मात्रा में उत्पादन चीन के हान राजवंश द्वारा किया जाता था। 202 से 220 ईसा पूर्व के समय काल में ये राजवंश चीन से शासन करता था। इसके साथ ही इसका सम्बन्ध पार्थियन साम्राज्य चीनी शादी दूत झांग कियान के नाम से भी जोड़ा जाता है।
झांग कियान ने अपने अभियानों एवं प्रयासों के चलते चीन की महान दीवार के निर्माण और विस्तार का कार्य किया था। पार्थियन साम्राज्य ने ही सिल्क रोड के भू मध्य सागर से जोड़ने में एवं विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इतिहास
दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के समय काल में हान साम्राज्य के राजा जिनका नाम वू था ने अपने राजदूत झांग कियान को झिंजियांग यानी पश्चिमी क्षेत्रों का दौरा करने के लिए भेजा। यहीं से सिल्क रोड के निर्माण की प्रारम्भिक रुप रेखा तैयार हुई। झांग कियान झिंजियांग के साथ-साथ ही तियानशान कुनलुन पामीर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों से घिरे बेसीन के तटीय इलाकों से यात्रा करते हुए तकला मकान के रेगिस्तान को पार करके आगे तक गया।
उसने देखा की तारिम बेसिन से होकर व्यापारी पश्चिम की और लेवंत वर्तमान सिरिया जार्डन लेबनान और अनातेलिया ओर जाते है जहां व्यापार की वस्तुओं को भूध्य सागर की बंदरगाहों के जहाज़ों तक ले जाया जाता था ताकि वे यूरोप तक जा सकें। इस प्रकार सिल्क रोड का निर्माण भूमि पर लगभग 4000 मील से अधिक लंबा हो गया। जो की पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के बीच आर्थिक सांस्कृतिक राजनीतिक और धार्मिक लेन देन को सरल बनाने में अहम पहलू बन गया था।
खास बात यह भी है कि इस मार्ग की खोज उस समय काल में की गई थी जब महाद्वीप पर व्यापक राजनीतिक उथल- पुथल देखी जा रही थी जिसका मुख्य उदाहरण मंगोल विजय और काला मृत्यु जिसे हम प्लेग महामारी के नाम से भी जानते की प्रमुख घटना को मान सकते है। यहाँ खास बात यह भी है कि प्लेग महामारी इसी रोड के कारण एक देश से दूसरे देशों तक फैली थी।
अत्यधिक विस्तार होने के कारण यात्रियों को रास्ते में डाकुओं और खानाबदोश हमलावरों का डर हमेशा लगा रहता था जिस कारण से बहुत कम ही लोगों सिल्क रोड की पूरी यात्रा करते थे। वे व्यापार करने के लिए बीचोलियों का सहारा लेते थे।
पतन का मुख्य कारण
सर्वप्रथम पतन का कारण डाकुओं और डकैतों का रास्ते में मिलना था। इसके अलावा 1453 के समय काल से ही ओटोमन साम्राज्य ने अपने विरोधी साम्राज्यों के साथ जमीनी मार्गों पर अधिक नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा शुरु कर दी। जिन कारणों से प्रभावित होकर यूरोपीय राज्यों को मजबूर होकर अन्य व्यापारिक मार्गों की खोज करनी पड़ी। 21वीं सदी में अन्य व्यापारिक मार्गों की खोज के साथ ही नए सिल्क रोड का नाम सामने आया। इन मार्गों की सूची में चीनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव एवं यूरेशियन लैंड ब्रिज का नाम प्रमुख रुप से लिया जाता है।
जलवायु परिवर्तन
वर्ष 2023 के जून महीने में साइंस बुलेटेन नामक पत्रिका में प्रकाशित लेख में चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है की स्लिक रोड के पतन में कारण जलवायु परिवर्तन था। अध्ययन में बताया गया है कि मध्य एशिया के शुष्क क्षेत्रों में अनुकूल जलवायु यानी गर्म और नम वातावरण ने ट्रांस यूरेशियम मार्गों से यात्रा को आसान बनाया जिसे प्राचीन मानव समुदायों को आवाजाही में सरलता होने लगी।
सिल्क रोड चर्चा में क्यों है
वर्ष 2013 में चीन ने सिल्क रोड को दुबारा से प्रारम्भ करने के लिए वन बेल्ट वन रोड तथा बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव रणनीति की शुरुआत की। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देकर बहुआयामी रणनीति का विकास करना है। वर्ष 2014 में सिल्क रोड के चांगान-तियानशान गलियारे को यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया।
इसी श्रृंखला में वर्ष 2023 में जराफ़शान काराकुम गलियारे के विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है। इसके अलावा सिल्क रोड इकोनामिक बेल्ट जिसे हम BRI के नाम से भी जानते है का उद्देश्य युरेशिया के साथ सहयोग व्यापार संबंध और बुनियादी ढाँचे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रारम्भ किया गया है। वहीं भारत अफ्रीका यूरोप एवं दक्षिण पूर्व एशिया तथा हिंद महासागर के अगल-बगल के इलाकों से व्यापार करने के लिए मेरीटाइम सिल्क रोड परियोजना को प्रारम्भ किया गया है चीन के द्वारा।
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