प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में हम प्रथम विश्व की घटना के बारे में चर्चा करेंगे तथा ये समझने कि कोशिश करेंगे की मुख्य रुप से युद्ध के प्रारम्भ होने का कारण क्या था। इसके साथ ही युद्ध के दौरान यानी 1914 से लेकर 1918 तक कौन-कौन सी मुख्य घटनाएं हुईं। इसके साथ ही हम मित्र राष्ट्र संगठन तथा केंद्रीय शक्ति के रुप में जाने वाले देशों के बारे में समझने की कोशिश करेंगे। इतिहास के पन्नों में इसे दुनिया का सबसे बड़ा नरसंहार बताया गया है।
परिचय
प्रथम विश्व युद्ध 28 जुलाई को प्रारम्भ होकर 11 नवंबर 1918 यानी लगभग पांच सालों तक चला। इस युद्ध के दौरान लगभग 1.5 से लेकर 2.2 करोड़ लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इस आंकड़े में युद्ध के दौरान नरसंहार की घटनाओं में मरे लोगों की संख्या भी शामिल है। मरने वालों लोगों में उस समय काल के दौरान फैली स्पेनिश प्लू की महामारी का आंकड़ा भी शामिल है। प्रथम विश्व युद्ध के मुख्य कारणों में जर्मन साम्राज्य का उदय शामिल है। जिसने लंबे समय से चल रहे यूरोप में शक्ति संतुलन को बिगाड़ा दिया था। इसके साथ ही बल्कान का तनाव 20 जून 1914 को युद्ध को चरम पर ले गया।
इस घटना को दौरान आस्ट्रो हंगरी की राजगद्दी के उत्तराधिकारी फ्रांस फर्डिनंड की हत्या की गई। इस घटना का जिम्मेदार सर्बिया को ठहराया गया। अंत इस प्रकार युद्ध की घोषणा कर दी गई। दूसरी तरफ रुस ने सर्बीया की रक्षा के लिए सेना को एकत्रित किया। हंगरी की तरफ से जर्मनी ने अगस्त की शुरुआत में फ्रांस और रुस पर युद्ध की घोषणा कर दी। इसी क्रम में जर्मनी द्वारा बेल्जियम पर हमला करने के कारण यूनाइटेड किंगडम ने बेल्जियम की तरफ से और जर्मनी के खिलाफ युद्ध में शामिल हुआ।
भारतीय सैनिको का योगदान
1914 में जर्मनी की रणनीति थी कि फ्रांस को शीघ्रता से युद्ध में हराया जाए लेकिन सितंबर तक उनकी प्रगति धीमी पड़ गयी। दरअसल फ्रांस की सुरक्षा के लिए ब्रिटिश भारतीय सैनिकों ने इंग्लिश चैनल से लेकर स्विजरलैंड तक किलेबंद खाइयों को खोदकर निरंतर रेखा में बदलने में सफल रहे।
दूसरी तरफ पूर्वी मोर्चे पर अधिक हलचल होना प्रारम्भ हुई लेकिन भारी नुकसान के बावजूद कोई पक्ष निर्णायक बढ़त बनाने में असफल रहा। नवंबर आते-आते ओटोमन साम्राज्य केंद्रीय शक्तियों में शामिल हो गया। इधर जापान तथा इटली मित्र देशों के साथ युद्ध में शामिल हुए। इस गठबंधन की घटना से पहले की बात करें तो मित्र देशों को गैलीपोली की घटना में हार का सामना करना पड़ा था।
1917 जर्मनी अटलांटिक पनडुब्बी युद्ध
1917 में अप्रैल महीने में जर्मनी द्वारा अटलांटिक जहाजों के खिलाफ असीमित पनडु्ब्बी युद्ध फिर से शुरु हुआ। इस घटना के बाद अमेरिका देश मित्र देशों के साथ युद्ध में शामिल हुआ। कुछ समय बाद बोल्शेविकों ने अक्तूबर क्रांति को दौरान रुस की सत्ता पर अपना कब्जा कर लिया। इस घटना के परिणामों के चलते सोवियत रुस ने दिसंबर को महीने में केंद्रीय शक्तियों के साथ एक युद्ध विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते बाद मार्च 1918 में एक अलग शांति समझौता रुस द्वार केंद्रीय शक्तियों के साथ किया गया।
मार्च के ही महीने में जर्मनी ने एक स्प्रिंग आक्रमण प्रारम्भ किया जिसने प्रारंभिक सफलताओं के बावजूद जर्मन सेना को थका दिया। इस प्रकार अगस्त 1918 से मित्र देशों के साथ सौ दिवसीय आक्रमण में जर्मन सेना की हार सर्वप्रथम हुई।
मित्र देशों ने ओटोमन साम्राज्य और आस्ट्रिया और हंगरी के साथ युद्ध विराम संधि पर हस्ताक्षर कर दिए। जिससे जर्मन कमजोर पड़ गया जिसके बाद जर्मनी में ग्रह युद्ध प्रारम्भ हुआ जिसके चलते कैसर विल्हेम द्वितीय को 9 नवंबर 1918 को अपने पद से त्याग पत्र देना पड़ा। इसके आगामी कारणों के चलते 11 नवंबर 1918 को युद्ध समाप्त हो गया।
युद्ध को दौरान गुटों का विभाजन
प्रथम विश्व के दौरान सभी देश दो गुटों में विभाजित हुए पहला गुट मित्र देशों का था। जिसमें बिर्टेन फ्रांस रुस जापान इटली यूरोप अमेरिका और अन्य देश शामिल थे। दूसरा गुट केंद्रीय शक्तियों का था जिसमें मुख्य रुप से जर्मनी अस्ट्रीय हंगरी ओटोमन साम्राज्य जिसे हम तुर्की साम्राज्य के नाम से भी जानते है शामिल था। युद्ध की शुरुआत जर्मनी देश ने अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए प्रारम्भ की थी।
सैन्य शक्ति को बढ़ावा
युरोप देश में अपनी सेना और हथियारों को पढ़ाने की होड़ लगी हुई थी वही दूसरी तरफ जर्मनी तथा ब्रिटेन का बीच नौ सेना को लेकर मुकाबला बढ़ता गया।
युद्ध का मुख्य कारण
गुप्त संधिया
मित्र देशों ने एक दुसरे देश को सुरक्षा पहुंचाने के लिए एक-दूसरे से संधि कर रखी थी जो युद्ध का एक मुख्य कारण बनी। इसके अलावा युरोप देश दो बड़े गुटों में बट गया था। जिन्हें हम ट्रिपल एलांस तथा ट्रिपल इंटीनेट के नाम से जानते है। ट्रिपल एलांस में मुख्य रुप से अस्ट्रिया हंगरी और इटली शामिल थे। वहीं दूसरे ग्रुप में यानी ट्रिपल इंटीनेट में ब्रिटेन फ्रांस और रुस शामिल थे। इस कारण से जब दो छोटे-छोटे देश युद्ध में उतरे तो बाकी के देश अपने आप युद्ध में खिंचते चले गए।
साम्राज्य वाद
यूरोप देशों के बीच एशिया और अफ्रीका देशाों के नयें इलाकों पर कब्जा करने तथा संसाधनों पर कब्जा करने की होड़ लगी पड़ी थी। इस आर्थिक प्रतियोगिता ने इन देशों के बीच विरोध को ओर गहरा किया जो आगे चलकर युद्ध का एक कारण बना।
राष्ट्रवाद की भावना
अपने देश के प्रति ईमानदारी तथा दूसरे देशों के प्रति आक्रोश की भावना ने भी इस युद्ध को हवा दी। बलकान क्षेत्र में अलग-अलग जाति समूह में लोग अपनी आजादी चाहते थे जिसके कारण ये पूरा क्षेत्र बारूद का ढेर बन चुका था।
मौजूदा कारण
अस्ट्रीय हंगरी के राजकुमार फ्रांज फ्रे़डीनान्द की एक सर्बियन राष्ट्रवादी ने हत्या कर दी। जिसके कारण अस्ट्रीया ने सर्बीया को दोषी ठहराया और उसके खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया परिणामस्वरूप आपसी संधियों के कारण एक-एक देश युद्ध में शामिल होता गया।
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