प्रस्तावना
भारतीय संस्कृति में व्रत रखने का एक अलग ही धार्मिक महत्व है वैसे तो बहुत से लोग व्रत रखने को एक अंध विश्वास के नजर से देखते है, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते होंगे की ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ भी होता है , क्योंकि यह आयुर्वेद विज्ञान से जुड़ा हुआ है । हम इस बात का दावा नहीं करते बल्कि जापानी वैज्ञानिक जोशि नूरी आस्मी का मानना है। इस शोध के लिए उन्हें वर्ष 2016 में मेडिसिन विज्ञान के नोबल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। इस लेख के माध्य से हम यह जानने कि कोशिश करेंगे कि व्रत के दौरान हमारे शरीर में क्या अभिक्रिया होती है और कैसे यह हमारे लिए लाभकारी है । इसके साथ ही हम इस विषय पर भी चर्चा करेंगे के व्रत को दौरान हमें किन-किन सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए।.
व्रत
व्रत क्या है इसका शाब्दिक अर्थ समझें तो हमें पता चलता है कि यह संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है संकल्प य प्रतिज्ञा लेना। जिसमें व्यक्ति किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए भोजन व अन्य सुख-सुविधाओं का त्याग करता है। दुनिया की अलग -अलग भाषाओं में इसे अलग-2 नामों से जाना जाता है। ग्रिक भाषा में इसे आटोफेजी कहते है जिसका अर्थ है खुद को ही खाना। दरअसल व्रत के दौरान हमारा शरीर इसी प्रक्रिया को दुहराता है। व्रत के दौरान हमारा शरीर फैट को कम करने के साथ-साथ नए इम्यून सिस्टम को भी बनाता है जिससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। वर्तमान समय में हम देखते है कि हर प्रकार के भोजन में मिलावट होने लगी है इसके साथ ही अनिद्रा, मधुमेह, तनाव जैसी बीमारियों से प्रत्येक सातवां व्यक्ति ग्रसित है और इन सभी बीमारियों से भी छुटकारा पाने के लिए हम रासायनिक दवा का इस्तेमाल करते है जिनको अधिक मात्रा में लेने से हम किसी अन्य बीमारी का शिकार हो जाते है । तब हमें एक अच्छा डाक्टर भी यही सलाह देता है कि सुबह व्यायाम करिये , हफ्ते में एक बार व्रत रखिये , मिलावटी समान से परहेज करें । दुःख कि बात दोस्तों यहां यह है कि तब तक बहुत देर हो चुकी होती है क्योंकि हमारा शरीर तब तक बीमारियों कि गिरफ्त में आ चुका होता है।
उपाय
अब जबकि हम पहले से ही जानते है कि प्रत्येक समान में मिलावट हो रही है तो क्यों न हम भी अपने शरीर को उसी प्रकार ढाल ले ताकि हमारा शरीर इनसे होने वाले नुकसान य हानि को आसानी से सह सके और हम बड़ी शारीरिक हानि से बच सके।. दोस्तों व्रत रखना एक अच्छी आदत हो सकती है क्योंकि यह प्रण लेने या खुद से वादा करने जैसा ही है । क्योंकि यह हमारे किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के इरादे य आत्मविश्वास को मजबूती प्रदान करता है । कुछ लोगों का दवा तो यह भी है कि व्रत(fasting) कैंसर जैसी घातक बीमारियों को भी ठीक कर सकता है। हलांकि यह मिथक है जिसे हम नहीं मानते। मगर हम इस बात को भी नहीं झुठलाते है कि व्रत रखने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है सो इस प्रकार कुछ हद तक लाभ तो होता है, शरीर पहले से ज्यादा स्वस्थ लगने लगता है मगर कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने के लिए डाक्टर कि देख रेख में दवा लेना आवश्यक है।.
उपवास के दौरान शरीर में होनी वाली आन्तरीक अभिक्रिया
उपवास य व्रत के दौरान जब हम कुछ नहीं खाते है तो हमारा शरीर को बाहर से ऊर्जा नहीं मिलनी बंद हो जाती है । जिसके कारण शरीर ऊर्जा के लिए अंदर जमें हुए कचरे य वेस्ट पर निर्भर रहता है। अतः शरीर अपने द्वारा जमा किए गये वेस्ट तो ई़धन की तरह इस्तेमाल करता है य उसी को खाने लगता है।. दुसरी भाषा में जब हम खाना बंद करते है तब हमारा शरीर में एक रासायनिक अभीक्रिया होती है दरअसल अमतौर पर जब हम खाना खाते है तो उसमें से ग्लूकोज खतम हो जाता है तब शरीर हमारे शरीर में जमें फैट को बर्न करना शुरु करता है । अतः इस प्रक्रिया के दौरान हमारे शरीर में किटोंस का निर्माण होता है। ये किटोंस हमारे शरीर के लिए सुपर फुड का काम करता है।
उदाहरण के लिए समझें ग्लूकोज को पेट्रोल समझें और किटोंस को हाइड्रोजन समझें। अब अगर अपकों अन्तर पता होना चाहिए कि एक लीटर पेट्रोल 28 किलोमीटर की माइलेज देता है वहीं हाइड्रोजन एक लीटर में 1000 किलो मीटर कि माइलेज देता है । मशहुर वैज्ञानिक जोशी नूरी आस्मी ने फास्टींग को कयी अलग-अलग स्टेज में विभाजित करते हुए 5 दिनों में विभाजित किया है।
1 पहले दिन में शरीर लीवर औऱ मांसपेशीयों में जमें ग्लाइकोजन का इस्तेमाल करता है खास बात यह कि ग्लाइकोजन के हमारे शरीर के हर छोटे कण के साथ स्टोर होता है। जिसके कारण हमें व्रत के दौरान ज्यादा प्यास लगती है। इसी कारण से प्रारम्भ में हमारा वज़न तेजी से घटता है इसके अलावा फास्टींग के दौरान इंसुलिन का स्तर भी बहुत तेजी से नीचे गिरता है। इसके बाद शरीर अपने अंदर जमी वसा का इस्तेमाल ईधन के रुप में करना प्रारम्भ करता है ।
2. दुसरे दिन हमारा शरीर डीप किटोसिस में चली जाती है यानी गहरी सफाई अभियान प्रारम्भ होता है । इस दौरान हमारे मस्तिष्क में ब्रेन डेराईव़़ड न्यूरो्ट्रॅफिक फैक्टर का लेवल भी बढ़ता है। यह एक ऐसा प्रोटीन माना जाता है जो नये न्यूरान्स को बनाने में मदद करता है। इसकी खास बात यह है कि इस समय के दौरान लोग मेटल क्लेरिटी और खुद को फोक्स महसूस कर सकते है। क्योंकि यह हमारी याददाशत को मजबूत बनाता है।
3. तीसरे दिन मांसपेशीयों का सिकुडना प्रारम्भ होता है खास बात यह है कि हमारा शरीर मांसपेशीयों को ऊर्जा के लिए जलाना प्रारम्भ करता है मगर इससे नई तथा मजबूत मांसपेशीयों का विकास भी होता है। यह हार्मोन हमारी मांसपेशीयों के टिशुस व अणुओं को टूटने से भी बचाता है।
4. चौथे दिन के दौरान हमारे शरीर कि पहली प्रथमिकता जमें हुए फैट और सेल्युलर जंक को साफ करने की होती है।
5.पांचवे दिन हमारा शरीर फैट बर्निंग मशीन बन जाता है तब हमें भूख भी कम लगती है क्योंकि शरीर में जमें फैट से ही ऊर्जा बनाने लगता है। इस समय को दौरान हमारे शरीर में लम्बी उम्र से जूड़े जिन्स भी सक्रिय हो जाते है।
व्रत कि समाप्ति य प्रारम्भ से पहले इन बातों का ध्यान रखें
1.अगर आप हाल ही में किसी बड़ी बिमारी से ठिक हुए है या किसी प्रकार के आपरेशन य सर्जरी से गुजरे हो तो उसके तीन महीनों तक आपको व्रत नहीं रखना चाहिए इसके अलावा व्रत डाक्टर कि सलाह अनुसार ही रखें यह बहुत आवश्यक है।
2. किसी बात कि चिंता लेकर व्रत न रखे इससे लाभ की अपेक्षा हानि हो सकती है व्रत के दौरान मन शांत रखें।
3.व्रत के बाद जब हम भोजन लेना से प्रारम्भ करते है तो यह बहुत ही खास समय होता है इस समय विटामिन और कैल्शीयम युक्त पौषटीक भोजन ही लेना चाहिए। क्योंकि अगर हन ऐसा नहीं करते तो व्रत रखने का कोई फायदा नहीं होने वाला । दरअसल शरीर व्रत के दौरान हमारी पुरानी कोशीकाओं को तोड़ देता है और नई मजबूत कोशिकाओं का निर्माण होता है ऐसे में अगर हम फिर से अपने शरीर में कचरा डालेंगे तो नई कोशिका स्वस्थ होंगी इसकी कोई गरेंटी नहीं है। भोजन में उबले अण्डे ,दुध ,फल ,हरी सब्जियों का सेवन करें चिनी तथा रिफाइन से बनी चिज़ों से परहेज करें ।.
4. व्रत हर कोई नहीं रख सकता जैसे कि गर्भवती महिलाएं ,मधुमेह के रोगी ,किसी भी बीमारी से पि़ड़ित व्यक्ति य जिसे खाने कि समस्या हो या जो पूरा भोजन नहीं लेते य फिर जिनका वजन कम हो, य फिर लम्बाई के हिसाब से बजन सही न हो।.
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