9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past: विक्रम संवत

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गुरुवार, 21 मई 2026

विक्रम संवत

vikram samvat calender

प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम विक्रम संवत के इतिहास तथा वर्तमान समय में इसके महत्व के बारे में चर्चा करेंगे। यह भारतीय काल गणना का गौरवशाली प्रतीक है। प्रस्तुत लेख में हम विक्रम संवत के साथ ही शक संवत तथा नवीनतम अंग्रेजी कैलंडर के बारे में चर्चा करेंगे। इसके साथ ही हम देखेंगे की आज भी विक्रम संवत क्यों अंग्रेजी कैलंडर से ज्यादा महत्व रखता है।

इतिहास

भारत की प्राचीन  संस्कृति और सभ्यता विश्व की सबसे समृद्ध और वैज्ञानिक संस्कृतियों में से एक है। हमारी इस समृद्ध विरासत का एक अमूल्य हिस्सा है हमारी काल-गणना यानी कलेक्टर प्रणाली । भारत में प्रचलित विभिन्न कैलंडरों में विक्रम संवत का स्थान सर्वोपरि है। यह केवल तिथियों और  महीनों के बदलने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी गौरवशाली परंपरा, खगोलीय विज्ञान और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है।

विक्रम संवत की शुरुआत ईसा पूर्व 57 बी सी में हुई थी पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी प्रजा को विदेशी आक्रमणकारियों शकों से मुक्ति दिलाई थी। इस विजय के उपलक्ष्य में और अपनी प्रजा को कर्ज मुक्त करने के उद्देश्य से उन्होंने एक नए संवत की शुरुआत की, जिसे विक्रम संवत कहा जाता है। सम्राट विक्रमादित्य अपने अदम्य साहस और जन कल्याण तथा न्याय प्रियता के लिए जाने जाते थे। 

उनके  द्वारा शुरु किया गया यह विक्रम संवत आज भी भारतीय जन मानस के दिलों में बसा हुआ है।वर्तमान के ग्रेगोरियन कैलंडर से इसकी तुलना करें तो विक्रम संवत उससे 57 वर्ष आगे चलता है। यानी वर्तमान समय में अगर 2026 चल रहा है तो विक्रम संवत में 2026+57 2083 होगा।

वैज्ञानिक एवं खगोलीय आधार

विक्रम संवत पूरी तरह से वैज्ञानिक और खगोलीय गणना  पर आधारित है। जहां अंग्रेजी कैलंडर केवल सूर्य की गति पर आधारित होता है जिसका अनुमान सो वर्षों का होता है। वहीं विक्रम संवत लूनि सोलर यानी चंद्र सौर प्रणाली पर आधारित होता है। यानी इसमें चन्द्र और सूर्य दोनों की गतियों का सटीक समन्वय होता है।

वर्ष और महीने 

अंग्रेजी महीने के समान ही इसमें भी 12 महीने होते है बस नाम अलग होता है। जैसे चैत्र वैशाख ज्येष्ठ आषाढ़ श्रावण भाद्रपद जिसे भादों भी कहते है इसी के साथ अश्विन कार्तिक मार्गशीर्ष पौष माघ और अन्त में भादों आता है। यहां हम अंग्रेजी महीने का विक्रम संवत में क्या नाम उसके बारे में बताते चलते है। विक्रम संवत में महीने अंग्रेजी महीने के कैलंडर के मध्य से शुरु होता और अगले महीने के मध्य के मध्य के दिनों में समाप्त होता है। बताते चले कि विक्रम संवत कि शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तारीख से होती है।

पक्ष

प्रत्येक महीने को दो पक्षों में बांटा गया है कृष्ण पक्ष यानी अंधेरी रातें तथा शुक्ल पक्ष यानी चांदनी रातें होती है।

अधि मास

इसे हम मलमास के नाम से भी जानते है इसका महत्व देखे तो हमें मालूम है कि हर तीसरा वर्ष एक लीप वर्ष होता है जिसके कारण अग्रेंज़ी महीने में फरवरी 28 की जगह 29 दिनों की हो जाती है मगर विक्रम संवत में एक अलग से महीना जी जोड़ दिया जाता है। जिसे हम पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जानते है। प्रक्रिया दर्शाती है की हमारे प्राचीन खगोल शास्त्री कितने उन्नत थे। इससे ऋतुओं का चक्र कभी बिगड़ता ही नहीं है।

सांस्कृतिक और अध्यात्मिक महत्व

 पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरु की थी। इसी दिन से चैत्र नव रात्रि का प्रारम्भ होता है जिसमें मां शक्ति की उपासना की जाती है। वसंत ऋतु- यह वह समय होता है जब प्रकृति पुरानी पत्तियों छोड़कर नए पत्तों और फूलों से सजती है। खेतों में फसलें लहलहातीं हैं जो किसानों कि मेहनत ओर खुशहाली का प्रतीक होती है। इसके साथ ही भारत के लगभग सभी त्यौहार जैसे दशहरा दीवाली होली रक्षाबंधन और करवा चौथ विक्रम संवत की तिथियों के अनुसार ही तय किए जाते है।

वर्तमान समय में इस कैलंडर को द्वितीय कैलंडर के रुप में लिया जाता है क्योंकि सरकारी कार्यों में अंग्रेजी कैलंडर का ही प्रयोग किया जाता है। लेकिन एक देश ऐसा भी है जो इस कैलंडर को अधिकारिक राष्ट्रीय कैलंडर के रुप में इस्तेमाल करता है। हम नेपाल देश का सम्मान करते है जिन्होंने हमारी परम्परा का जीवित रखा है। बताते चले कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भी विक्रम संवत का उल्लेख किया गया है।

दर्शकों से अनुरोध है कि आप इस लेख को भले ही ज्यादा लोगों में साझा न करें मगर इस लेख से सम्बन्धित अन्य कोई जानकारी आपको अगर है तो जरूर से साझा करें। क्योंकि मैं भी अभी सिख ही रहा हूं।

शक संवत

यह एक भारतीय राष्ट्रीय कैलंडर है जिसे भारत ने 22 मार्च 1957 में यानि 1 चैत्र 1879 को आधिकारिक रुप से अपनायता गया था। यह कैलेंडर भी विक्रम संवत कि तरह ही चैत्र महीने से प्रारम्भ होता है। इस कैलंडर में भी महीनों के नाम विक्रम संवत के समान ही होते है बस अन्तर इतना है कि इस कैलेंडर में सभी महीने अंग्रेजी कैलंडर के साथ मेल खाते है बस लीप वर्ष में जाकर एक  दिन का अतंर आता है।

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