Indian History reveal the Past

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2026-09-20

रानी वेलू नाचियार

digital painting of rani velu nachiyar

प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में भारत की महान रानी वेलू नाचियार की वीरगाथा के इतिहास पर प्रकाश डाला गया है। रानी वेली नाचियार शिव गंगा रियासत की रानी थी वे भारत में ईस्ट इंडिया के साथ युद्ध छेड़न वाली पहली भारतीय महिला रानी थीं। उन्हें वीर मंगई की उपाधि से भी जाना जाता है जिसका मतलब है बहादुर महिला की उपाधि से भी जाना जाता है।

जीवन परिचय

रानी का जन्म 3 जनवरी क1730 में रामा नाथ पुरम की राजकुमारी और राम नाथ राज्य के राजा चेन्नमुथु विजय रागनाथ सेतुपति और रानी सकंधि मुथल की इकलौती संतान थी। राजकुमारी नाचियार को युद्ध कला की कई विधियों में प्रशिक्षित किया गया था। इनमें युद्ध के हथियारों का उपयोग वलारी सिसंबन कलरिपट्टू जैसी मार्शल आर्ट और घुड़सवारी और तीरंदाजी में बचपन से ही निपुण बनाया गया था।

इसके साथ ही वे कई भाषाओं की अच्छी जानकार थी जैसे फ्रेंच अंग्रेजी और उर्दू जैसी भाषाओं में निपुण थीं। 1746 में उनका विवाह मुथु वदुगनाथ पेरयावुदया थेवर से विवाह कराया गया। विवाह के बाद राजकुमारी ने राजकुमार के करीबी सलाहकार मार्गदर्शक और विश्वासपात्र के रुप में कार्य किया। 1772 ई. को उनके पति मुथु वादुगनाथ पेरियावदुया थेवर की मौत कलैयार कोविल से 12 किलोमीटर दूर मरावर मंगलम में हुए युद्ध के दौरान हो गई। इस युद्ध के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों के अचानक हमले के कारण उनकी मृत्यु हुई।

परिणास्वरुप रानी को अपनी इकलौती बेटी के साथ भागना  हैदर अली के यहां शरण लेनी पड़ी। दिंडी गुल एक सीमावर्ती राज्य था जिसका शासक हैदर अली था। हैदर अली के यहां शरण लेने पर उनके लिए  विरुपाची किले रहने की व्यवस्था की गई। 8 वर्षों के समय काल के बाद नट्टू अंबलरों कमांडरों मरुधु बंधुओं और थंडावरयन पिल्लई के समर्थन से इसके साथ ही उन्हें टीपू सुल्तान का समर्थन भी प्राप्त था अतः इस सभी का समर्थन मिलने के बाद रानी साहिबा ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।

1780 में रानी वेलू नाचियार ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़े युद्ध में सफलता हासिल की अपने राज्य को पुनः हासिल किया। इसके साथ ही उन्होंने दस वर्षों तक शासन किया तथा 1796 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी बेटी वेल्लाची ने उनके शासन का कार्य भार संभाला। रानी साहिबा ने राज्य के प्रशासन में सहायता के लिए मरुदु भाइयों तथा अपनी बेटी की शक्तियां प्रदान की।

जीवन संघर्ष

रानी साहिबा का जीवन संघर्ष 16 वर्ष की उम्र से प्रारम्भ हो गया था जब उनकी शादी राजा मुथु वदुगनाथ पेरियाउदैया थेवर के साथ हुई थी। रानी बनने के बाद से ही रानी साहिबा में ने राजा के राजनीतिक कार्यों में उनका हाथ बढ़ना प्रारम्भ कर दिया था। 1717 से 1795 तक के समय काल में ही कर्नाटक के क्षेत्रीय शासक अरकोट के नवाब ने कई अन्य दक्षिणी राजवंशो पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया और अंग्रेजों के साथ हाथ मिला लिया था।

जिसके चलते इन लोगों ने मिलकर शिव गंगा पर कर लगाना प्रारम्भ किया साथ  ही कर वसूली के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों को शिव गंगा भेजा गया। हालांकि राजा ने कर देने से मना कर दिया। जिसके चलते शिव गंगा पर अंग्रेजों को आक्रमण करने का बहाना मिल गया। अचानक हुए हमले में राजा की जान चली गई। तब रानी ने दुःख में डूबने की बजाय अपनी बेटी की रक्षा के लिए हिम्मत से काम लिया।

हैदर अली को पत्र

अरकोट का नवाब रामनाथ पुरम और  शिवगंगा दोनों राज्यों पर लुटपाट कर रहा था और लोगों पर अत्याचार कर रहा था। अपने राजा के मरने के बाद रानी साहिबा ने जंगलों में कल्लर नेताओं के साथ शरण ली और विद्रोह जारी रखा। दिंडी गुल के शासक हैदर अली को पत्र लिख कर मदद  मांगी बिना इस बात की प्रवाह करें कही वे उन्हें धोखा न दे। रानी साहिबा में अपने संदेश में लिखा जो कोई भी मेरी मदद कर  सकता है अवश्य करें बदले में उसे बेहतर उपलब्धियां हासिल हो सकती है। 

हम द्वारा भेजी गई सेना से हम मदुरै में भी सेना भेजकर पूरे देश में जवाबी कार्यवाही कर सकेंगे। हमें पालीगार का समर्थन पहले ही  मिल गया है। संदेश के जवाब में हैदर अली ने कहा आपके पास अगर पांच हजार घुड़सवार है तो मैं पांच हजार सैनिक भेजने को तैयार हूं जिनका भत्ता वहन मैं कर सकूँगा और दोनों रियासतों को पुनः हासिल करने में आपकी मदद करूंगा।

महिला सेना उदैयाल

दूसरी तरफ रानी साहिबा ने अपनी युद्ध की रणनीतियों को अंजाम देते हुए उदैयाल महिला सेना का गठन किया। दूसरी तरफ 1780 में हैदर अली ने 80,000 सैनिकों के साथ अरकोट के नवाब पर पूर्वी तटीय क्षेत्रों की तरफ से हमला कर दिया। नवाब के ब्रिटिश सेना तथा अरकोट के नवाब से युद्ध दौरान रानी वेसू नाचियार ने भी हमले का सही अवसर पा कर रानी की सेना शिवगंगा की और अग्रसर हुई। 

शिव गंगा की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के कारण रानी साहिबा ने एक चतुर योजना बनाई। योजना के अनुसार उनकी उदैयाल महिला सेना विजय दशमी के ठीक पहले वहां पहुंच गई। विजय दशमी वाले दिन शिव गंगा की महिलाएं महल के पास स्थित राजा राजेश्वरी के मंदिर में इकट्ठा होती है। इस प्रकार रानी साहिबा की सेना महल में घुसने में सफल रही और अंदर घुसकर पहला हमला उदैयाल सेना ने ही किया था।

महल में युद्ध के  दौरान उदैयास सेना के हथियार अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों का मुकाबला नहीं कर पा रहे थे तब सेना की कमांडर इन चीफ कुयिली ने लड़ते हुए गोला बारुद कक्ष के पास पहुंचकर खुद को तेल से भिगोकर पूरा गोला बारुद भंडार उड़ा डाला। कमांडर कुयिली के  बलिदान ने रानी वेलू नाचियार को शिव गंगा को जितने तथा अंग्रेज़ों को हराने में मदद की। इस प्रकार महिला कमांडर ने अपने प्राणों की आहुति दे कर अपनी मातृभूमि की रक्षा की।

जब आर्कोट के नवाब को रानी साहिबा और हैदर अली के गठबंधन का पता चला तो उसने भी रानी साहिबा के साथ समझौता कर लिया। इस प्रकार 1780 में उन्हें शिव गंगा की रानी का ताज पहनाया गया।

भारत सरकार द्वारा सम्मान

31 दिसंबर 2008 को उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया गया। 
इसके साथ ही तमिल तथा अमेरिकी हिप-हाप गायक ने 2016 में अपने तमिलमैटिक एल्बम के  एक हिस्से के रुप में वेलू नाचियार को समर्पित हमारी रानी नामक एक गीत जारी किया।
21 अगस्त 2017 को चेन्नई के नारधा गान सभा में रानी वेलू नाचियार के जीवन इतिहास को दर्शाने वाले एक भव्य नृत्य प्रदर्शन का आयोजन किया गया। खास बात यह है कि इस नाटक का निर्देशन श्री राम शर्मा जी ने किया जिन्होंने रानी साहिबा के जीवन इतिहास पर लगभग एक दशक तक रिसर्च की थी।

निष्कर्ष

  1. संक्षिप्त में हम कहे तो रानी वेलू नाचियार सिर्फ सिर्फ तमिलनाडु की ही नहीं बल्कि पूरे भारत की पहली महिला शासीका थीं जिन्होंने सदियों पहले ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया था।
  2. वे साहस और कूटनीति की प्रतीक थीं उनका जीवन यह दर्शाता है कि उन्होंने रानी होने के धर्म के साथ-साथ एक योद्धा,कूटनीति और जन नायिका का किरदार भी बखूबी निभाया।
  3. उनका इतिहास आज की पीढि विशेष कर महिलाओं के लिए साहस आत्मविश्वास और देश प्रेम की अनमोल विरासत है।

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