प्रस्तावना
प्रस्तुत लेख में हम होम रुल आंदोलन के बारे में चर्चा करेंगे जिसे हम स्वदेशी आंदोलन के नाम से भी जानते है। मुख्य रुप से यह आंदोलन मात्र दो वर्ष ही चल पाया मगर आज़ादी की लड़ाई में इसकी अहम भूमिका निभाई । इसके साथ ही आंदोलन के मुख्य पात्रों एवं प्रमुख घटनाओं के बारे में चर्चा करेंगे।
स्वदेशी आंदोलन की घटना
इस आंदोलन का मुख्य लक्ष्य भारतीय शासन व्यवस्था को स्थापित करना था। यह वह समय था जब प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति हुई थी। इस आंदोलन को देश के पढ़े लिखे लोगों द्वारा चलाया गया था जिस कारण से उस समय काल का युवा वर्ग इसमें बढ़ चढ़कर भाग ले रहा था। बताते चले कि इस आंदोलन के संचालन कर्ता के रुप में मुख्य भूमिका ऐनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक की थी। स्वदेशी आंदोलन के प्रभाव में आकर कुछ समय के लिए उदार वादी,चरमपंथी और मुस्लिम लीग के नेता एकजुट हो गये थे।
1917 में यह घोषणा की गई की सरकार में अधिक से अधिक भारतीयों के होने की संभावना सुनिश्चित की जा सके ताकि स्वशासी संस्थाओं का विकास हो सके और भारत में एक जिम्मेदार सरकार का निर्माण हो सके। अगस्त घोषणा के नाम से देश में यह घोषणा की गई कि अब से स्वदेशी शासन की मांग को राजद्रोह नहीं माना जायेगा। इस आंदोलन के मुख्य लक्ष्य ही यही था कि ब्रिटिश सरकार में भारतीयों की उपलब्धि स्थापित की जा सके।
लेकिन इस आंदोलन में पिछड़ा वर्ग एवं छोटी जाती वर्ग के लोगों की भागीदारी बहुत कम थी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि अंग्रेजों का शासन समाप्त होने के बाद वे एक बार फिर से ब्राह्मण एवं उच्च जाति वर्ग के गुलाम हो जायेंगे।.
आंदोलन के मुख्य उद्देश्य
1.भारत में सुशासन लागू करना।
2.राजनीतिक शिक्षा और चर्चा को बढ़ावा देना।
3.सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ बोलने के लिए भारतीयों में आत्मविश्वास की भावना को जाग्रत करना।
4.ब्रिटीश सरकार में भारतीयों की उपलब्धि स्थापित करना।
5.कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों के बनाएं रखते हुए भारत में राजनीतिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करना आदि।
आंदोलन के समाप्त होने के मुख्य कारण
- 1.सुशासन आंदोलन की बढ़ती हुई मांग और आक्रोश को देखते हुए जून 1917 में ऐनी बेसेंट को गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके चलते देश भर में विरोध प्रदर्शन किए गये । नरम दल और गरम दल के नेता एकजुट हो कर सड़कों पर उतरे आंदोलन कर्ताओं की संख्या बढ़ कर लगभग 40000 हो गयी। इसी बीच बाल गंगाधर को भी प्रतिबंधित किया गया। जिसके चलते आंदोलन अपने मुख्य नेताओं के अभाव में कमजोर होता चला गया।
- 2. सरकार ने आंदोलन कर्ताओं पर भी अंकुश लगाने के लिए भारत रक्षा अधिनियम 1915 का इस्तेमाल किया।
- 3. छात्रों को ग्रह शासन की बैठकों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया।
- 4.बाल गंगाधर तिलक पर मुकदमा चलाया गया और इसके साथ ही पंजाब और दिल्ली प्रवेश आने पर उन्हें प्रतिबंधित किया गया। इस बीच बाल गंगाधर तिलक ब्रिटिश पत्रकार इग्नेशियस वैलेंटाइन चिरौल पर मान हानि का मुकदमा दर्ज करने के लिए इग्लैंड गये थे। दरअसल इस पत्रकार ने इंडियन अनरेस्ट नामक एक किताब लिखी थी जिसमें इसने बाल गंगाधर तिलक को अपमानजनक बातें लिखी थी साथ ही उन्हें भारतीय अशांति का जनक कहा गया था।
- 5.1910 में भारतीय प्रेस अधिनियम लाया गया था जिसके तहत सरकार विरोधी लेख, पत्रिका एवं खबर पर रोक थी जिसके कारण जनता तक आंदोलन की गतिविधियों में शामिल होने में समय लगता था अतः आंदोलन पर इस अधिनियम का भी गहरा असर हुआ।
- 6. बाल गंगाधर तिलक कि अनुपस्थिति और ऐनी बेसेंट के गिरफ्तार होने के कारण आंदोलन नेतृत्व विहीन हो गया में आंदोलन और भी कमजोर होता गया। आगे चलकर होरुल आंदोलन का विलय कांग्रेस पार्टी में हो गया। कांग्रेस पार्टी भी आगे चलकर दो भागों में विभाजित हो गयी।
- यद्यपि यह आंदोलन असफल रहा मगर स्वतंत्रता आंदोलन में इसने अपनी एक अहम भूमिका निभाई जिसका प्रमाण हमें 1916 में हुए लखनऊ समझौते में देखने को मिलता है। इस प्रकार यह आंदोलन 1916 से लेकर 1918 तक ही चल पाया।.
सोर्स
विकीपिडीया, insightsonindia.com byjus.com vajiramandravi.com brirannica.org unacademy.com

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