9b45ec62875741f6af1713a0dcce3009 Indian History: reveal the Past: kheda satyagraha

यह ब्लॉग खोजें

लेबल

in

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

kheda satyagraha

kheda satyagraha

प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम खेड़ा सत्याग्रह के बारे में चर्चा करेंगे इसके साथ ही उस समय काल कि मुख्य घटना तथा सरकार की गतिविधियों तथा आंदोलन के असफल होने के मुख्य कारणों पर चर्चा  करेंगे।

खेड़ा सत्याग्रह के मुख्य पात्र

खेड़ा सत्या ग्रह के मुख्य पात्रों की सूची में महात्मा गांधी जी का नाम सर्वप्रथम पहले आता है क्योंकि चम्पा रण सत्याग्रह के बाद गांधी जी भारतीय जनता का एक महत्वपूर्ण चेहरा बन गये थे। क्षेत्रीय नेताओं की सूची में मोहन लाल पांडेय ,शंकर लाल पारिख , नर हरि पारिख ,रवि शंकर व्यास , सरदार बल्लभाई पटेल तथा समस्त किसान वर्ग और क्षेत्रीय नेताओं नाम आता है।

सत्याग्रह के मुख्य कारण

1.देश में अकाल का पड़ना
1918 के समय देश में अकाल पड़ा जिसमें सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की सहायता नहीं प्रदान की गयी । जबकि अकाल कानून के तहत किसानों के पूर्ण छूट प्रदान करने का प्रावधान था। बताते चलें कि इस प्रावधान के चलते यदि किसी क्षेत्र में औसतन पैदावार 25 प्रति शत से कम होती है तो किसानों को पूर्ण छूट का प्रावधान था।
2.भीषण प्लेग बीमारी
देश में भीषण  प्लेग बीमारी के चलते देश के गुजरात राज्य में ही लगभग 16,740 लोगों की मौतें हुई और बचे लोग अकाल के कारण मरने लगे क्योंकि सरकार की तरफ से न तो कोई राहत शिविर लगाया गया और न ही किसी अन्य प्रकार की सहायता प्रदान की।
3.करों में 23 प्रति शत की वृद्धि
देश में अकाल के चलते किसान दाने-दाने को तरस रहे थे दूसरी तरफ सरकार ने किसानों की मदद पहुंचाने की अपेक्षा किसान कर 23 प्रति शत की वृद्धि कर दी। इस प्रकार कर भी विरोध का मुख्य कारण बना।
4.बुनियादी वस्तुओं की मूल्य दर को बढ़ाना
1918 के समय काल प्रथम विश्व युद्ध के चलते वस्तुओं का आयात- निर्यात कम हो रहा था जिसके चलते सरकार को बुनियादी वस्तुओं कि कीमत बढ़ा दी जो कि आक्रोश एक ओर कारण बना।.
5.किसानों की सिफारिशों के नजरंदाज करना
ब्रिटिश सरकार चाहती तो किसानों को कुछ हद तक राहत तो प्रदान कर ही सकती थी मगर किसानों कि गुहार को नजरंदाज किया गया और उन्हें पूर्ण कर चुकाने के लिए  मजबूर करने के प्रयासों ने किसानों में आक्रोश भर दिया।

आंदोलन के द्वारा किए गये कार्य

1918 में कर में रियायत की याचिका अस्वीकार किए जाने पर स्थानीय नेता मोहन लाल पांड़या और शंकर लाल पारिख ने मिलकर राजस्व निषेध अभियान की पहल की तथा अहमदाबाद में गुजरात सभा के सदस्यों से सहयोग की मांग की । गांधी जी को टेलीग्राम भेजा गया क्योंकि उस समय गांधी जी ही गुजरात सभा के अध्यक्ष थे। मगर चंपा रण आंदोलन के चलते गुजरात से बाहर थे।

राजस्व निषेध अभियान

इस अभियान के चलते गुजरात सभा के सहयोग से किसानों ने राजस्व कर में रियायत न मिलने पर पूर्ण रुप से कर न चुकाने की शपथ किसानों ने ली । सरकार द्वारा कर जमा करने के लिए दबाव बनाया जाने लगा। इस बीच गांधी जी चंपा रण से गुजरात पहुंचे खेड़ा क्षेत्र के ग्राम समाज के लोगों से मिले ,गांधी जी को भी किसानों के राजस्व कर को निलंबित करने की मांग सही लगी। मगर सरकार द्वारा किसानों की मांग  पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी। अतः 22 मार्च 1918 को नाड़ियाड में हुई एक बैठक में गांधी जी ने स्वयं सेवकों से एक प्रतिज्ञा लेने के लिए आग्रह किया कि चाहे पूरा हो य आंशिक वे इस वर्ष का कर नहीं देंगे।

सत्याग्रह का परिणाम

किसानों के बढ़ते आक्रोश को देखकर सरकार द्वारा जांच बिठाई गई और किसानों को सही पाया । अतः उनकी मांगो को मान लिया गया। क्योंकि सरकार को  भारतीयों से अन्य लाभ भी लेना था। चूंकि प्रथम विश्व युद्ध के प्रयासों में भारतीय का समर्थन आवश्यक था इसी को लेकर ब्रिटिश सरकार चिंतित भी थी।  सरकार  ने स्थानीय राजस्व अधिकारियों को संयम बरतने के लिए कहा और भूमि पर जबरन कब्जा रोकने के आदेश  दिये। भूमिकर केवल उन्हीं लोगों पर लगाया गया जो इसे चुकाने में सक्षम थे।

खेड़ा सत्याग्रह का समापन

सरकार द्वारा कोई विशिष्ट आश्वासन न मिलने के कारण तथा प्रथम विश्व युद्ध के चलते सरकार द्वारा दबाव बनाये जाने के कारण  गांधी जी ने खेड़ा सत्याग्रह हो समाप्त करने का आदेश दिया। हलांकि यह सत्याग्रह पूर्ण सफल नहीं हो पाया लेकिन इस सत्याग्रह ने भारत में कुछ महत्वपूर्ण कार्य किए।

1.गांधी जी मुख्य नेता के रुप में 
1918 का खेड़ा सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था । इसने गांधी जी को किसानों के  एक मुख्य नेता के रुप में तथा सरकार को अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने में सफल रहा।
2.स्वतंत्ररता आंदोलन की मुख्य घटना
हलांकि खेड़ा सत्याग्रह असफल रहा लेकिन इसने स्वतंत्रता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण घटना के रुप में अपनी जगह बनाई।
3.जन सहयोग का पहला आंदोलन
खेड़ा सत्याग्रह  ने जन सहयोग का पहला असहयोग आंदोलन के रुप में अपनी जगह बनाई।
4.खेड़ा सत्याग्रह और गुजरात सत्याग्रह
आंदोलन के असफल होने के बावजूद भी इसने गुजरात सत्याग्रह को मजबूती प्रदान की।
सोर्स विकिपीडिया,vajiramandravi.com testbook.com pw.live pwonlyias.com studyiq.com gktoday.in 

कोई टिप्पणी नहीं: