Indian History reveal the Past

हमारे इस ब्लॉग में भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक इतिहास, राजवंशों आंदोलन स्टार्टअप टेक्नोलॉजी कला और वास्तुकला तथा आर्थिक इतिहास से संबंधित विषयों पर जानकारी दी जाती है। हम कम से कम शब्दों में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं।

लेबल

2026-10-10

अमरगढ़ वाटरफाल


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प्रस्तावना

प्रस्तुत लेख में हम अमर गढ़ वाटरफाल के बारे में चर्चा  करने जा रहे है बताते चलें कि यह मध्य प्रदेश के भोपाल का लोकप्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। जो प्राकृति का खुबसूरत दृश्य प्रस्तुत करता है जिसे प्राकृति द्वारा स्वयं से निर्मित किया गया है।

यहां पहुंचने के लिए सम्पूर्णं परिवाहन यात्रा करने के बाद लगभग 5 किलोमीटर तक की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। जिसके कारण यहां की यात्रा करना मुश्किल हो जाता है खास कर बुढ़े दम्पत्तियों के लिए।

परिचय

अमरगढ़ जलप्रपात या प्राकृतिक झरने को देखने के लिए अपकों मध्य प्रदेश राज्य की यात्रा करनी होगी क्योंकी यह झरना मध्य प्रदेश के जिला सिहोरे में बुधनी तहसील के क्षेत्र सैदगंज के पास विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित है।

यह झरना राजधानी भोपाल से लगभग 65 किलोमीटर दूर तथा होशंगाबाद यानी नर्मदा पुरम से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर है। यह प्राकृतिक झरना रातपानी वन्यजीव अभ्यारण्य के घने जंगलों के बीच स्थित होने के कारण इस स्थल तक पहुंचने के लिए लगभग 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।

इसकी उंचाई की बात करें तो यह 147 से 150 फीट की उंचाई से नीचे गिरता है क्षेत्रीय लोगों के अनूसार यह झरना अपने आसपास के लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में सबसे बड़ा झरना माना जाता है।

प्राकृतिक सौंदर्य

मानसून के मौसम में यह झरना अपने पूरे उफान पर होता है इस झरने के चारों ओर फैली हरी-भरी वादियां, चट्टाने और घने जंगल प्राकृति का एक सुंदर दृष्य प्रस्तुत करते है जिसके कारण से यह प्राकृतिक प्रेमीयों और फोटोग्राफरों को आकर्षित करता है।

यात्रा को दौरान भोपाल रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद हमें भोपाल से शाहगंज जाने वाली मुख्य सड़का का सहारा लेना होता है जो हमें खटपुरा गांव तक ले के जाती है। इसके बाद का लगभग 6 किलोमीटर का रास्ता हमें पैदल तय करना होता है क्योंकि आगे रास्ता कच्चा-पक्का और असंतुलित होने के कारण गाड़ियां नही जा पाती।

इस दौरान पर्यटक घने जंगल में उबड़-खाबड़ रास्ते पतली पगडंडीयों पर चलते है और कुछ छोटी नदी और नालों को पार करते है। मानसून के दिनों में इस क्षेत्र में पानी का बहाव तेज़ी से बढ़ता है जिसके कारण यहां बाढ़ आ जाती है।

अतः उपरोक्त कारणों के चलते बरसात के मौसम में क्षेत्रीय अधिकारीयों द्वारा इस क्षेत्र में जाने से प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इन जंगली क्षेत्रों में प्राचीन काल की कुछ गुफाएं पायी जाती है जो दर्शाकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है।

हलांकि इतिहासकारों को यहां से कोई प्राचीन साक्ष्य य शिलालेख नही मिला है जिसके कारण हम सिर्फ यही अनुमान लगा सके कि यह जंगली जानवरों का निवास स्थल होगा।

ऐतिहासिक महत्व

इस प्राकृतिक झरने के इतिहास की बात करें तो अपने प्रारम्भिक समय काल में यह क्षेत्र गोंडवाना साम्राज्य के अंतर्गत आता था गोंडवाना साम्राज्य की अंतिम शासिका रानी कमलापति के प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा था। गोंडवाना साम्राज्य के पतन के बाद यह क्षेत्र मध्यकाल में प्रसिद्ध गिन्नौरगढ़ राजघराने अधिग्रहित क्षेत्र के अंतर्गत आता था।

18वीं शताब्दी के प्रारम्भिक समय काल में दोस्त मोहम्मद खान ने छल से इस पूरे क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया और भोपाल रियासत की स्थापना कर दी।

भारतीय पर्यटन विभाग

मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा इस क्षेत्र को अभी तक एक प्रमुख अंतराष्ट्रीय पर्यटन क्षेत्र में विकसित नही किया गया है क्योंकि यह झरना रातापानी टाइगर रिज़र्व यानी वन्यजीव अभयारण्य के अतंर्गत आता है इसलिए पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां पक्के निर्माण कार्य होटल निर्माण तथा भारी पर्यटकों के अनुकूल व्यावसायिक गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है।

वन विभाग तथा स्थानीय प्रशासन यहां केवल सुरक्षा और नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करते है। यहीं कारण है यहां पर 5 किलोंमीटर की लम्बी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। इसी कारण से क्षेत्र को हिडन डेस्टिनेशन कहा जाता है।

और यही कारण है कि यह झरना व्यावसायिक पर्यटन मानचित्र पर उस तरह से नही उभरा है जैसे देश के अन्य प्रसिद्ध पर्यटन स्थल उभरे हैं। यहां पर किसी भी प्रकार का विदेशी पर्यटन नही होता क्योंकि यह उनके लिए खोला ही नही गया है।

यहां सिर्फ भोपाल सीहोर नर्मदापुरम इंदौर और आसपास के अन्य शहरों य राज्यों के घरेलू पर्यटक और युवा शामिल होते है जो वीकेंड पर ट्रेकिंग और प्राकृति का आनंद लेने के लिए यहां आते है।विदेशी आवागमन को इसलिए भी प्रतिबंधित किया गया है 

क्योंकि यह घने जंगल के भीतर  कच्चे रास्तों और सीमित बुनियादी सुविधाओं वाला दुर्गम क्षेत्र है इसलिए यहां विदेशी यात्रीयों की आवाजाही न के बराबर य नगण्य रहती है।

कुछ पर्यटक जो यहां आते भी हैं वे सिर्फ इस झरने के देखने के अपेक्षा मध्य प्रदेश के सांची सतूप वन्यजीव टूरिज्म  के लिए आते है तो शायद ही लोगों द्वारा इसके बारे में बताया जाये तो आते है।

रातापानी वन्य जीव अभ्यारण्य

रातापानी वन्य जीव अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1976 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कि गई थी जिसका विस्तार वर्ष 1983 में किया गया। इस वन्य जीव अभ्यारण्य को हाल ही 2 दिसंबर 2024 में टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया है जिसकी मंजूरी वर्ष 2008 में ही मिल गई थी।

लेकिन प्रशासनिक कार्यों में देरी के चलते अंतिम अधिसूचना जारी होने में लंबा समय लग गया। बताते चले कि यह मध्य प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व है।

स्थान
यह मुख्य रुप से मध्य प्रदेश के रायसेन और सीहोर जिलों में विध्याचल पर्वतमाला के मध्य फैला हुआ है। राजधानी भोपाल से इसकी दूरी लगभग 40-50 किलोमीटर है। इसके उत्तरी किनारे के समानांतर नर्मदा नदी बहती है और पश्चिमी सीमा पर कोलार नदी बहती है।

प्रमुख वन्य जीव
इस अभ्यारण्य में मुख्य रुप से तेतेंदुआ भालू चीतल सांभर नीलगाय चौसिंगा जंगली कुत्ते और लकड़बग्घा जैसे कई वन्यजीव पाए जाते हैं साथ ही यहां पक्षियों की 150 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है यहां विभिन्न प्रकार की तितलियां भी देखने को मिलती हैं।

ऐतिहासिक साक्ष्य

यहां भीमबेटका के शैलचित्र मिलें हैं जो कि पाषाण युग के है खास बात यह है कि इन्हें यूनेस्कों की विश्व धरोहर कि सूचि में शामिल किया गया है। इसके साथ ही इन जंगलों में गिन्नोरगढ़ का किला भी मौजूद है जो रानी कमलापति के प्रशासन का हिस्सा था। इन सभी ऐतिहासिक जगहों के अलावा यहां कैरी महादेव का मंदिर और सुंदर जलाश्य भी है।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश के रातापानी अभयारण्य के घने जंगलों और विंध्याचल की पहाड़ियों के बीच स्थित अमरगड़ वाटरफाल प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन और अनूठा गंतव्य है। यहां कि शांत वादियां रोमांचक ट्रेकिंग और झरने का मनमोहक सौंदर्य शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून देता है।

हलांकि प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ यह स्थान अपनी दुर्गम बनावट के कारण जोखिम भरा भी है। इसलिए यहां की यात्रा प्राकृति आनंद के साथ-साथ अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना भी आवश्यक है ताकि यह खूबसूरत सफर जीवनभर की एक सुखद याद बनकर रहे। 

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